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मसूद अजहर मामले पर अमेरिकी शर्त, ईरान से तेल आयात बंद कराना चाहता है अमेरिका

Wed, 24 Apr 2019 10:00 AM IST
Shilpa Thakur वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 24 Apr 2019 10:00 AM IST
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We stand with you on Masood Azhar, End Iran oil imports says US to Delhi
डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो) - फोटो : Instagram

व्हाइट हाउस ने दो दिन पहले भारत सहित अन्य देशों को ईरान से तेल आयात प्रतिबंधों पर मिली छूट खत्म करने की घोषणा की। इसके बाद वाशिंगटन ने नई दिल्ली को अवगत कराते हुए कहा है कि वह पुलवामा हमले के बाद से भारत के साथ आतंक के मुकाबले के लिए खड़ा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के आतंक नेटवर्क को बाधित करने की प्रतिबद्धता पर सहयोग की अपेक्षा करता है।


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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने नई दिल्ली से ये भी कहा है कि ईरान से तेल आयात पर लगे प्रतिबंधों का चाबहार बंदरगाह के विकास पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ईरान के तेल निर्यात को प्रभावित करने के लिए सोमवार को व्हाइट हाउस ने कहा कि वह तेल प्रतिबंधों पर मिली छूट को जल्द खत्म करेगा।

ये छूट भारत के लिए 1 से 2 मई के बाद से खत्म हो जाएगी। यानी इसके बाद से भारत ईरान से तेल नहीं खरीद पाएगा और अगर खरीदता है तो उसे प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

इस मामले पर भारत और अमेरिकी अधिकारियों के बीच विचार विमर्श चल रहा है। अमेरिका का कहना है कि उसकी योजना से ईरान पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा और ये भारत के खिलाफ नहीं है। बता दें पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के खिलाफ अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लेकर आया था। जिसमें उसे वैश्विक आतंकी घोषित करने की बात कही गई है।

चीन ने वीटो के इस्तेमाल से मसूद अजहर को बचा लिया था। जिसके बाद अमेरिका ब्रिटेन और फ्रांस के सहयोग से प्रस्ताव लेकर आया। बता दें 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए। इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली है।

इसके बाद भारतीय वायु सेना द्वारा बालाकोट में जैश के ठिकाने पर हवाई हमला किया गया। जिसके बाद विदेश सचिव विजय गोखले 11 मार्च को वाशिंगटन डीसी भी गए थे। अमेरिका के इस कदम से ईरान पर खासा प्रभाव पड़ने वाला है। इससे हिजबुल्लाह के लड़ाकों को मिलने वाली मदद में कमी आएगी। जिससे वो आतंकी गतिविधियों को अंजाम नहीं दे पाएंगे।  

अमेरिका का मानना है कि तेल निर्यात से जो पैसा मिलता है, ईरान उसका इस्तेमाल हमास और हिजबुल्लाह जैसे आतंकी संगठनों को समर्थन देने में करता है। साथ ही मिसाइलों का विकास भी करता है। जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2231 की अवहेलना है। इसी माह के शुरू में अमेरिका ने ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्डन को विदेशी आतंकी संगठन भी घोषित कर दिया था।

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