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Hindi News ›   World ›   US top diplomat Samuel d Brownback says China does not have religious basis to choose Dalai Lama

चीन के पास दलाई लामा को चुनने का धार्मिक आधार नहीं : अमेरिका

Thu, 19 Nov 2020 01:01 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Published by: देव कश्यप Updated Thu, 19 Nov 2020 01:01 AM IST
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US top diplomat Samuel d Brownback says China does not have religious basis to choose Dalai Lama
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा - फोटो : सोशल मीडिया

अमेरिका ने एक बार फिर तिब्बती धर्मगुरु को लेकर चीन पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि उसके पास अगला दलाई लामा चुनने का कोई धार्मिक आधार नहीं है। अमेरिका के शीर्ष राजनयिक सैमुअल डी. ब्राउनबैक ने यह भी कहा कि तिब्बती बौद्ध सैकड़ों सालों से अपने आध्यात्मिक नेता को सफलतापूर्वक चुनते आए हैं, ऐसे में चीन को यह चयन करने का अधिकार ही नहीं है।

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अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अमेरिका के विशेष राजदूत सैमुएल ब्राउनबैक ने अक्तूबर में भारत की अपनी यात्रा को याद करते हुए एक कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि वह भारत के धर्मशाला में तिब्बती समुदाय से बात करने और उन्हें यह बताने गए थे कि अमेरिका चीन की ओर से अगला दलाई लामा चुने जाने के खिलाफ है। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि बौद्ध धर्म के तिब्बती अनुयायी सैकड़ों वर्षों से अपना नेता सफलतापूर्वक चुनते आए हैं और उनके पास अब भी ऐसा करने का अधिकार है।
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ब्राउनबैक ने कहा कि इसमें अगले दलाई लामा भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का यह कहना सरासर गलत है कि उन्हें इसका (दलाई लामा चुनने का) अधिकार है।’ बता दें कि 85 वर्षीय 14वें दलाई लामा 1959 में तिब्बत से निर्वासित होकर भारत में रह रहे हैं।
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आतंक के विरुद्ध संघर्ष में नहीं मिलेगी मदद
अमेरिकी राजनयिक ब्राउनबैक ने चीन पर धार्मिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा, ‘इससे उन्हें आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मदद नहीं मिलेगी।’ चीन दुनिया को यह बताने की कोशिश कर रहा है कि यह आतंकवाद को रोकने की कोशिश है, लेकिन इससे वे और अधिक आतंकवादी पैदा करेंगे। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से निपटने का तरीका सभी को बंद करना नहीं है। इसके लिए उन्हें धार्मिक आजादी देना जरूरी है। ब्राउनबैक ने चीन से अपील की कि वह उइगर, बौद्ध धर्म के तिब्बती अनुयायियों, इसाइयों और फालुन गोंग समेत विभिन्न आस्थाओं पर हमला करना बंद करे।

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