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नए शीत युद्ध का संकेत: ओलिंपिक खेलों के बहिष्कार को लेकर धमकी और जवाबी प्रतिक्रिया
Thu, 08 Apr 2021 06:31 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 08 Apr 2021 06:31 PM IST
सार
पश्चिमी देश अगले साल चीन में होने वाले विंटर ओलिंपिक खेलों का बहिष्कार करें, इसकी मुहिम कुछ समय से चल रही थी। अब इस बारे में अमेरिका के साफ संकेत देने के बाद बॉयकॉट की संभावना को गंभीरता से लिया जाना लगा है...
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ओलंपिक मशाल रिले
- फोटो : social media
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विस्तार
चार दशक बाद एक बार फिर ओलिंपिक खेलों पर राजनीतिक कारणों से बॉयकॉट का खतरा मंडरा रहा है। पिछली बार जब ओलिंपिक खेलों का सियासी वजहों से बहिष्कार हुआ था, तब शीत युद्ध का दौर था। जानकारों का कहना है कि अब मिले रहे संकेत एक नए शीत युद्ध की शुरुआत का संकेत दे रहे हैं।
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पश्चिमी देश अगले साल चीन में होने वाले विंटर ओलिंपिक खेलों का बहिष्कार करें, इसकी मुहिम कुछ समय से चल रही थी। अब इस बारे में अमेरिका के साफ संकेत देने के बाद बॉयकॉट की संभावना को गंभीरता से लिया जाना लगा है। चीन ने बॉयकॉट की धमकी पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। उसने कहा है कि अगर ‘खेल का राजनीतिकरण’ किया गया, तो वह उसका कड़ा जवाब देगा। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- ‘खेल के राजनीतिकरण से ओलिंपिक चार्टर की भावना को नुकसान पहुंचेगा। साथ ही इससे सभी देशों के खिलाड़ियों के हितों को चोट पहुंचेगी। अमेरिकी ओलिंपिक समिति सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।’
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इसके पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा था कि ‘अगले विंटर ओलिंपिक का बहिष्कार एक ऐसा विकल्प है, जिस पर हम अपने सहयोगियों और सहभागियों के साथ अवश्य विचार करेंगे।’ बाद में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस बारे में सफाई देने की कोशिश की। एक बयान में कहा कि अभी विदेश मंत्रालय ने इस बारे में विचार नहीं किया है। कुछ अमेरिकी सांसदों ने जरूर ऐसी मांग की है। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की एक सदस्य ने इस बारे में सदन में प्रस्ताव भी पेश किया है।
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उधर कनाडा में चीन में होने वाले खेलों के बहिष्कार की मांग जोर पकड़ रही है। कनाडा पहले भी विंटर ओलिंपिक खेलों की मेजबानी कर चुका है। वहां चीन विरोधी संगठनों ने कनाडा सरकार से मांग की है कि वह अगले खेलों की मेजबानी की तैयारी शुरू करे, ताकि अगर बीजिंग से मेजबानी छिनती है, तब भी ये खेल अपने समय पर हो सकें। कनाडा में हुए एक सर्वे में आधे से ज्यादा लोगों ने राय जताई कि अगर चीन में ये खेल होते हैं, तो कनाडा को इसका बहिष्कार कर देना चाहिए।
गौरतलब है कि अगले विंटर (शीतकालीन) ओलिंपिक खेलों का आयोजन चार फरवरी 2022 से बीजिंग में होना है। ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक खेलों का आयोजन इस साल जुलाई में जापान की राजधानी टोक्यो में होगा। टोक्यो ओलिंपिक्स आयोजन पिछले साल ही होना था, लेकिन तब कोरोना महामारी के कारण इसे एक साल टाल दिया गया था।
चीन विंटर ओलिंपिक्स की मेजबानी के लिए जोर-शोर से तैयारियां कर रहा है। 2008 में बीजिंग में ओलिंपिक खेल हुए थे। इसलिए इस शहर में ऐसे आयोजन का एक मजबूत ढांचा पहले से मौजूद है। अगर अगले साल का आयोजन होता है, तो बीजिंग ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन ओलिंपिक खेलों की मेजबानी करने वाला दुनिया में पहला शहर बन जाएगा। लेकिन चीन के शिनजियांग प्रांत में मानव अधिकार के कथित हनन को लेकर बनाए गए माहौल के बीच पश्चिमी देशों इस आयोजन के बहिष्कार की मुहिम अब तेज होती जा रही है।
इसके पहले आखिरी बार ओलिंपिक खेलों का बहिष्कार 1984 में हुआ था। तब चार साल पहले का बदला लेने के लिए सोवियत संघ ने अमेरिकी शहर लॉस एजिंल्स में हुए ओलिंपिक खेलों का बहिष्कार कर दिया था। तब सोवियत संघ एक बड़ी खेल शक्ति था। 1980 में अफगानिस्तान में सोवियत सेना भेजे जाने के विरोध में अमेरिका और उसके साथी देशों ने मास्को में हुए ओलिपिंक खेलों का बहिष्कार किया था।
अब बन रहे माहौल से संकेत मिला है कि अगर पश्चिमी देशों ने बीजिंग विंटर ओलिंपिक खेलों के रंग में भंग डाला, तो चीन उसका बदला पश्चिमी देशों में होने वाले ऐसे आयोजनों का बहिष्कार करके ले सकता है। गौरतलब है कि आज चीन खेल की दुनिया में एक महाशक्ति है। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह खेल के मैदान तक सियासी मतभेद पहुंचे, तो उसका सीधा मतलब दुनिया में एक नए शीत युद्ध की शुरुआत होगी।