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PTI Ban: इमरान खान की पार्टी पर बैन क्यों लगाना चाहता है पाकिस्तान, पीटीआई से जुड़े सांसदों का क्या होगा?
Tue, 16 Jul 2024 06:52 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Tue, 16 Jul 2024 06:52 PM IST
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इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई)
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
पाकिस्तान की सरकार पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पर नकेल कसने की तैयारी में है। यहां के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बताया है कि सरकार ने पीटीआई पार्टी पर देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के लिए अनुच्छेद-17 के तहत प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। मामला यहीं नहीं रुकने वाला है बल्कि पीटीआई संस्थापक इमरान खान समेत दो अन्य के खिलाफ पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद-6 के तहत कार्रवाई करने का निर्णय भी किया है।हालांकि, पाकिस्तान सरकार के इस फैसले का देश में विरोध भी शुरू हो चुका है। पीटीआई ने कहा है कि सरकार देश की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय इमरान खान के बारे में अधिक चिंता कर रही है। सरकार में शामिल पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) भी इस निर्णय से सहमत नहीं है। पीपीपी ने कहा कि इस मसले पर उससे राय नहीं ली गई है।
आइये जानते हैं कि पाकिस्तान ने पीटीआई को लेकर क्या फैसला किया है? पाकिस्तान सरकार ने पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय क्यों लिया है? पाकिस्तानी संविधान का अनुच्छेद 6 और अनुच्छेद 17 क्या है? फैसले का असर पीटीआई से जुड़े सांसदों पर क्या होगा? सरकार के निर्णय पर पीटीआई ने क्या प्रतिक्रिया दी है?
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान
- फोटो :
ANI
पाकिस्तान ने पीटीआई को लेकर क्या फैसला किया है?
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि उसने पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने और इसके संस्थापक इमरान खान, पूर्व राष्ट्रपति डॉ आरिफ अल्वी और पूर्व नेशनल असेंबली (एनए) के उपाध्यक्ष कासिम सूरी के खिलाफ अनुच्छेद 6 के तहत कार्रवाई करने का फैसला किया है।
इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बोलते हुए सूचना मंत्री अत्ता तरार ने कहा कि अगर देश को आगे बढ़ना है तो वह पीटीआई के रहते ऐसा नहीं कर सकता। तरार ने कहा, 'हम पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं और हमारा मानना है कि संविधान का अनुच्छेद 17 सरकार को राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है और यह मामला सुप्रीम कोर्ट को भेजा जाएगा।'
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि उसने पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने और इसके संस्थापक इमरान खान, पूर्व राष्ट्रपति डॉ आरिफ अल्वी और पूर्व नेशनल असेंबली (एनए) के उपाध्यक्ष कासिम सूरी के खिलाफ अनुच्छेद 6 के तहत कार्रवाई करने का फैसला किया है।
इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बोलते हुए सूचना मंत्री अत्ता तरार ने कहा कि अगर देश को आगे बढ़ना है तो वह पीटीआई के रहते ऐसा नहीं कर सकता। तरार ने कहा, 'हम पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं और हमारा मानना है कि संविधान का अनुच्छेद 17 सरकार को राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है और यह मामला सुप्रीम कोर्ट को भेजा जाएगा।'
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
- फोटो :
एएनआई (फाइल)
पाकिस्तान सरकार ने पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय क्यों लिया है?
पीटीआई पर नकेल कसने के कारणों पर बोलते हुए सूचना मंत्री तरार ने कहा, 'विदेशी फंडिंग मामले, 9 मई के दंगों और सिफर प्रकरण के साथ-साथ अमेरिका में पारित प्रस्ताव को देखते हुए हमारा मानना है कि पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने के लिए बहुत विश्वसनीय सबूत मौजूद हैं।'
विदेशी फंडिंग के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि पीटीआई विदेशी फंडिंग मामले में अपना बचाव करने में विफल रही है। तरार ने कहा कि जो कोई भी किसी राजनीतिक दल को वित्तीय मदद देता है, वह यह उम्मीद लेकर ऐसा करता है कि सत्ता में आने पर पार्टी उसके हितों की पूर्ति करेगी। तरार ने कहा कि पीटीआई इस्राइल सहित विदेशों में स्थित कुछ लॉबियों से मिले धन के संबंध में स्पष्टीकरण देने और अपना बचाव करने में विफल रही है।
9 मई के दंगे पर मंत्री तरार ने कहा, 'पीटीआई संस्थापक ने अपने निजी हितों के लिए राष्ट्रीय हितों को निशाना बनाया। इमरान का पूरा परिवार उन हमलों में शामिल था। उनकी तीन बहनें लाहौर कोर कमांडर के घर के बाहर मौजूद थीं।' बता दें कि भ्रष्टाचार के एक मामले में इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पूरे पाकिस्तान में हिंसा हुई थी जिसके आरोप पीटीआई के लोगों पर लगे। इस दौरान सेना से जुड़े संस्थानों पर हमले किए गए थे और तोड़फोड़ की गई थी।
पीटीआई पर नकेल कसने के कारणों पर बोलते हुए सूचना मंत्री तरार ने कहा, 'विदेशी फंडिंग मामले, 9 मई के दंगों और सिफर प्रकरण के साथ-साथ अमेरिका में पारित प्रस्ताव को देखते हुए हमारा मानना है कि पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने के लिए बहुत विश्वसनीय सबूत मौजूद हैं।'
विदेशी फंडिंग के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि पीटीआई विदेशी फंडिंग मामले में अपना बचाव करने में विफल रही है। तरार ने कहा कि जो कोई भी किसी राजनीतिक दल को वित्तीय मदद देता है, वह यह उम्मीद लेकर ऐसा करता है कि सत्ता में आने पर पार्टी उसके हितों की पूर्ति करेगी। तरार ने कहा कि पीटीआई इस्राइल सहित विदेशों में स्थित कुछ लॉबियों से मिले धन के संबंध में स्पष्टीकरण देने और अपना बचाव करने में विफल रही है।
9 मई के दंगे पर मंत्री तरार ने कहा, 'पीटीआई संस्थापक ने अपने निजी हितों के लिए राष्ट्रीय हितों को निशाना बनाया। इमरान का पूरा परिवार उन हमलों में शामिल था। उनकी तीन बहनें लाहौर कोर कमांडर के घर के बाहर मौजूद थीं।' बता दें कि भ्रष्टाचार के एक मामले में इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पूरे पाकिस्तान में हिंसा हुई थी जिसके आरोप पीटीआई के लोगों पर लगे। इस दौरान सेना से जुड़े संस्थानों पर हमले किए गए थे और तोड़फोड़ की गई थी।
पाकिस्तान में अनुच्छेद-6 और अनुच्छेद-17 क्या है?
पकिस्तान सरकार ने इमरान समेत दो अन्य के खिलाफ अनुच्छेद 6 के तहत राजद्रोह की कार्रवाई करने का फैसला लिया है। पाकिस्तान के संविधान का अनुच्छेद 6 कहता है कि कोई भी व्यक्ति जो बल प्रयोग या बल प्रदर्शन या किसी अन्य असंवैधानिक तरीके से संविधान को निरस्त या नष्ट या निलंबित या स्थगित रखता है, या निरस्त या नष्ट या निलंबित या स्थगित रखने का प्रयास करता है या षड्यंत्र करता है, वह घोर राजद्रोह का दोषी होगा।
पीटीआई पर पाबंदी लगाने के पीछे पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 17 का हवाला दिया गया है। पाकिस्तान के संविधान का अनुच्छेद 17(2) कहता है कि यदि संघीय सरकार यह घोषणा करती है कि कोई राजनीतिक दल पाकिस्तान की संप्रभुता या अखंडता के खिलाफ कार्य कर रहा है, तो संघीय सरकार ऐसी घोषणा के 15 दिनों के भीतर मामले को सर्वोच्च न्यायालय को भेजेगी। ऐसे मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम होगा।
इसके अलावा अनुच्छेद 17(3) कहता है कि प्रत्येक राजनीतिक दल को कानून के अनुसार अपने धन के स्रोत का हिसाब देना होगा।
पकिस्तान सरकार ने इमरान समेत दो अन्य के खिलाफ अनुच्छेद 6 के तहत राजद्रोह की कार्रवाई करने का फैसला लिया है। पाकिस्तान के संविधान का अनुच्छेद 6 कहता है कि कोई भी व्यक्ति जो बल प्रयोग या बल प्रदर्शन या किसी अन्य असंवैधानिक तरीके से संविधान को निरस्त या नष्ट या निलंबित या स्थगित रखता है, या निरस्त या नष्ट या निलंबित या स्थगित रखने का प्रयास करता है या षड्यंत्र करता है, वह घोर राजद्रोह का दोषी होगा।
पीटीआई पर पाबंदी लगाने के पीछे पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 17 का हवाला दिया गया है। पाकिस्तान के संविधान का अनुच्छेद 17(2) कहता है कि यदि संघीय सरकार यह घोषणा करती है कि कोई राजनीतिक दल पाकिस्तान की संप्रभुता या अखंडता के खिलाफ कार्य कर रहा है, तो संघीय सरकार ऐसी घोषणा के 15 दिनों के भीतर मामले को सर्वोच्च न्यायालय को भेजेगी। ऐसे मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय अंतिम होगा।
इसके अलावा अनुच्छेद 17(3) कहता है कि प्रत्येक राजनीतिक दल को कानून के अनुसार अपने धन के स्रोत का हिसाब देना होगा।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ
- फोटो :
ANI
पीटीआई पर बैन लगेगा तो इसके सांसदों का क्या होगा?
इसी साल हुए पाकिस्तान के आम चुनाव में पीटीआई से जुड़े उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं। सरकार के हालिया फैसले से इनके भविष्य पर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं। पाकिस्तान के अधिवक्ता रिदा हुसैन ने डॉन अखबार को बताया आरक्षित सीटों के फैसले में बहुमत से यह माना गया कि पीटीआई एक राजनीतिक पार्टी थी जिसने 2024 के आम चुनावों में राष्ट्रीय और प्रांतीय विधानसभाओं में सामान्य सीटें हासिल की हैं या जीती हैं। उन्होंने कहा कि इस आदेश का मतलब यह है कि पीटीआई की संसद में मौजूदगी होगी और उसे सामान्य सीटों की आनुपातिक संख्या के अनुसार आरक्षित सीटें दी जाएंगी। अधिवक्ता हुसैन का मानना है कि पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का फैसला इस फैसले की प्रतिक्रिया लगता है।
हुसैन ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 17(2) में किसी पार्टी पर प्रतिबंध लगाने के लिए जो प्रक्रिया बताई गई है वह एक अनिवार्य प्रावधान है और मामले में सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय होगा। इसके अलावा, पाकिस्तान के चुनाव अधिनियम 2017 की धारा 212(3) में कहा गया है कि किसी राजनीतिक दल को केवल तभी भंग किया जा सकता है जब सर्वोच्च न्यायालय सरकार की घोषणा को बरकरार रखे। इसलिए सरकार की घोषणा का संसद के किसी भी मौजूदा सदस्य पर तब तक कोई असर नहीं पड़ेगा जब तक कि सुप्रीम कोर्ट इसे बरकरार नहीं रखता।
इसी साल हुए पाकिस्तान के आम चुनाव में पीटीआई से जुड़े उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं। सरकार के हालिया फैसले से इनके भविष्य पर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं। पाकिस्तान के अधिवक्ता रिदा हुसैन ने डॉन अखबार को बताया आरक्षित सीटों के फैसले में बहुमत से यह माना गया कि पीटीआई एक राजनीतिक पार्टी थी जिसने 2024 के आम चुनावों में राष्ट्रीय और प्रांतीय विधानसभाओं में सामान्य सीटें हासिल की हैं या जीती हैं। उन्होंने कहा कि इस आदेश का मतलब यह है कि पीटीआई की संसद में मौजूदगी होगी और उसे सामान्य सीटों की आनुपातिक संख्या के अनुसार आरक्षित सीटें दी जाएंगी। अधिवक्ता हुसैन का मानना है कि पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का फैसला इस फैसले की प्रतिक्रिया लगता है।
हुसैन ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 17(2) में किसी पार्टी पर प्रतिबंध लगाने के लिए जो प्रक्रिया बताई गई है वह एक अनिवार्य प्रावधान है और मामले में सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय होगा। इसके अलावा, पाकिस्तान के चुनाव अधिनियम 2017 की धारा 212(3) में कहा गया है कि किसी राजनीतिक दल को केवल तभी भंग किया जा सकता है जब सर्वोच्च न्यायालय सरकार की घोषणा को बरकरार रखे। इसलिए सरकार की घोषणा का संसद के किसी भी मौजूदा सदस्य पर तब तक कोई असर नहीं पड़ेगा जब तक कि सुप्रीम कोर्ट इसे बरकरार नहीं रखता।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान
- फोटो :
एएनआई (फाइल)
सरकार के निर्णय पर पीटीआई ने क्या प्रतिक्रिया दी है?
सरकार के इस कदम का पीटीआई ने तीखा विरोध किया है। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पीटीआई ने कहा, 'कोई भी देशभक्त देश की सबसे बड़ी और सबसे लोकप्रिय पार्टी पर प्रतिबंध लगाने के बारे में नहीं सोच सकता, क्योंकि ऐसा करना पाकिस्तान की नींव को उखाड़ फेंकने और देश को गृहयुद्ध की ओर ले जाने के जैसा होगा।'
पाकिस्तानी संसद के उच्च अदन सीनेट में विपक्ष के नेता शिबली फराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार खान से डर गई थी, जिसके बाद उसने अंतिम कोशिश के रूप में पार्टी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार देश की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय इमरान खान के बारे में अधिक चिंतित है।
सरकार के इस कदम का पीटीआई ने तीखा विरोध किया है। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पीटीआई ने कहा, 'कोई भी देशभक्त देश की सबसे बड़ी और सबसे लोकप्रिय पार्टी पर प्रतिबंध लगाने के बारे में नहीं सोच सकता, क्योंकि ऐसा करना पाकिस्तान की नींव को उखाड़ फेंकने और देश को गृहयुद्ध की ओर ले जाने के जैसा होगा।'
पाकिस्तानी संसद के उच्च अदन सीनेट में विपक्ष के नेता शिबली फराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार खान से डर गई थी, जिसके बाद उसने अंतिम कोशिश के रूप में पार्टी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार देश की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय इमरान खान के बारे में अधिक चिंतित है।