बाइडन क्यों कूद पड़े हैं कोरोना वायरस की उत्पत्ति के विवाद में, क्या ट्रंप से कर रहे हैं होड़?
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में एक बड़ा तबका पहले से ही ये राय बना चुका है कि कोरोना महामारी फैलाने के लिए चीन जिम्मेदार है। इसके लिए ये मांग भी वहां उठती रही है कि चीन को हर्जाना भरने को कहा जाए...
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चीन को घेरने की अपनी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अब जोरशोर से कोरोना वायरस की उत्पत्ति का मसला उछाल दिया है। इस मामले में अब वे पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होड़ करते नजर आ रहे हैं। बाइडन बुधवार को इस बारे में दिए अपने बयान में ‘अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति के दो स्रोत संभव हैं। पहला यह कि इसका किसी जीवित जीव से चीन के शहर वुहान के बाजार के गीले माहौल में मनुष्य में संक्रमण हुआ हो। दूसरा, वायरस को वुहान की प्रयोगशाला में तैयार किया गया और वहीं गलती से उसका संक्रमण इंसान में हो गया।
दुनिया के ज्यादातर विशेषज्ञ इसमें पहले सिद्धांत को मानते हैं। लेकिन जो बाइडन ने कहा कि अमेरिका के खुफिया समुदाय का झुकाव अब दूसरी संभावना की तरफ होने लगा है। बाइडन के इस बयान के पहले अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें दावा किया गया था कि 2019 में महामारी फैलने से ठीक पहले चीन के कई वायरस विशेषज्ञ एक अज्ञात बीमारी का इलाज कराने के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे। उसके बाद टीवी चैनल सीएनएन ने एक रिपोर्ट दिखाई, जिसमें कहा गया कि ट्रंप प्रशासन ने ये साबित करने के लिए जांच शुरू कराई थी कि कोविड-19 वायरस चीन की प्रयोगशाला से संक्रमित हुआ। सीएनएन ने कहा कि बाइडन ने सत्ता में आने के बाद वो जांच बंद करवा दी।
इन दोनों रिपोर्टों से दक्षिणपंथी खेमों और रिपब्लिकन पार्टी को बाइडन प्रशासन पर कड़ा हमला बोलने का मौका मिला। हालांकि वॉल स्ट्रीट जर्नल की ताजा रिपोर्ट से भी कोई सबूत सामने नहीं आया, लेकिन ट्रंप प्रशासन से जुड़े रहे अधिकारियों और रिपब्लिकन पार्टी ने इन दोनों रिपोर्टों को अपनी जीत के रूप में पेश किया। विश्लेषकों ने कहा है कि पूर्व ट्रंप प्रशासन की टीम ने इन रिपोर्टों का इस्तेमाल कोरोना महामारी को संभालने में अपनी नाकामी पर परदा डालने के लिए किया है।
लेकिन अब तक घरेलू दबावों के मुताबिक अपनी विदेश नीति तय कर रहे जो बाइडन कोरोना वायरस के स्रोत से जुड़े मुद्दे पर भी दबाव में आ गए हैं। उनके ताजा बयान को उसी का नतीजा समझा जा रहा है। बाइडन ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को 90 दिन के भीतर इस मामले में रिपोर्ट पेश करने को कहा है कि क्या कोविड-19 वायरस चीन की प्रयोगशाला से संक्रमित हुआ। लेकिन कुछ जानकारों ने सवाल उठाया है कि जो विषय वायरस और जीव विज्ञान विशेषज्ञों के दायरे में आता है, उस बारे में खुफिया एजेंसियां कैसे को कोई निश्चित निष्कर्ष बता सकती हैं?
जानकारों ने इस तरफ भी ध्यान खींचा है कि इस मामले में खुफिया जांच कराने का मतलब विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके विशेषज्ञों पर एक तरह से शक जताना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम पहले से ही इस मसले की जांच में जुटी हुई है। सवाल यह भी उठा है कि क्या अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इतनी पारदर्शिता के साथ जांच कर पाएंगी, जिससे उनके निष्कर्ष पर शक की गुंजाइश ना रहे?
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में एक बड़ा तबका पहले से ही ये राय बना चुका है कि कोरोना महामारी फैलाने के लिए चीन जिम्मेदार है। इसके लिए ये मांग भी वहां उठती रही है कि चीन को हर्जाना भरने को कहा जाए। अब बाइडन प्रशासन के भी इस होड़ में कूद पड़ने से चीन के साथ पहले से अमेरिकी खेमे के देशों के चल रहा टकराव और तीखा हो जाएगा। खुद सीएनएन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस मामले में पक्का जवाब ढूंढ पाना कठिन है। लेकिन फिलहाल इस विवाद को तूल देकर जो बाइडन ने देश के अंदर हो रही आलोचना से अपने बचाव का कवच तैयार करने की कोशिश की है।