{"_id":"5c2b8b4abdec2256d743d1ef","slug":"us-president-donald-trump-signed-a-bill-related-to-the-indo-pacific-region","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े विधेयक पर ट्रंप की मुहर, मजबूत होंगे भारत-अमेरिका संबंध","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े विधेयक पर ट्रंप की मुहर, मजबूत होंगे भारत-अमेरिका संबंध
Tue, 01 Jan 2019 09:16 PM IST
आसिम खान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: आसिम खान
Updated Tue, 01 Jan 2019 09:16 PM IST
विज्ञापन
भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत बनाने वाले एक विधेयक पर राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी मुहर लगा दी है। इसके साथ ही दोनों देशों के संबंधों में और गहराई आने का रास्ता साफ हो गया है। ट्रंप ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के साथ बहुमुखी संबंधों को मजबूत करने और इलाके में अपनी धाक बनाने के लिए एक विधेयक पर दस्तखत किए। साथ ही उन्होंने चीन की गतिविधियों को नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय प्रणाली को ‘कमजोर’ करने वाला बताया। माना जा रहा है कि ट्रंप के इस कदम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को अपनी पकड़ मजबूत करने में काफी मदद मिलेगी।
विज्ञापन
भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया गया। इसके तहत अधिनियम की धारा-204 दोनों देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक तथा सुरक्षा संबंधों को मजबूत और व्यापक बनाती है। ट्रंप ने अमेरिका की ताकत और सुरक्षा को बनाए रखने के संबंध में अमेरिकी ससद का मकसद साझा किया। हालांकि उन्होंने बाहरी, सैन्य और विदेशी मामलों में अमेरिकी नीति को निर्धारित करने या वैश्विक सहयोगियों के साथ कुछ कूटनीतिक पहल करने के लिए कार्यकारी शाखा की जरूरत संबंधी सिफारिशों को मानने की गारंटी नहीं दी।
विज्ञापन
अधिनियम 2005 के ‘यूएस-इंडिया डिफेंस रिलेशनशिप’, ‘डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड ट्रेड इनिशिएटिव’ (2012) की नई रूपरेखा, हिंद-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए 2015 के संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण और साझेदारी के माध्यम से समृद्धि वर्ष 2017 के संयुक्त वक्तव्य की प्रतिबद्धता को दोहराती है।
विज्ञापन
चीन पर शिकंजा कसने को अलग से बजट
विधेयक में राष्ट्रपति को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे एक कूटनीतिक रणनीति के तहत संयुक्त समुद्री सैन्य अभ्यास और पूर्वी व दक्षिण चीन सागर में नौवहन की आजादी के लिए सहयोगी देशों के साथ काम करें। अमेरिकी संसद ‘कांग्रेस’ ने पिछले माह ही इससे संबंधित विधेयक पारित कर दिया था। इसके तहत दुनिया भर में चीन का सामरिक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय प्रणाली को दरकिनार करने की कथित कोशिशों को कम करने के लिए 1.5 अरब डॉलर की रकम का प्रावधान किया गया है। अमेरिका के इस नए कानून के बाद अब सबकी निगाहें चीन की प्रतिक्रिया पर हैं।