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अमेरिका ने युद्ध में पहली बार दागी प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल?: शीर्ष सैन्य अधिकारी का खुलासा, सैनिकों को सराहा

Fri, 13 Mar 2026 09:40 PM IST
Nirmal Kant वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: Nirmal Kant Updated Fri, 13 Mar 2026 09:40 PM IST
सार

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ पहली बार युद्ध में अपनी नई सटीक मार करने वाली प्रिसिजन मिसाइल का इस्तेमाल किया। इसका खुलासा अमेरिका के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने किया। पढ़िए रिपोर्ट-

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US uses 'Precision Strike Missile' against Iran for the first time: General Dan caine
जनरल डेन केन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

अमेरिका ने पहली बार युद्ध में अपनी नई 'प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल' (सटीक मार करने वाली मिसाइल) का इस्तेमाल किया है। ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान इस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। एक ब्रीफिंग में अमेरिकी सेना के शीर्ष सैन्य अधिकारी जनरल डेन केन ने अभियान की प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए यह खुलासा किया।
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उन्होंने कहा, इस अभियान के पहले 13 दिनों में हमारे तोपखाना बल ने इतिहास रच दिया। उन्होंने पहली बार युद्ध में प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल दागी, जो दुश्मन के इलाके के अंदर तक पहुंची। यह मिसाइल अमेरिकी सेना की तोपखाना इकाई ने दागी, जो ईरान के सैन्य ढांचे के खिलाफ जारी अभियान को समर्थन दे रही थी। 
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जनरल केन ने कहा कि अमेरिकी सैनिक और नौसैनिक ऐसे आधुनिक रॉकेट और मिसाइल प्रणाली चला रहे हैं, जो युद्ध क्षेत्र से काफी दूर तक निशाना साध सकती हैं। उन्होंने कहा, हमारा तोपखाना बल, जिसमें अमेरिकी सैनिक और नौसैनिक शामिल हैं, दुश्मन के जहाजों को डुबो रहा है, हथियारों के भंडार नष्ट कर रहा है और ईरान के बाहर से सामरिक सेना मिसाइल प्रणाली, प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल और उच्च गतिशीलता वाली रॉकेट प्रणाली से मिसाइलें दाग रहा है।
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केन अनुसार, सेना ने सामरिक मिसाइल प्रणाली (एटीएसीएमएस) का इस्तेमाल करके ईरान की नौसैनिक संपत्तियों को भी नष्ट किया। उन्होंने कहा, एटीएसीएमएस का उपयोग करके कई जहाजों को डुबो दिया गया, जिनमें एक पनडुब्बी भी शामिल है। 

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उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में तैनात तीसरी बटालियन, 27वीं तोपखाना रेजिमेंट के सैनिकों से बात की। इसी इकाई में वह टीम भी शामिल थी, जिसने पहली प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल दागी थी।

उन्होंने कहा कि उस टीम का एक सैनिक केवल छह महीने पहले ही सेना में भर्ती हुआ था और इकाई में आए उसे सिर्फ दो महीने हुए थे। लेकिन, वह पहले ही तैनाती पर भेज दिया गया था। सबसे छोटा सैनिक 20 साल का था, जबकि बाकी 22 और 28 साल के थे। जनरल ने कहा कि कम उम्र के बावजूद सैनिकों ने अपना मिशन शांत और पेशेवर तरीके से पूरा किया। उनकी बातों में शांति, गर्व, उद्देश्य और स्पष्टता दिख रही थी।

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