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US: 850 अरब डॉलर का अमेरिकी रक्षा विधेयक मंजूर, चीन से निपटने के लिए भारत की मदद की जाएगी
Fri, 16 Dec 2022 11:51 AM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 16 Dec 2022 11:51 AM IST
सार
अमेरिकी रक्षा विधेयक में भारत के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है, ताकि रूस निर्मित सैन्य उपकरणों पर भारत की निर्भरता को कम किया जा सके। चीन से मिल रही चुनौतियों से निपटने के लिए अरबों डॉलर का प्रावधान किया गया है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन।
- फोटो : Twitter : @POTUS/Video Grab
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विस्तार
अमेरिकी सीनेट ने वर्ष 2023 के लिए 850 अरब डॉलर के भारी भरकम रक्षा विधेयक को मंजूरी दे दी। इसमें ताइवान को 10 अरब डॉलर और यूक्रेन को 80 करोड़ डॉलर की सुरक्षा सहायता का प्रावधान किया गया है।
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अमेरिकी अखबार 'द हिल' के अनुसार सीनेटरों ने गुरुवार को राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (एनडीएए) जबर्दस्त समर्थन से पारित कर दिया। इसके पक्ष में 84 वोट पड़े, जबकि विरोध में 10। हालांकि, कुछेक वोटों की गिनती बाकी थी। पारित विधेयक को राष्ट्रपति जो बाइडन के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा।
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ताइवान की सुरक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाएंगे
सीनेट ने इस विधेयक के साथ ताइवान एन्हांस्ड रेजिलिएंस एक्ट को भी पारित किया है। इसमें ताइवान की सुरक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए 10 अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता की व्यवस्था की गई है। ताइवान की तरह ही यूक्रेन की सुरक्षा के लिए भी 80 करोड़ डॉलर का प्रावधान किया गया है। बाइडन ने यूक्रेन के लिए 50 करोड़ डॉलर का प्रावधान किया था, जबकि स्वीकृत राशि उससे ज्यादा है। अमेरिकी रक्षा विधेयक में सेना के लिए COVID-19 वैक्सीन आदेश को निरस्त करने, सैन्य वेतन बढ़ाने और रूस पर प्रतिबंध जैसे कई अन्य कदम भी शामिल हैं।
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बता दें, ताइवान जहां चीन के आक्रमण के खतरे से जूझ रहा है, वहीं यूक्रेन रूस के हमले का सामना कर रहा है। इन दोनों देशों को अमेरिका लगातार सैन्य मदद पहुंचा रहा है। नए साल के रक्षा विधेयक में भी ताइवान व यूक्रेन की बड़ी सैन्य मदद का प्रावधान खतरों के खिलाफ अमेरिकी सहायता को रेखांकित कर रहा है।
दुनिया इतनी खतरनाक कभी नहीं थी : जैक रीड
सीनेट की सशस्त्र सेना सेवा समिति के अध्यक्ष जैक रीड ने महीनों के विचार विमर्श के बाद यह विधेयक पारित होने की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह इस साल का सबसे महत्वपूर्ण विधेयक है। 'द हिल' ने उन्हें यह कहते हुए भी उद्धृत किया, 'मैंने पहले भी कहा है और यह कहने वाला मैं अकेला नहीं हूं, कि दुनिया आज जितनी खतरनाक मैंने अपने जीवनकाल में पहले कभी नहीं देखी।'
चीन से चुनौती को देखते हुए भारत के साथ मजबूत रक्षा संबंधों पर जोर
अमेरिकी रक्षा विधेयक में भारत के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है, ताकि रूस निर्मित सैन्य उपकरणों पर भारत की निर्भरता को कम किया जा सके। इस विधेयक को आठ दिसंबर को प्रतिनिधि सभा ने 350-80 मतों से पारित किया था। सीनेट से मंजूरी के साथ ही अब इसके कानूनी रूप लेने का रास्ता साफ हो गया है। सीनेट इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष सीनेटर मार्क वार्नर ने भारत के साथ रक्षा सहयोग मजबूत करने के लिए विशेष जोर दिया था। विधेयक में वह साफ नजर आया।
चीन से निपटने के लिए अरबों डॉलर का प्रावधान
एनडीएए की धारा 1260 के अनुसार भारत के साथ विस्तारित रक्षा सहयोग के तहत खुफिया सूचनाओं के संग्रहण, ड्रोन आपूर्ति, चौथी और पांचवीं पीढ़ी के विमान, पांचवीं पीढ़ी के वायरलेस संचार सुविधाएं, ठंड के दिनों में कारगर रक्षा उपकरणों की आपूर्ति शामिल हैं। विधेयक में चीन से मिल रही चुनौतियों से निपटने के लिए अरबों डॉलर का प्रावधान किया गया है।