ईरान: सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं प्यासे लोग, प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़ रहे सुरक्षा बल
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय संकट में है। खास कर 2018 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की तरफ से तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों से ईरान को काफी नुकसान हुआ है...
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ईरान में पानी की कमी के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शनों का सिलसिला थम नहीं रहा है। हालांकि ईरान के सरकारी मीडिया में इस बारे विस्तार से जानकारी नहीं दी जा रही है, लेकिन पश्चिमी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक प्रदर्शन पिछले लगभग एक हफ्ते से लगातार जारी हैं। ये खबर ईरान के सरकारी मीडिया ने भी दी है कि इस दौरान हुई हिंसा में कम से कम तीन लोगों की जान चली गई है।
लेकिन ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि इन मौतों के लिए सरकारी सुरक्षा बल जिम्मेदार नहीं हैं। बल्कि शांतिपूर्ण ढंग से हो रहे एक प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति ने गोलीबारी की, जिससे तीन लोग मारे गए। ये घटना अलीगूरदर्ज नाम की जगह पर हुई। जबकि ईरान में सरकार विरोधी समूहों की समाचार एजेंसी- ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (एचआरएएनए) के हवाले से पश्चिमी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक मृतकों की संख्या कम से कम दस थी। एचआरएएनए के मुताबिक पिछले हफ्ते 31 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
पानी के मुद्दे पर प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले हफ्ते पश्चिमी प्रांत लोरस्तान से हुई। खबरों के मुताबिक ईरान में उस क्षेत्र में इस समय सूखा पड़ा हुआ है, जिसकी वजह से कई जगहों पर घरेलू इस्तेमाल, खेती, पशुपालन आदि के लिए पानी का अभाव हो गया है। इसे पिछली आधी सदी का सबसे व्यापक सूखा बताया गया है। इस दौरान बिजली की मांग भी काफी बढ़ गई है, जिस कारण लोडशेडिंग करनी पड़ रही है।
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन ने ईरान के ‘गोपनीय’ सूत्रों के हवाले से कहा है कि अलीगूरदर्ज में हुई घटना में मरने वालों की संख्या उससे काफी ज्यादा है, जितनी सरकारी मीडिया ने बताई है। इन खबरों में कहा गया है कि बड़ी संख्या में लोग जख्मी भी हुए हैँ। इस खबर में यह भी दावा किया गया है कि फायरिंग पुलिस ने ही की।
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय संकट में है। खास कर 2018 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की तरफ से तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों से ईरान को काफी नुकसान हुआ है। इसके अलावा कोरोना महामारी के कारण भी देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। देश में इस समय बेरोजगारी की दर बहुत उंची है, जबकि मुद्रास्फीति की दर 50 फीसदी से अधिक हो गई है। इसका आम जीवन पर हुए खराब असर हुआ है। इस कारण देश के अलग-अलग समूह गुजरे महीनों के दौरान सड़कों पर उतरे हैं। कुछ समय पहले औद्योगिक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। जो लोग सड़कों पर उतरे उनमें ऊर्जा सेक्टर के कर्मचारी भी थे। इसके अलावा पेंशनधारी लोग भी प्रदर्शन कर चुके हैं।
पानी के मुद्दे पर हुए प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर बहुत से ऐसे वीडियो शेयर किए गए, जिनमें सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़ते दिखाया गया। ऐसे एक वीडियो के मुताबिक सूखाग्रस्त इलाकों में हो रहे जन प्रदर्शनों के समर्थन में एक प्रदर्शन तेहरान में गृह मंत्रालय के दफ्तर के बाहर भी हुआ। तब से ईरान में जगह-जगह सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।