कौन हैं मलयेशिया के नए पीएम मोहिउद्दीन, क्या महातिर की विदाई से सुधरेंगे भारत से संबंध
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मलयेशिया में महीनों से जारी सियासी उठापठक पर उस समय विराम लग गया जब सुल्तान ने पूर्व गृह मंत्री मोहिउद्दीन यासीन को देश का नया प्रधानमंत्री बनाए जाने की घोषणा की। बता दें कि महातिर मोहम्मद के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से ही मलयेशिया में राजनैतिक गतिरोध जारी था।
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मलयेशिया में महीनों से जारी सियासी उठापठक पर उस समय विराम लग गया जब सुल्तान ने पूर्व गृह मंत्री मोहिउद्दीन यासीन को देश का नया प्रधानमंत्री बनाए जाने की घोषणा की। बता दें कि महातिर मोहम्मद के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से ही मलयेशिया में राजनैतिक गतिरोध जारी था।
महातिर मोहम्मद के सत्ता में आने के बाद मलयेशिया की पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ी थी। इतना ही नहीं, महातिर ने कई बार भारत के अंदरूनी मामलों को लेकर तल्ख टिप्पणियां भी की थी। इसके कारण भारत और मलयेशिया के संबंध पिछले 70 सालों में सबसे नीचे चले गए हैं।
भारत द्वारा बार-बार चेतावनी देने के बाद भी महातिर मोहम्मद ने पाकिस्तान को खुश करने के लिए भारत के निजी मामलों में टिप्पणियां की। जिसके बाद भारत ने मलयेशिया से आने वाले पाम ऑयल के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस कारण मलयेशिया को अरबों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बता दें कि महातिर मोहम्मद 1981 से 2003 तक मलयेशिया के प्रधानमंत्री रह चुके हैं और 2018 में वो एक बार फिर से प्रधानमंत्री चुने गए थे। महातिर के सत्ता में रहने के दौरान भारत से तनाव लगातार बना हुआ था।
कौन हैं नए प्रधानमंत्री मोहिउद्दीन
मोहिउद्दीन ने अपने राजनैतिक सफर की शुरूआत यूनाइटेड मलय नेशनल ऑर्गनाइजेशन (यूएमएनओ) से की थी। 15 साल में ही वह जोहोर प्रांत के विधायक से मुख्यमंत्री बन गए।
आठ बार के सांसद मोहिउद्दीन ने विभिन्न सरकारों में कई प्रमुख मंत्रालयों को संभाला है। हालांकि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर होने के कारण उन्हें 2016 में यूएमएनओ से निष्कासित कर दिया गया।
इसके बाद मोहिउद्दीन ने महातिर मोहम्मद के साथ हाथ मिलाया और नई पार्टी परती परीबूमी बेरसातू मलेशिया (बेरसातू) का गठन किया। बता दें कि मोहिउद्दीन पार्टी के अध्यक्ष हैं जबकि महातिर चेयरमैन हैं।
इन्होंने 2018 में चुनाव से पहले पकातन हरापन नामक एक गठबंधन बनाया जिसने बरिसन नेशनल गठबंधन को आम चुनावों में मात दी। इस जीत के बाद महातिर मोहम्मद मलयेशिया के सातवें प्रधानमंत्री बने जबकि मोहिउद्दीन को गृह मंत्री बनाया गया।