नया विवाद: मिनिमम डिटेरेंस क्या है, अब इसे अमेरिका और चीन आमने-सामने
जानकारों के मुताबिक, मिनिमम डिटेरेंस का मतलब सिर्फ उतने परमाणु हथियार रखना होता है, जिससे प्रतिद्वंद्वी देश को हमला करने से रोका जा सके। चीन का दावा है कि उसने अपने परमाणु हथियारों को न्यूनतम स्तर पर बनाए रखा है।
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चीन परमाणु हथियारों के अपने जखीरे को आधुनिक रूप देने में लगा हुआ है। चीनी पर्यवेक्षकों का कहना है कि ऐसा अमेरिकी हमले से बचाव के लिए किया जा रहा है। जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने चीन की परमाणु क्षमता से लैस मिसाइल बनाने की परियोजना पर गहरी चिंता जताई है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि चीन न्यूनतम परमाणु बचाव रणनीति (मिनिमम न्यूक्लीयर डिटेरेंस स्ट्रेटेजी) से अब अलग हट रहा है। उसने इस साल जनवरी से सितंबर के बीच 250 बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण किए। साथ ही उसने हथियार दागने की अपनी क्षमताओं को भी धारदार बनाया है। प्राइस ने कहा, ‘ये घटनाएं बताती हैं, जैसाकि हम पहले भी कहते रहे हैं, कि चीन दशकों पुरानी न्यूनतम बचाव रणनीति की राह से अब हट रहा है।’
जानकारों के मुताबिक, मिनिमम डिटेरेंस का मतलब सिर्फ उतने परमाणु हथियार रखना होता है, जिससे प्रतिद्वंद्वी देश को हमला करने से रोका जा सके। चीन का दावा है कि उसने अपने परमाणु हथियारों को न्यूनतम स्तर पर बनाए रखा है। चीन के एक नीतिगत दस्तावेज में कहा गया था कि चीन सिर्फ उतने ही हथियार रखेगा, जितना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। एक ताजा बयान में चीन सरकार ने कहा है कि चीन परमाणु हथियारों की होड़ में शामिल नहीं होगा। ना ही वह किसी देश पर अपनी तरफ से पहले परमाणु हथियार चलाएगा।
लेकिन चीन के रक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञों ने कहा है कि चीन को अमेरिका की आगे बढ़ रही मिसाइल रक्षा प्रणाली के मुताबिक मिनिमम डिटेरेंस का मतलब नए सिरे से तय करना पड़ रहा है। रेनमिन विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ शी यिनहोंग ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि 30 साल पहले मिनिमम डिटेरेंस का जो मतलब था, आज यह उससे अलग है। चीन को अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली के मुताबिक अपने को तैयार रखना होगा। लेकिन चीन के पास आज भी अमेरिका की तुलना में बहुत कम परमाणु हथियार हैं।
जानकारों के मुताबिक अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कई जगहों पर मिसाइल रक्षा प्रणाली लगाई है। उसने दक्षिण कोरिया में भी इसे तैनात किया है। इस बीच चीन के सुपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण करने की खबर से अमेरिका में चिंता बढ़ी है। निरस्त्रीकरण सम्मेलन में अमेरिका के राजदूत रॉबर्ड वुड ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि चीन और रूस के मिसाइल परीक्षणों से अमेरिका चिंतित है।
उन्होंने कहा कि हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी ऐसी है, जिसको लेकर हम चिंतित हैं। हमने इस टेक्नोलॉजी के सैनिक इस्तेमाल से खुद को रोके रखा है। लेकिन चीन और रूस इस तकनीक के सैनिक इस्तेमाल की दिशा में काम कर रहे हैं। हमें नहीं मालूम कि इस टेक्नोलॉजी से अपना बचाव कैसे किया जा सकता है। ना ही ये जानकारी चीन और रूस के पास है। हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के सदस्यों ने एक रिपोर्ट में कहा था कि चीन ने मिसाइल निर्माण क्षमता में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। इस बात की पूरी संभावना है कि अगले एक दशक में वह परमाणु हथियारों के अपने जखीरे को दोगुना कर लेगा।