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रूस पर डोनल्ड ट्रंप के हाथ बांधेगी अमरीकी संसद
बीबीसी हिन्दी
Updated Mon, 24 Jul 2017 10:46 AM IST
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अमरीकी संसद ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने संबंधी नए क़ानून पर सहमति जताई है। यह प्रतिबंध रूस के दंडित करने के उद्देश्य से लगाए जाएंगे। रूस पर अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में दखल देने का आरोप है। नए कानून के तहत राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की उन शक्तियों को भी सीमित कर दिया जाएगा।
जिससे वह रूस पर किसी तरह के प्रतिबंध को वापस ले सकें। उन्होंने पहले कहा था कि उन्हें रूस के मामले में कुछ राजनयिक छूट की ज़रूरत है ।ट्रंप ने चुनाव में रूस के किसी भी तरह के दखल के आरोपों को ख़ारिज किया है।
रूस ने भी आरोपों को ख़ारिज किया है। हालांकि अमरीकी जांच एजेंसियां इस बात का पता लगा रही है। कि ट्रंप ने किसी रूसी अधिकारी से चुनाव के वक्त सांठगांठ की थी या नही। संवाददाताओं का कहना है कि संसद में हुआ द्विदलीय समझौता इस ओर इशारा करता है कि अमरीकी संसद रूस को लेकर काफी सख्त है। चाहे ट्रंप का नजरिया जो भी हो। राष्ट्रपति ट्रंप चाहते तो प्रतिबंध संबंधी कानून को वीटो कर सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
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अगर वह ऐसा करते तो रूस के साथ कऱीबी रिश्ते के शक की आग धधक उठती। डोनल्ड ट्रंप- व्लादिमिर पुतिन के बीच 'गोद लेने' पर ही क्यों हुई चर्चा। अमरीकी संसद के सदस्य बेन कार्डिन कहते हैं, "अमरीका रूस को स्पष्ट संदेश देना चाहता है और ऐसा करने में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की मदद चाहिए।"
संसद के एक और सदस्य चक शूमर कहते हैं, "अमरीकी संसद तत्काल कार्रवाई करेगी। एक कड़े क़ानून की जरूरत थी।" नए क़ानून के तहत ईरान और उत्तर कोरिया पर भी आगे प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सीनेट में यह बिल पास हो चुका है। प्रतिनिधि सदन में इस पर वोटिंग होना बाकी है।
चुनाव में कथित दखल के बाद बराक ओबामा ने 35 राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था. इसके अलावा अमरीका में दो रूसी परिसरों को भी बंद कर दिया था। रूस ने दोनों जब्त परिसरों को लौटाने की मांग की है। अब हवेलियों को लेकर फंसा रूस-अमरीका में पेंच। पिछले सप्ताह उच्च स्तरीय बातचीत के बाद रूसी अधिकारियों ने कहा था कि मामला सुलझने के कगार पर है।
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जिससे वह रूस पर किसी तरह के प्रतिबंध को वापस ले सकें। उन्होंने पहले कहा था कि उन्हें रूस के मामले में कुछ राजनयिक छूट की ज़रूरत है ।ट्रंप ने चुनाव में रूस के किसी भी तरह के दखल के आरोपों को ख़ारिज किया है।
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रूस ने भी आरोपों को ख़ारिज किया है। हालांकि अमरीकी जांच एजेंसियां इस बात का पता लगा रही है। कि ट्रंप ने किसी रूसी अधिकारी से चुनाव के वक्त सांठगांठ की थी या नही। संवाददाताओं का कहना है कि संसद में हुआ द्विदलीय समझौता इस ओर इशारा करता है कि अमरीकी संसद रूस को लेकर काफी सख्त है। चाहे ट्रंप का नजरिया जो भी हो। राष्ट्रपति ट्रंप चाहते तो प्रतिबंध संबंधी कानून को वीटो कर सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
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अगर वह ऐसा करते तो रूस के साथ कऱीबी रिश्ते के शक की आग धधक उठती। डोनल्ड ट्रंप- व्लादिमिर पुतिन के बीच 'गोद लेने' पर ही क्यों हुई चर्चा। अमरीकी संसद के सदस्य बेन कार्डिन कहते हैं, "अमरीका रूस को स्पष्ट संदेश देना चाहता है और ऐसा करने में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की मदद चाहिए।"
संसद के एक और सदस्य चक शूमर कहते हैं, "अमरीकी संसद तत्काल कार्रवाई करेगी। एक कड़े क़ानून की जरूरत थी।" नए क़ानून के तहत ईरान और उत्तर कोरिया पर भी आगे प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सीनेट में यह बिल पास हो चुका है। प्रतिनिधि सदन में इस पर वोटिंग होना बाकी है।
चुनाव में कथित दखल के बाद बराक ओबामा ने 35 राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था. इसके अलावा अमरीका में दो रूसी परिसरों को भी बंद कर दिया था। रूस ने दोनों जब्त परिसरों को लौटाने की मांग की है। अब हवेलियों को लेकर फंसा रूस-अमरीका में पेंच। पिछले सप्ताह उच्च स्तरीय बातचीत के बाद रूसी अधिकारियों ने कहा था कि मामला सुलझने के कगार पर है।