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तैयारी: डब्ल्यूएचओ ने कहा- कोरोना की वजह से आईं चुनौतियों से सबक लेना जरूरी, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना होगा
Thu, 09 Sep 2021 08:34 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 09 Sep 2021 08:34 PM IST
सार
डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया की रीजनल डायरेक्टर डॉ. पूनम ने कहा कि कोरोना महामारी ने अभूतपूर्व चुनौतियों को हमारे सामने खड़ा कर दिया है। विश्व स्तर पर कोई भी देश इस पैमाने की आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं था।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन
- फोटो : Social media
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विस्तार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों ने गुरुवार को मौजूदा कोरोना महामारी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा की। इस दौरान भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों के लिए तैयार रहने के लिए स्वास्थ्य आपात सुरक्षा प्रणालियों को और मजबूत करने पर भी बात हुई।
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डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया की रीजनल डायरेक्टर डॉ. पूनम ने कहा कि कोरोना महामारी ने अभूतपूर्व चुनौतियों को हमारे सामने खड़ा कर दिया है। विश्व स्तर पर कोई भी देश इस पैमाने की आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं था। यह महत्वपूर्ण है कि स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के हमारे प्रयासों को सफल बनाने के लिए चल रही महामारी से सबक लिया जाए। आपातकालीन जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना 2014 से डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का एक प्रमुख कार्यक्रम रहा है, जो 2004 के हिंद महासागर में आई सुनामी के बाद से लगातार तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इस आपदा ने छह देशों को बुरी तरह से प्रभावित किया था।
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बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि कोरोना के प्रकोप से महीनों पहले क्षेत्र के सदस्य देशों ने जोखिम मूल्यांकन, निवेश बढ़ाने, बहु-क्षेत्रीय योजनाओंके कार्यान्वयन को बढ़ाने और आपातकालीन तैयारी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 'दिल्ली डिक्लेरेशन' को अपनाया था। इसके बाद सदस्य देशों ने स्वास्थ्य आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (आईएचआर-2005) का पालन करने में काफी हद तक सफलता पा ली है।
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क्षेत्रीय निदेशक ने कहा कि देशों ने महामारी की अभूतपूर्व चुनौतियों का मुकाबला करने की कोशिश करते हुए ट्रांसमिशन को नियंत्रित करने और जान बचाने के लिए मौजूदा मुख्य क्षमताओं का पूरी तरह से उपयोग किया। उन्होंने कहा कि हमारी स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणालियों और व्यवस्थाओं में आ रही कमियों को ढूंढने और उसे खत्म करने की दिशा में काम करने की जरूरत है।