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अमेरिका: जो बाइडन शायद ही पूरी कर पाएं अपनी 'ग्रीन' महत्वाकांक्षा, पीडब्ल्यूसी की ताजा रिपोर्ट में कई खुलासे

Tue, 03 Aug 2021 02:03 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 03 Aug 2021 02:03 PM IST
सार

मार्केट का अध्ययन करने वाली एजेंसी प्राइस वॉटरहाउस कूपर (पीडब्ल्यूसी) ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा कि तेल और गैस उद्योग अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण उद्योगों में एक है। रोजगार, श्रमिकों की आय और अर्थव्यवस्था के सकल मूल्य के लिहाज से यह प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों रूपों से अहम है...

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US President Joe Biden has expressed his intention to reduce country dependence on crude oil and natural gas
जो बाइडन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने देश की कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता घटाने का इरादा जताया है। इसके लिए उन्होंने अक्षय ऊर्जा के स्रोतों के विकास पर अरबों डॉलर खर्च करने की घोषणा की है। लेकिन वे सचमुच ऐसा कर पाएंगे, इसको लेकर लगातार संदेह जताए जा रहे हैं। अमेरिका में तेल और गैस उद्योग में एक करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है। ये पूरा उद्योग 1.6 ट्रिलियन डॉलर का है।

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मार्केट का अध्ययन करने वाली एजेंसी प्राइस वॉटर हाउस कूपर (पीडब्ल्यूसी) ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा कि तेल और गैस उद्योग अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण उद्योगों में एक है। रोजगार, श्रमिकों की आय और अर्थव्यवस्था के सकल मूल्य के लिहाज से यह प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों रूपों से अहम है। पीडब्ल्यूसी ने ये रिपोर्ट अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के लिए तैयार की है। इंस्टीट्यूट तेल और गैस उद्योग के धन से चलने वाली संस्था है।
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पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2019 में इस उद्योग में अमेरिका में एक करोड़ 13 लाख लोग सीधे या परोक्ष रूप से काम कर रहे थे। उनकी आमदनी इसी उद्योग पर निर्भर है। तनख्वाह, भत्तों, और अन्य लाभों के जरिए उन्हें इस उद्योग से 2019 में 892.7 अरब डॉलर की आमदनी हुई। इस उद्योग ने अमेरिका की सकल घरेलू आय (जीडीपी) में जो मूल्य जोड़ा, वह 1.688 ट्रिलियन का था। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना महामारी के कारण इस उद्योग को नुकसान हुआ है, लेकिन ये उद्योग मरा नहीं है। महामारी कम होने के बाद से तेल और गैस के उत्पादन में बढ़ोतरी हो रही है।

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लेकिन अमेरिकी सरकार की ग्रीन ऊर्जा को अपनाने की योजना के तहत तेल और गैस उद्योग की भूमिका घटाने का इरादा जताया गया है। इसके लिए पवन चक्कियां लगाने और सोलर फार्म के निर्माण की योजना पेश की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कुओं को खोदने, उनकी निगरानी और रखरखाव के दौरान कार्बन का काफी उत्सर्जन होता है। जबकि सोलर फार्म और पवन चक्कियों के निर्माण में ऐसा नहीं होता। साथ ही उनका रखरखाव भी आसान और कम खर्चीला होता है।

लेकिन पीडब्ल्यूसी ने कहा है कि इसका मतलब है कि तेल और गैस उद्योग के लिए अधिक लोगों की जरूरत होती है, जिससे ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ एक वर्ष (2019) में इस क्षेत्र में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का पूंजी निर्माण हुआ। यह देश की सकल अर्थव्यवस्था का 7.9 फीसदी हिस्सा था।

अक्षय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की समर्थक एजेंसी इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (इरना) ने 2016 में अपनी एक रिपोर्ट में माना था कि अक्षय ऊर्जा को अपनाने के क्रम में कम संख्या में रोजगार पैदा होंगे। उसने कहा था कि साल 2030 तक इस क्षेत्र में दुनियाभर में दो करोड़ 44 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। उसने कहा था कि 2016 की तुलना में अगर 2030 तक सभी देशों ने अक्षय ऊर्जा का हिस्सा दो गुना किया, तो उससे वैश्विक जीडीपी में 1.3 ट्रिलियन डॉलर का मूल्य जुड़ेगा। गौरतलब है कि सिर्फ अमेरिकी जीडीपी में इसका हिस्सा 1.6 ट्रिलियन डॉलर का है।

अपनी एक नई रिपोर्ट में इरना ने पिछले साल कहा था कि जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए जरूरी है कि दुनिया अक्षय ऊर्जा को अपनाए। अगर सभी देश ऊक्षय ऊर्जा को अपनाने के गंभीर कदम उठाएं, तो उससे दस करोड़ नई नौकरियां पैदा होंगी। लेकिन जानकारों का कहना है कि उस हाल में भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था नुकसान में रहेगी। ऐसे में जो बाइडन की ग्रीन एनर्जी अपनाने की महत्वाकांक्षा पूरी होगी, इसमें शक है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि बड़े आर्थिक स्वार्थ राष्ट्रपति की योजना के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं। पीडब्ल्यूसी की ताजा रिपोर्ट उसकी दिशा में माहौल बनाने की एक कोशिश है।

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