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COVID-19: नए वैरिएंट पर डब्ल्यूएचओ की बैठक पूरी, देशों के लिए जल्द जारी होंगी गाइडलाइंस
Fri, 26 Nov 2021 04:56 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 26 Nov 2021 04:56 PM IST
सार
डब्ल्यूएचओ ने अब तक की जानकारी के आधार पर दावा किया था कि B.1.1.529 स्वरूप सबसे अधिक बदलाव की वजह से पैदा हुआ वैरिएंट है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोनावायरस के नए स्वरूप बी.1.1.529 को लेकर आपात बैठक की। बैठक के बाद डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता ने कहा कि संस्थान जल्द ही इस वायरस को लेकर देश को गाइडलाइंस जारी करेगा, जिसके तहत वे आगे के कदम उठा सकेंगे।
डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमेयर ने कहा, "शुरुआती विश्लेषण बताता है कि यह इस वैरिएंट में कई म्यूटेशन हैं, जिसके लिए काफी रिसर्च की जरूरत है। इस वैरिएंट का असर समझने के लिए हमें कई हफ्ते लग सकते हैं। रिसर्चर्स ज्यादा जानकारी जुटाने में लगे हैं।"
डब्ल्यूएचओ ने अब तक की जानकारी के आधार पर दावा किया था कि यह स्वरूप सबसे अधिक बदलाव की वजह से पैदा हुआ वैरिएंट है। सबसे पहले इसकी पहचान इस हफ्ते दक्षिण अफ्रीका में की गई थी और यह पहले ही बोत्सवाना सहित कई पड़ोसी देशों में फैल चुका है। वहां पता चला है कि वायरस का यह स्वरूप पूरी तरह से टीकाकरण करा चुके लोगों में मिला है।
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इससे पहले यूके की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने एक बयान में कहा, "वैरिएंट में बड़ी संख्या में स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन के साथ-साथ वायरल जीनोम के अन्य हिस्सों में म्यूटेशन शामिल हैं। ये संभावित रूप से जैविक रूप से महत्वपूर्ण म्यूटेशन हैं जो टीके, उपचार और ट्रांसमिशन के संबंध में वायरस के व्यवहार को बदल सकते हैं। इसके लिए अधिक जांच और सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमेयर ने कहा, "शुरुआती विश्लेषण बताता है कि यह इस वैरिएंट में कई म्यूटेशन हैं, जिसके लिए काफी रिसर्च की जरूरत है। इस वैरिएंट का असर समझने के लिए हमें कई हफ्ते लग सकते हैं। रिसर्चर्स ज्यादा जानकारी जुटाने में लगे हैं।"
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डब्ल्यूएचओ ने अब तक की जानकारी के आधार पर दावा किया था कि यह स्वरूप सबसे अधिक बदलाव की वजह से पैदा हुआ वैरिएंट है। सबसे पहले इसकी पहचान इस हफ्ते दक्षिण अफ्रीका में की गई थी और यह पहले ही बोत्सवाना सहित कई पड़ोसी देशों में फैल चुका है। वहां पता चला है कि वायरस का यह स्वरूप पूरी तरह से टीकाकरण करा चुके लोगों में मिला है।
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इससे पहले यूके की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने एक बयान में कहा, "वैरिएंट में बड़ी संख्या में स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन के साथ-साथ वायरल जीनोम के अन्य हिस्सों में म्यूटेशन शामिल हैं। ये संभावित रूप से जैविक रूप से महत्वपूर्ण म्यूटेशन हैं जो टीके, उपचार और ट्रांसमिशन के संबंध में वायरस के व्यवहार को बदल सकते हैं। इसके लिए अधिक जांच और सावधानी बरतने की आवश्यकता है।