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Hindi News ›   World ›   Who is the home minister of Taliban: Haqqani network was involved in the attack on the Indian embassy, its leader Sirajuddin got the command

कौन है तालिबान का गृह मंत्री: भारतीय दूतावास पर हमले में शामिल था हक्कानी नेटवर्क, उसी के नेता सिराजुद्दीन को मिली कमान

Tue, 07 Sep 2021 09:10 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 07 Sep 2021 09:10 PM IST
सार

अफगानिस्तान में नव गठित तालिबान सरकार का गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी को बनाया गया है। सिराजुद्दीन के सिर पर अमेरिका ने 50 लाख डॉलर का इनाम रखा था। वह भारतीय दूतावास पर हमले में भी शामिल रहा है। 
 

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Who is the home minister of Taliban: Haqqani network was involved in the attack on the Indian embassy, its leader Sirajuddin got the command
सिराजुद्दीन हक्कानी - फोटो : Social Media

विस्तार

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार का गृह मंत्री बना सिराजुद्दीन हक्कानी मोस्ट वांटेड आतंकियों में शुमार रहा है। अमेरिका ने कभी उसके सिर पर 50 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया था। वह भारतीय दूतावास पर हुए हमले में भी शामिल रहा है। 

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सिराजुद्दीन हक्कानी का नाता पाकिस्तान के नॉर्थ वजीरिस्तान इलाके से है। उसके आतंकी संगठन अलकायदा से भी करीबी संबंध रहे हैं। हक्कानी ने पाकिस्तान में बैठे-बैठे ही अफगानिस्तान में कई आतंकी हमले कराए थे। इनमें अमेरिका और नाटो सेनाओं को निशाना बनाया गया था। इसके अलावा 2008 में हामिद करजई की हत्या की साजिश रचने के मामले में भी सिराजुद्दीन हक्कानी शामिल रहा है। 
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सिराजुद्दीन के आतंकी संगठन को हक्कानी नेटवर्क के नाम से भी जाना जाता है। काबुल के एक होटल में 2008 में हुए आतंकी हमले में सिराजुद्दीन हक्कानी वॉन्टेड रहा है। इस हमले में एक अमेरिकी नागरिक समेत छह लोगों की मौत हो गई थी। हक्कानी का नाम वैसे तो कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है, लेकिन जिन तीन बड़ी घटनाओं में इसका सीधा हाथ रहा है, उनमें से दो घटनाएं भारतीय दूतावास पर बड़े आत्मघाती हमले से जुड़ी हैं। इतना ही नहीं, पाकिस्तान से सीधा संबंध होने की वजह से भी यह आतंकी संगठन अब भारत के लिए बड़ी चिंता का कारण बना है।

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जलालुद्दीन हक्कानी का बेटा है सिराजुद्दीन

अफगानिस्तान में सरकार के खिलाफ हमलों में एक समय तालिबान से ज्यादा हक्कानी नेटवर्क का नाम सामने आने लगा। ये वो समय था, जब भारत ने भी अफगानिस्तान की हामिद करजई सरकार से नजदीकी बढ़ाना शुरू की। सरकार के खिलाफ हक्कानी नेटवर्क के ऑपरेशन की कमान जलालुद्दीन हक्कानी के बेटे सिराजुद्दीन ने संभाली, जो कि अपने पिता से भी खतरनाक माना जाता था। इसके बाद 2008 से लेकर 2020 तक अफगानिस्तान में कई बड़े हमलों में हक्कानी नेटवर्क का नाम सामने आया। मौजूदा समय में इस संगठन में 10 हजार से लेकर 15 हजार आतंकी होने का अनुमान है।

अफगान सरकार के खिलाफ कौन से बड़े हमलों में शामिल रहा हक्कानी नेटवर्क?
हक्कानी नेटवर्क का नाम अफगानिस्तान में कई बड़े हमलों में शामिल रहा है। इनमें सैकड़ों की संख्या में अफगान नागरिक, अमेरिका और अन्य देशों की सेनाओं के जवानों और सरकारी अफसरों की मौत हुई। इस संगठन के तीन सबसे बड़े हमलों में एक हमला 27 अप्रैल 2008 में हुआ था, जब हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों ने तालिबान के साथ मिलकर तत्कालीन अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई पर ही हमला कर दिया। यह हमला एक हाई-प्रोफाइल मिलिट्री परेड के दौरान हुआ था, जिसमें अमेरिकी राजदूत भी शामिल हुए थे। इस घटना को आत्मघाती हमलावरों के साथ बंदूकधारियों ने अंजाम दिया था। हमले में अफगानिस्तान के एक सांसद समेत तीन लोग मारे गए थे। बताया जाता है कि यह अफगान राजधानी पर इस क्षमता का पहला बड़ा हमला था।
 

भारत इसके हमले का शिकार बना

अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के एक और बड़े हमले का शिकार भारत बना था। 7 जुलाई 2008 को हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों ने काबुल स्थित भारतीय दूतावास को निशाना बनाया। कहने को तो दूतावास की इमारत अफगानिस्तान के सबसे सुरक्षित इलाके में थी, लेकिन आतंकियों ने सुरक्षा में सेंध लगाते हुए कार के जरिए ब्लास्ट किया। इस हमले में छह भारतीयों समेत 58 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 100 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए थे।  
इतना ही नहीं, 2009 में भी इस आतंकी संगठन ने फिर काबुल स्थित भारतीय दूतावास को निशाना बनाया। आत्मघाती हमले में 17 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 63 लोगों की जान गई थी। बताया जाता है कि भारत ने तब अफगानिस्तान में 5280 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स शुरू करने का वादा किया था। इसी के चलते पाकिस्तान की आईएसआई ने इन दो हमलों में हक्कानी नेटवर्क की पूरी मदद की थी।

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