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कोरोना: हृदय और मधुमेह रोगियों को क्यों है कोविड-19 का ज्यादा खतरा, जानें क्या कहता है शोध
Fri, 27 Nov 2020 08:42 AM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Tanuja Yadav
Updated Fri, 27 Nov 2020 08:42 AM IST
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Amar Ujala
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कोरोना वायरस को लेकर रोजाना नए अध्ययन या शोध हो रहे हैं। एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि कोलेस्ट्रोल इंसान की मानव कोशिकाओं को संक्रमित करने में कोरोना वायरस की मदद कर रहा है। इस शोध में बताया गया है कि क्यों मधुमेह और हृदयरोग जैसी बीमारी वाले मरीजों में गंभीर कोविड-19 लक्षण विकसित होते हैं।
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कोलेस्ट्रोल अणुओं से चिपकता है सार्स-कोव 2
शोधकर्ताओं ने पाया कि सार्स-कोव 2, जिसकी वजह से कोविड-19 होता है, कोलेस्ट्रोल अणुओं के साथ चिपक जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये अणु अपने नियमित सेल रिसेप्टर से बंधते हैं, जिसे एसआर-बी1 कहा जाता है। ये स्थिति पैदा करने में मदद करता है जिससे इसका स्पाइक प्रोटीन एसीई2 रिसेप्टर के साथ बंध सके, जो इसे कोशिकाओं को संक्रमित करने की अनुमित देता है।
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यह शोध 'नेचर मेटाबॉलिज्म' में प्रकाशित हुआ है। इस शोध में खासकर एसआर-बी1 (SR-B1) पर फोकस किया गया है, जो कोलेस्ट्रोल अणुओं के साथ संपर्क में होता है और मनुष्य की पूरे शरीर की कोशिकाओं पर पाया जाता है। यहां तक कि फेफड़ों में भी इसकी उपस्थिति होती है, जहां कोरोना वायरस अटैक करता है।
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एसआर-बी1 को बेअसर कर रोक सकते हैं संक्रमण
एसआर-बी1 को बेअसर करके संक्रमण को रोका जा सकता है
शोध में पाया गया है कि सार्स-कोव 2 प्रत्यक्ष तौर पर रिसेप्टर को नष्ट नहीं करता है, लेकिन यह कोशिकाओं में घुसने के लिए एसआर-बी1 से जुड़ने वाली कोलेस्ट्रोल की प्रक्रिया का लाभ उठा सकता है। अपने प्रयोगों में वैज्ञानिकों ने पाया कि सबयूनिट कोलेस्ट्रोल में संलग्न हो सकता है, इसका मतलब यह है कि जब कोलेस्ट्रोल प्राकृतिक तौर पर रिसेप्टर की ओर बढ़ता है तो यह कोरोना वायरस को कोशिकाओं की सतह पर भी लाता है।
इसके बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि एसआर-बी1 को अवरूद्ध करके और इसे बेअसर करके, संक्रमण को रोका जा सकता है। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में बताया कि एसआर-बी1 सार्स-कोव 2 को प्रवेश और संक्रमण की सुविधा देता है। इस तरह, एसआर-बी1, सार्स-कोव 2 संक्रमण को सीमित करने के लिए एक चिकित्सीय लक्ष्य का प्रतिनिधित्व भी कर सकता है।
हृदयरोग व मधुमेह के मरीजों को मौत का खतरा ज्यादा
शोधकर्ताओं का कहना है कि हृदयरोग और मधुमेह जैसी बीमारी गंभीर कोरोना वायरस की बढ़ती जोखिम से जुड़े हैं। कोरोना वायरस की चपेट में आए लोगों में लगभग आधी संख्या उन मरीजों की है, जिनको पहले से कोई बीमारी रही है। इसमें मुख्य तौर पर हृदयरोग, मधुमेह और मस्तिष्क संबंधी रोग शामिल हैं।
हर तीसरा मरीज हृदय व पांचवां मधुमेह पीड़ित
इसके अलावा मोटापे और मधुमेह जैसी बीमारी वाले मरीज भी कोरोना वायरस की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। एनएचएस डाटा के मुताबिक, अप्रैल से हर तीसरे कोरोना मरीज को दिल की बीमारी रही है और तकरीबन हर पांचवा मरीज मधुमेह का शिकार रहा है।