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जलदोहन और सूखे से 2040 तक दुनिया की 19 प्रतिशत आबादी होगी प्रभावित
Sat, 02 Jan 2021 06:51 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला रिसर्च टीम
अमर उजाला रिसर्च टीम
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 02 Jan 2021 06:51 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पेक्सेल्स
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मनुष्य द्वारा पृथ्वी पर किया जा रहा अत्याचार आने वाले कुछ वर्षों में उसी पर भारी पड़ने वाला है। स्पेन के जियोलॉजिकल एंड माइनिंग इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी की जमीन डूबने, पृथ्वी की सतह खत्म होने या उसके कारण वर्ष 2040 तक दुनिया की आबादी का पांचवां हिस्सा यानी 19 फीसदी आबादी प्रभावित हो सकती है।
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चिंताजनक: जनसंख्या बढ़ने से मानव सभ्यता पर और बढ़ सकता है खतरा
साइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि भू-जल का दोहन होने से पृथ्वी में घटाव की स्थिति होती है। इसके अलावा सूखा, वनों की कटाई के साथ मनुष्य द्वारा पर्यावरण के खिलाफ तेजी से बढ़ रही गतिविधियां भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
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विशेषज्ञों ने चेताया है कि भविष्य में सूखा पड़ने से पृथ्वी का घटाव तेजी से बढ़ेगा। जनसंख्या बढ़ने के कारण मानव सभ्यता और खतरे में पड़ेगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि भूमि के उन क्षेत्रों में अधिक होगा जहां जनसंख्या ज्यादा होगी, भू-जल की ज्यादा जरूरत होगी या जहां पर भू-जल का संकट अधिक होगा।
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खतरे के निशान पर भारत समेत ये देश
भारत, अमेरिका, मेक्सिको और चीन दुनिया को खाद्य आपूर्ति मुहैया कराते हैं। यहां भू-जल का दोहन भी खूब होता है जिस कारण इन देशों को खतरा अधिक है। सबसे बड़ी चुनौती है यह है कि अगर यह देश भू-जल का दोहन रोकने की कोशिश करेंगे तो दुनिया के दूसरे देशों में खाद्य आपूर्ति का संकट हो जाएगा। ऐसे में जल संरक्षण जैसे विषयों पर तेजी से काम करने की जरूरत है, नहीं तो आने वाला समय मानव जीवन के लिए कष्टदायक होगा।
63.5 करोड़ लोग प्रभावित
शोधकर्ता गेराेरदो हेरेरा ग्रेसिया और उनकी टीम का कहना है कि भू-जल का स्तर कम होने के कारण दुनिया में 14 देशों में 200 अलग-अलग स्थानों पर जमीन का घटाव होगा। वैज्ञानिकों ने मॉडल के जरिए जब स्थानीय जलवायु, मौसम, बाढ़, सूखा और मानवीय क्रियाकलापों से अधिक एशिया के 63.5 करोड़ लोग प्रभावित होंगे।
दुनिया को सबक लेना होगा
वैज्ञानिकों का कहना है कि शोध के इस नतीजे से दुनिया को सबक लेना होगा। पृथ्वी ही नहीं रहेगी तो मानव जीवन तो ऐसे ही खतरे में पड़ जाएगा दुनिया के सभी देशों को भूमि का घटाव कम करने के लिए कई फैसले लेने होंगे। प्राकृतिक भू-जल का दोहन रोकना होगा। मानवीय गतिविधियों को कम करना होगा। इस तरह की नीतियां बनानी होंगी जिससे पृथ्वी की सतह को कम होने से बचाया जा सके, नहीं तो आने वाला समय नई पीढ़ी के लिए खतरनाक हो सकता है।
कुछ इस तरह डूब रही है पृथ्वी
ईरान में पिछले 50 वर्षों में जनसंख्या दोगुनी हो गई है। यहां भू-जल निकासी पर कोई कानून नहीं है। ईरान के कई शहर दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में तेजी से डूबने यानी पानी में समाने की ओर जा रहे हैं। यहां पृथ्वी हर साल 25 सेंटीमीटर समुद्र की ऊंचाई की तुलना में नीचे जा रही है। पिछले 10 वर्षों में जकार्ता 2.5 मीटर डूब चुका है। नतीजतन सरकार राजधानी को बोर्नियो द्वीप पर स्थानांतरित करने पर विचार कर रही है।