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वैक्सीन पेटेंटः अमेरिका के खिलाफ तीखी हुई ईयू की जुबान, बाइडन के फैसले पर उठाए सवाल

Sun, 09 May 2021 07:11 PM IST
सुरेंद्र जोशी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, पोर्तो 
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, पोर्तो  Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 09 May 2021 07:11 PM IST
सार

अमेरिका द्वारा कोरोना वैक्सीन के पेटेंट को हटाने के निर्णय से ईयू खफा है। उसका कहना है कि वैक्सीन निर्यात पर पाबंदी के चलते इसका कोई लाभ नहीं होगा। 
 

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Vaccine patent: EU against America, questions raised over Biden decision over the patent waiver
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

यूरोपियन यूनियन (ईयू) के नेताओं ने कोरोना वैक्सीन पर से पेटेंट हटाने के अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के फैसले पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं। विश्लेषकों ने कहा है कि बाइडन की इस घोषणा से शुरुआत में ईयू नेता हैरत में रह गए थे। लेकिन अब सोच-विचार के बाद वे पेटेंट हटाने के अमेरिकी इरादे के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। 

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पुर्तगाल पोर्तो शहर में यूरोपियन काउंसिल के शिखर सम्मेलन के दौरान इन नेताओं ने कहा कि बाइडन प्रशासन ने इस बारे में कोई ठोस योजना पेश नहीं की है। पेटेंट हटाने से निकट भविष्य गरीब देशों को कोरोना वैक्सीन की सप्लाई में कोई इजाफा नहीं होगा।
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पेटेंट हटाना जादू की छड़ी नहीं
खबरों के मुताबिक ईयू नेताओं ने पेटेंट के मसले पर तीन घंटों तक चर्चा की। उसके बाद यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल ने कहा- 'हमें नहीं लगता कि निकट भविष्य में पेटेंट हटाना कोई जादू की छड़ी है। अगर इस बारे में कोई ठोस प्रस्ताव सामने आता है, तो हम उस पर बातचीत के लिए तैयार हैं।' 
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अमेरिका व ब्रिटेन पहले निर्यात पाबंदी हटाएं
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपनी प्रतिक्रिया अधिक तीखे शब्दों में दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन को पहले वैक्सीन निर्यात पर लगाई गई पाबंदी को हटाना चाहिए। उन्होंने कहा-'मैं साफ कह रहा हूं। अमेरिका पहले वैक्सीन और वैक्सीन बनाने में काम आने वाली कच्ची सामग्री से निर्यात प्रतिबंध हटाए।'  उन्होंने क्योरवैक कंपनी के इस बयान का जिक्र किया कि वह यूरोप में वैक्सीन उत्पादन नहीं कर पा रही है, क्योंकि कच्ची सामग्री के निर्यात पर अमेरिका ने रोक लगा रखी है।
 

अफ्रीका के बजाय चीन को फायदा होगा : अंगेला मर्केल

खबरों के मुताबिक इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने कहा कि पेटेंट हटाने से अफ्रीका के बजाय चीन को फायदा होगा, जिसके पास एमआरएनए टेक्नोलॉजी से वैक्सीन बनाने की क्षमता है। अधिक और बेहतर वैक्सीन की सप्लाई के लिए पेटेंट हटाना उचित तरीका नहीं है। ईयू नेताओं के बीच ये आम राय देखी गई है कि बाइडन प्रशासन का ये एलान चीन और ब्रिटेन के मुकाबले अमेरिका की 'वैक्सीन कूटनीति' का हिस्सा है। यह अपनी छवि सुधारने की कोशिश है।

ईयू कर रहा बड़े पैमाने पर निर्यात
अमेरिका की घोषणा के बाद शुरुआत में ईयू नेता बचाव की मुद्रा में नजर आए, लेकिन यहां इकट्ठा होने और आपस में बातचीत के बाद उन्होंने तीखे तेवर अपना लिए हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरसुला वॉन डेर लियेन ने ध्यान दिलाया है कि ईयू कोरोना टीकाकरण में भारत, और पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया के देशों की सहायता का एलान पहले ही कर चुका है। डेर लियेन ने दावा किया कि लोकतांत्रिक दुनिया में ईयू अकेला सबसे बड़ा बाजार है, जो बड़े पैमाने पर वैक्सीन निर्यात कर रहा है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बिना ब्योरा दिए पेटेंट हटाने की मांग का समर्थन कर दिया।  

यूरोपीय नेताओं ने कई कंपनियों के अधिकारियों के बयानों का हवाला दिया है, जिनमें कहा गया है कि पेटेंट हटाने से तुरंत ज्यादा संख्या में वैक्सीन डोज का उत्पादन शुरू नहीं हो पाएगा। इन नेताओं का कहना है कि इस कदम का मतलब उन कंपनियों को दंडित करना होगा, जिन्होंने वैक्सीन को विकिसत किया है। 
 

अमेरिका ने एक डोज निर्यात नहीं किया: बेल्जियम

बेल्जियम के प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर डी क्रू ने तो बेहद सख्त लहजा अपनाया। उन्होंने कहा- यूरोप को अमेरिकी प्रवचन की जरूरत नहीं है। अमेरिका ने बीते छह महीनों में वैक्सीन के एक भी डोज का निर्यात नहीं किया है। जबकि यूरोप बीते छह महीनों से अपने लिए वैक्सीन का उत्पादन कर रहा है और दूसरे देशों को भी भेज रहा है।

यूरोप के यात्रा सर्टिफिकेट पर मतभेद
लेकिन यूरोपीय नेताओं के बीच यात्रा सर्टिफिकेट के सवाल पर मतभेद खड़े हो गए हैं। डेर लियेन ने कहा कि यूरोप में यात्रा के लिए सर्टिफिकेट जारी करने की तकनीकी प्रक्रिया चल रही है। इस सिस्टम को अगले महीने लागू कर दिया जाएगा। इसके तहत उन्हीं लोगों को पर्यटन के लिए ईयू क्षेत्र में यात्रा करने की इजाजत होगी, जिन्होंने कोरोना संक्रमण रोकने का टीका लगवा लिया है। लेकिन ईयू के साझा रुख से अलग हटते हुए क्रोएशिया और ग्रीस ने अमेरिकी पर्यटकों के लिए अपने देश को खोलने की योजना घोषित कर दी है। उधर ऑस्ट्रिया ने अपना यात्रा पास जारी करने का फैसला किया है। इन देशों के रुख से ईयू की इस मामले में साझा पहल की कोशिश खटाई में पड़ती दिख रही है।  
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