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जी-7 सम्मेलन से पहले व्हाइट हाउस बोला, कश्मीर पर भारत-पाक की सहायता को तैयार

Fri, 23 Aug 2019 09:04 PM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 23 Aug 2019 09:04 PM IST
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White House says before G-7 summit ready to assist India Pakistan on Kashmir issue
डोनाल्ड ट्रंप-नरेंद्र मोदी-इमरान खान (फाइल फोटो) - फोटो : Instagram
भारत और पाकिस्तान में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने अपरोक्ष रूप से एक बार फिर कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश की है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कश्मीर मसले पर भारत और पाकिस्तान की सहायता करने को तैयार हैं, लेकिन दोनों पक्षों को इसके लिए पहल करनी होगी। अधिकारी ने यह भी कहा कि ट्रंप कश्मीर के हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
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यह पहला मौका नहीं है जब राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से कश्मीर को लेकर मध्यस्थता की पेशकश की गई है। हालांकि, भारत इसे द्विपक्षीय मसला बताते हुए ट्रंप की इस पेशकश को पहले ही ठुकरा चुका है। व्हाइट हाउस के अधिकारी ने फ्रांस में होने जा रही जी-7 शिखर बैठक से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप की मुलाकात से पहले कहा, 'अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद अमेरिका कश्मीर घाटी के हालात पर करीब से नजर रख रहा है। हम लगातार शांति और संयम का आह्वान कर रहे हैं। हम कश्मीर के घटनाक्रम की वजह से पड़ने वाले व्यापक असर और क्षेत्र में संभावित अस्थिरता की आशंका पर संज्ञान ले रहे हैं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह दोनों पक्षों में तनाव घटाने के लिए सहायता को तैयार हैं, लेकिन हम जानते हैं कि भारत ने औपचारिक रूप से मध्यस्थता के लिए कोई अनुरोध नहीं किया है।' 
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अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप फ्रांस में मोदी के साथ होने वाली बैठक में संभवत: यह जानना चाहेंगे कि तनाव घटाने और कश्मीर में मानवाधिकार का सम्मान करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की क्या योजना है।
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अमेरिकी पत्रिका पर फूटा कश्मीरी पंडितों का गुस्सा

अमेरिका में कश्मीरी पंडितों ने एक लोकप्रिय मेडिकल पत्रिका में घाटी के लोगों के स्वास्थ्य व सुरक्षा पर प्रकाशित संपादकीय पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। 'द लांसेट' ने 16 अगस्त को संपादकीय प्रकाशित किया, जिसमें कश्मीर के लोगों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वतंत्रता पर चिंता जाहिर की गई थी। लेख में कहा गया कि कश्मीरी लोगों के दशकों पुराने संघर्ष से मिले गहरे घावों को भरने की जरूरत है न कि उन्हें आगे और हिंसा के अधीन बना दिया जाना चाहिए।' संपादकीय पर गुस्सा जाहिर करते हुए कश्मीरी पंडितों ने इसे वापस लेने की मांग की है।

 
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