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सीरिया, ऐसा शहर जहां गिरते बमों के बीच पढ़ रहे हैं युवा

Sun, 01 Apr 2018 04:16 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 01 Apr 2018 04:16 PM IST
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what syrian youths think about study and how they doing study

लंबे समय से घरेलू संघर्ष में घिरे सीरिया में विनाश और निराशा की तमाम तस्वीरें दिखती हैं। यहां जिंदा रहना ही सबसे बड़ा संघर्ष है। लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी पूर्वी गूटा के अंदरुनी इलाके में युवा पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं और अपने भविष्य के लिए योजनाएं बना रहे हैं। यहां के ज्यादातर छात्र ऐसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हैं जो ऑनलाइन डिग्री देती हैं। इन छात्रों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बिजली से लेकर इंटरनेट तक हर चीज के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

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पढ़ाई के लिए संघर्ष

पूर्वी गूटा में रहने वाले 20 साल के महमूद अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ द पीपुल से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं। ये यूनिवर्सिटी ऐसे लोगों को डिग्री देती है जो पारंपरिक तरीके से उच्च शिक्षा नहीं ले सकते। गृह युद्ध के दौरान महमूद पूर्वी गूटा के एक सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई करते थे लेकिन इसके बाद यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जारी नहीं रख पाए। बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "जब मैंने हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली तो मैं आगे कंप्यूटर साइंस पढ़ना चाहता था। लेकिन कोई भी ऐसी यूनिवर्सिटी नहीं थी जो कंप्यूटर साइंस की डिग्री देती हो।"
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महमूद कहते हैं कि अगर आपको जिंदगी में आगे बढ़ना है तो आपके पास डिग्री का होना जरूरी है। यूनिवर्सिटी ऑफ द पीपुल में कई सीरियाई छात्र पढ़ते हैं। ये यूनिवर्सिटी इंटरनेट के माध्यम से शिक्षा प्रदान करती है। संयुक्त राष्ट्र के सचिव पूर्वी गूटा को धरती पर नरक की श्रेणी में रखते हैं। बावजूद इसके यहां के 10 बच्चे ऐसे हैं जो यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं।

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बाकी है आस

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लेकिन सवाल ये है कि आखिर कोई शख्स ऐसी विपरीत परिस्थितियों में पढ़ाई कैसे कर सकता है? महमूद कहते हैं कि वाकई इन सारी चीजों का मनोवैज्ञानिक असर होता है क्योंकि ये सब हमारे चारों ओर हो रहा होता है। वो कहते हैं, ''जब बम बरसते हैं तो हम सिर्फ जिंदा रहने के बारे में सोचते हैं।'' ''फिर जैसे ही बमों की बरसात थोड़ी थमती है, भले ही वो कुछ देर के लिए क्यों न हो हम भविष्य के बारे में सोचने लग जाते हैं। हमारा दिमाग दो ओर भागता है। पहला तो ये सोचता है कि हम जिंदा रहेंगे भी या नहीं और दूसरा ये कि हमारे भविष्य का क्या होगा।'' "लेकिन अगर हम इस जगह पर भी किसी तरह पढ़ाई कर पा रहे हैं तो इससे उम्मीद तो जगती है ही।"

पर ये इतना आसान भी नहीं

लेकिन अगर आपको ये लगता है कि ये बहुत आसान है तो ऐसा नहीं है। कभी बिजली की दिक्कत तो कभी कुछ। हमें ज्यादातर समय जनरेटर के भरोसे ही रहना पड़ता है। इसके अलावा इंटरनेट भी एक बड़ी चुनौती है। माजेद भी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करते हैं। एक हवाई हमले में उनका घर तबाह हो गया। उन्हें भी इन्हीं समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। वो कहते हैं, "परीक्षा के दौरान जब बहुत से छात्र पढ़ाई करने में व्यस्त होते हैं, हमें हमलों की चिंता रहती है।" माजेद सीरिया की आने वाली पीढ़ी को लेकर डरे हुए हैं। जहां बाकी बच्चे परीक्षाओं की चिंता करते हैं वहीं यहां के लोग पीड़ितों और हमलों का आंकड़ा जोड़ते हैं।

इसके बावजूद माजेद को पूरी उम्मीद है कि वो एक न एक दिन अपनी पीएचडी पूरी कर ही लेंगे। ''हमारी जिंदगी चलती रहेगी, ये युद्ध हमें रोक नहीं सकते। एक दिन हम सभी मिलकर इस देश को दोबारा खड़ा करने में कामयाब हो जाएंगे।'' "मुझे पूरा यकीन है कि शिक्षा के माध्यम से हम एक बेहतर भविष्य ला पाएंगे।"

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