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अमेरिका में SIR जैसा कानून: वोट करने के लिए देना होगा नागरिकता का सबूत, ईरान जंग के बीच ट्रंप ला रहे SAVE एक्ट
Sat, 14 Mar 2026 10:56 AM IST
Nitin Gautam
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Nitin Gautam
Updated Sat, 14 Mar 2026 10:56 AM IST
सार
अमेरिका में इन दिनों सेव एक्ट की खूब चर्चा है और इसे लेकर घरेलू मोर्चे पर ट्रंप प्रशासन घिरा हुआ है। अमेरिका के इस सेव एक्ट की तुलना भारत में एसआईआर प्रक्रिया से हो रही है। तो आइए जानते हैं कि इसे लेकर क्या विवाद है और क्यों ट्रंप प्रशासन इसे पारित कराने पर तुला हुआ है।
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अमेरिका में एसआईआर जैसा कानून लाने की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिका की ट्रंप सरकार, ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए आलोचकों के निशाने पर है। इसके साथ ही घरेलू मोर्चे पर भी ट्रंप प्रशासन घिरा हुआ है और इसकी वजह है SAVE कानून ('सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट')। इस कानून के तहत अमेरिका में भी अब लोगों को मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने के लिए अपनी नागरिकता का सबूत देना होगा। यह भारत की एसआईआर प्रक्रिया जैसा ही है। यही वजह है कि इसकी तुलना एसआईआर से की जा रही है।
क्या है SAVE एक्ट?
राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि वे अमेरिकी चुनावी प्रक्रिया का राष्ट्रीयकरण करना चाहते हैं। अभी अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया एक संघीय प्रणाली है जिसमें संविधान प्रत्येक राज्य को अपने-अपने तरीके से चुनाव कराने की छूट देता है। हालांकि अमेरिकी संविधान में प्रावधान है कि अमेरिकी कांग्रेस चुनाव नियमों में बदलाव कर सकती है। अब राष्ट्रपति ट्रंप अपने विधायी बहुमत के दम पर चुनाव प्रक्रिया को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में बदलाव के बाद रिपब्लिकन पार्टी लंबे समय तक सत्ता में रहेगा।
मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता प्रमाण देना जरूरी होगा
प्रस्तावित कानून में मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता के प्रमाण के रूप में अपडेट ड्राइवर लाइसेंस, एक वैध अमेरिकी पासपोर्ट, या जन्म प्रमाण के साथ कोई अन्य वैध सरकारी फोटो आईडी या नागरिकता का प्रमाण दिखाना अनिवार्य होगा। अभी ईमेल के जरिए भी मतदाता पंजीकरण हो सकता है, लेकिन नए कानून के तहत लोगों को व्यक्तिगत तौर पर चुनाव अधिकारी कार्यालय जाकर पंजीकरण कराना होगा और अपने वैध दस्तावेज पेश करने होंगे। साथ ही अमेरिका के हर राज्यों को अपने मतदाताओं की सूची अमेरिकी सुरक्षा विभाग के पास जमा करनी होगी। अमेरिकी सुरक्षा विभाग अपने डेटाबेस से इस मतदाता सूची का मिलान करेगा। साफ है कि इस प्रक्रिया से अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया केंद्रीकृत होगी।
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जल्द सीनेट में पेश होगा विधेयक
'सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट' (SAVE Act) फरवरी में प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित किया गया था और अब यह जल्द सीनेट में पेश किया जाएगा। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप और उनके सहयोगियों इसे पारित करने के लिए दबाव बना रहे हैं। वर्तमान में सीनेट में रिपब्लिकन का बहुमत है, 53-47, और प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट के 213 के मुकाबले 219 सीटें हैं। हालांकि कई रिपब्लिकन सांसद भी इसके विरोध में हैं।
लाखों लोगों के मताधिकार से वंचित होने का खतरा
विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी इसके विरोध में है। डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि वे विधेयक को सीनेट में पारित नहीं होने देंगे। मतदान अधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज संगठनों का कहना है कि इस तरह का दस्तावेजीकरण लाखों लोगों को मताधिकार से वंचित कर देगा और खासकर अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि दस मतदाताओं में से एक मतदाता जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या नागरिकता प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज पेश नहीं कर सकेगा। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी जानबूझकर गैर-नागरिकों को मतदान का अधिकार दे रही है और यह अमेरिका की जनसांख्यिकीय संरचना को बदलने की एक साजिश है। वह इसे रोकने के लिए SAVE एक्ट को जरूरी बता रहे हैं।
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क्या है SAVE एक्ट?
राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि वे अमेरिकी चुनावी प्रक्रिया का राष्ट्रीयकरण करना चाहते हैं। अभी अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया एक संघीय प्रणाली है जिसमें संविधान प्रत्येक राज्य को अपने-अपने तरीके से चुनाव कराने की छूट देता है। हालांकि अमेरिकी संविधान में प्रावधान है कि अमेरिकी कांग्रेस चुनाव नियमों में बदलाव कर सकती है। अब राष्ट्रपति ट्रंप अपने विधायी बहुमत के दम पर चुनाव प्रक्रिया को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में बदलाव के बाद रिपब्लिकन पार्टी लंबे समय तक सत्ता में रहेगा।
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मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता प्रमाण देना जरूरी होगा
प्रस्तावित कानून में मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता के प्रमाण के रूप में अपडेट ड्राइवर लाइसेंस, एक वैध अमेरिकी पासपोर्ट, या जन्म प्रमाण के साथ कोई अन्य वैध सरकारी फोटो आईडी या नागरिकता का प्रमाण दिखाना अनिवार्य होगा। अभी ईमेल के जरिए भी मतदाता पंजीकरण हो सकता है, लेकिन नए कानून के तहत लोगों को व्यक्तिगत तौर पर चुनाव अधिकारी कार्यालय जाकर पंजीकरण कराना होगा और अपने वैध दस्तावेज पेश करने होंगे। साथ ही अमेरिका के हर राज्यों को अपने मतदाताओं की सूची अमेरिकी सुरक्षा विभाग के पास जमा करनी होगी। अमेरिकी सुरक्षा विभाग अपने डेटाबेस से इस मतदाता सूची का मिलान करेगा। साफ है कि इस प्रक्रिया से अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया केंद्रीकृत होगी।
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जल्द सीनेट में पेश होगा विधेयक
'सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट' (SAVE Act) फरवरी में प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित किया गया था और अब यह जल्द सीनेट में पेश किया जाएगा। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप और उनके सहयोगियों इसे पारित करने के लिए दबाव बना रहे हैं। वर्तमान में सीनेट में रिपब्लिकन का बहुमत है, 53-47, और प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट के 213 के मुकाबले 219 सीटें हैं। हालांकि कई रिपब्लिकन सांसद भी इसके विरोध में हैं।
लाखों लोगों के मताधिकार से वंचित होने का खतरा
विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी इसके विरोध में है। डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि वे विधेयक को सीनेट में पारित नहीं होने देंगे। मतदान अधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज संगठनों का कहना है कि इस तरह का दस्तावेजीकरण लाखों लोगों को मताधिकार से वंचित कर देगा और खासकर अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि दस मतदाताओं में से एक मतदाता जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या नागरिकता प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज पेश नहीं कर सकेगा। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी जानबूझकर गैर-नागरिकों को मतदान का अधिकार दे रही है और यह अमेरिका की जनसांख्यिकीय संरचना को बदलने की एक साजिश है। वह इसे रोकने के लिए SAVE एक्ट को जरूरी बता रहे हैं।
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