Sri Lanka: चीन ने कर्ज राहत के मुद्दे पर अधर में क्यों लटका रखा है श्रीलंका को?
जानकारों के मुताबिक आईएमएफ अपेक्षा रखता है कि संबंधित देश सीधे उसे अपना आश्वासन भेजे। यानी चीन को सीधे आईएमएफ को पत्र लिख कर बताना होगा कि वह श्रीलंका को राहत देने को तैयार है। भारत ने ऐसा ही पत्र उसे भेजा था...
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आश्वासन देने के बावजूद श्रीलंका को कर्ज राहत देने के मामले में चीन ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को औपचारिक पत्र नहीं भेजा है। ऐसा संकेत सोमवार को मिला, जब आईएमएफ के प्रवक्ता ने कर्ज राहत के संबंध में सिर्फ भारत का पत्र मिलने का उल्लेख किया। जबकि पहले कहा गया था कि भारत और चीन दोनों ने ऋण राहत संबंधी पत्र आईएमएफ को भेज दिया है। आईएमएफ के बयान से यहां सत्ता के हलकों में बेचैनी देखने को मिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पिछले साल श्रीलंका के लिए 2.9 बिलियन डॉलर का कर्ज मंजूर करते हुए शर्त लगाई थी कि यह रकम पाने के लिए श्रीलंका को अपने पुराने कर्जदाताओं से कर्ज वापसी की समयसीमा में राहत का आश्वासन हासिल करना होगा। पिछले हफ्ते भारत श्रीलंका को ऐसा आश्वासन देने वाला पहला देश बना। उसके बाद खबर आई कि चीन ने भी उसे राहत देने का भरोसा दिया है।
आईएमएफ के प्रवक्ता ने कहा- ‘हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत ने आईएमएफ प्रबंधन को संकेत दिया है कि वह वित्तीय/ऋण राहत देने के लिए वचनबद्ध है, ताकि आईएमएफ के सहायता कार्यक्रम के तहत ऋण मिलने से पहले श्रीलंका के सार्वजनिक कर्ज के सुरक्षित होने का भरोसा बन सके। हम भारत की वचनबद्धता का स्वागत करते हैं।’
यहां विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने श्रीलंका को कर्ज राहत देने का आरंभिक संकेत दिया है। लेकिन यह वैसा ठोस आश्वासन नहीं है, जिसकी उम्मीद आईएमएफ करता है। इसीलिए आईएमएफ के प्रवक्ता ने इस बारे में बयान देते वक्त चीन का जिक्र नहीं किया। चीन के साथ चल रही वार्ता से संबंधित एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया है कि अभी चीन के साथ और बातचीत करनी होगी।
जानकारों के मुताबिक आईएमएफ अपेक्षा रखता है कि संबंधित देश सीधे उसे अपना आश्वासन भेजे। यानी चीन को सीधे आईएमएफ को पत्र लिख कर बताना होगा कि वह श्रीलंका को राहत देने को तैयार है। भारत ने ऐसा ही पत्र उसे भेजा था। इस बीच श्रीलंका अपने दूसरे द्विपक्षीय कर्जदाताओं से भी ऐसा आश्वासन पाने के लिए बातचीत चला रहा है।
एक अधिकारी ने वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम से कहा कि जब सारे पक्षों से आश्वासन मिल जाएंगे, तब आईएमएफ के अधिकारी श्रीलंका को ऋण देने के बारे में अपना प्रस्ताव आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड के सामने रखेंगे। बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद ही कर्ज की रकम श्रीलंका को मिल सकेगी।
समझा जाता है कि जापान और पेरिस क्लब भी श्रीलंका को कर्ज राहत देने पर राजी हो गए हैं। लेकिन उन्होंने अभी अपना पत्र आईएमएफ को नहीं भेजा है। श्रीलंकाई अधिकारियों के मुताबिक इन दोनों पक्षों के पास कर्ज संकट से निपटने का लंबा अनुभव है। इसलिए उनसे राहत पाने की औपचारिक पूरी होने में ज्यादा दिक्कत पेश नहीं आएगी।
लेकिन कुछ पर्यवेक्षकों की राय है कि इन दोनों पक्षों की निगाह चीन पर है। चीन के पत्र भेजने के बाद ही वे कर्ज राहत संबंधी औपचारिक पत्र आईएमएफ को भेजेंगे। श्रीलंकाई अधिकारियों का दावा है कि देश के अंदर वित्तीय स्थिरता बहाल करने के लिए जिन कदमों को लागू करने की शर्त आईएमएफ ने लगाई थी, उसे वे पूरा कर चुके हैँ। इसलिए अब सारी बात चीन पर आकर टिक गई है।