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पोल खुली: ईरानी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों को चीन ने किया नाकाम, तेल निर्यात पर बोला झूठ
Tue, 09 Mar 2021 02:38 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 09 Mar 2021 02:38 PM IST
सार
रिफिनिटिव ऑयल रिसर्च के ताजा आंकड़ों से अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद चीन ने ईरान के तेल की परोक्ष माध्यमों से खरीदारी की। चीन ने इसे आधिकारिक रूप से दूसरे खाड़ी देशों से मंगवाया गया तेल बताया...
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Iran oil field
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के तेल निर्यात पर रोक लगाने की अमेरिकी कोशिश कामयाब नहीं हुई हैं। इसकी वजह चीन का रिकॉर्ड मात्रा में ईरान से तेल खरीदना है। ईरान के तेल निर्यात पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में नए सिरे से रोक लगा दी थी। इस रोक के लिए जारी आदेश के मुताबिक ईरान के चीन, भारत, जापान, और दक्षिण कोरिया को तेल भेजने पर प्रतिबंध लगाया गया था। इस कारण कई देशों ने ईरान से तेल लेना बिल्कुल या आंशिक रूप से बंद कर दिया। लेकिन चीन ने इस पर रोक नहीं लगाई।
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रिफिनिटिव ऑयल रिसर्च नाम की एक एजेंसी के ताजा आंकड़ों से अमेरिकी प्रतिबंध के पूरी तरह कामयाब ना होने की जानकारी मिली है। उसके मुताबिक प्रतिबंध लगने के बाद चीन ने ईरान के तेल की परोक्ष माध्यमों से खरीदारी की। चीन ने इसे आधिकारिक रूप से दूसरे खाड़ी देशों से मंगवाया गया तेल बताया। लेकिन यह तेल असल में ईरान से आया था। इन आंकड़ों के मुताबिक बीते 14 महीनों में ईरान से निर्यात किया गया एक करोड़ 78 लाख टन कच्चा तेल चीनी बंदरगाहों तक पहुंचा। बीते जनवरी और फरवरी में ईरान से चीन का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
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अब मिली जानकारी के मुताबिक ईरान से जो कच्चा तेल चीन पहुंचा, उसका 75 फीसदी हिस्सा ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और मलेशिया के जरिए आया। बाकी 25 फीसदी सीधे ईरान से आया। चीन के बंदरगाहों पर सीधे आए तेल को ईरानी कार्गो के रूप में चिह्नित किया गया। रिफिनिटिव एजेंसी के कच्चे तेल के कारोबार से संबंधित विशेषज्ञ एमा ली ने एक समाचार एजेंसी से कहा- ‘2020 की आखिरी तिमाही में ईरान से चीन जाने वाले तेल की मात्रा में बढ़ोतरी होने लगी। सबसे ज्यादा चेल शानदोंग प्रांत पहुंचा। इसका मतलब है कि निजी संयंत्र ईरानी तेल के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं।’
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कुछ जानकारों का कहना है कि ईरान ने तेल निर्यात करने के लिए गुप्त तरीके अपनाए। टैंकरों में तेल की भराई के दौरान ट्रांसपोंडर बंद कर दिए गए, ताकि सैटेलाइट के जरिए इस काम का संकेत ना मिल सके। ये टैंकर तभी नजर आए, जब वे ओमान, यूएई या इराक पहुंच गए। तेल के बदले ज्यादातर भुगतान चीनी मुद्रा युवान या यूरो में किया गया, ताकि लेन- देने की भनक अमेरिका को ना लग सके।
ये खबर आने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया से कहा- ईरान चीन का दोस्त देश है। दोनों देशों ने सामान्य लेन-देन और सहयोग बनाए रखा है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चीन और ईरान के बीच सहयोग तर्कपूर्ण और वैध है। इस सहयोग का सम्मान और इसका संरक्षण किया जाना चाहिए।
फिलहाल, इस बारे में कयास लगाए जा रहे हैं कि बाइडन प्रशासन संभवतया ईरान पर लगे प्रतिबंधों को उठा लेगा। खबर है कि इसके मद्देनजर कई दूसरे देश भी ईरान से तेल की खरीदारी के लिए बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं। ईरान की नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी ने कई एशियाई देशों से इस सिलसिले में बातचीत शुरू की है। जानकारों के मुताबिक फिलहाल संभावित मांग की मात्रा के बारे में आंकलन किया जा रहा है। ईरानी सूत्रों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही ईरान से तेल का सामान्य निर्यात चालू हो जाएगा।