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अमेरिका ने बढ़ाई ड्रैगन की टेंशन, डॉलर सिस्टम से चीन को कर सकता है बाहर

Fri, 24 Jul 2020 09:59 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: देव कश्यप Updated Fri, 24 Jul 2020 09:59 AM IST
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US new policy to counter China America can exit China with dollar system
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग - फोटो : फाइल फोटो

अमेरिका में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में दूरियां भी बढ़ने लगी है। कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने कहा था कि जैसे-जैसे देश में संक्रमण के मामले बढ़ेंगे मेरा गुस्सा चीन के प्रति बढ़ता जाएगा। अब ट्रंप सरकार चीन को एक बड़ा झटका देने की तैयारी में है।

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अब अमेरिका चीन को यूएस डॉलर सिस्टम (SWIFT) से बाहर निकालने या उसके एक्सेस में कटौती करने की योजना बना रहा है।। चीनी अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक अमेरिका के इस संभावित कदम को लेकर बीजिंग तनाव में है।

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सोसायटी फॉर वर्ल्ड वाइड इंटरबैंक फाइनैंशल टेलिकॉम्युनिकेशन (SWIFT) एक नेटवर्क है जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के बैंक वित्तीय लेनदेन की जानकारी देने और प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह उन इन्फ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा है जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश में अमेरिकी डॉलर की भूमिका अहम है। 

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वैश्विक रूप से बैंकों के अमेरिकी बैंकों से संवाद संबंध हैं, जिसके जरिए वे अमेरिकी डॉलर ट्रांसजेक्शन करते हैं। इस पेमेंट सिस्टम के जरिए वॉइट हाउस अमेरिकी बैंकों को किसी व्यक्ति, संस्था या देशों से लेनदेन रोकने का आदेश दे सकता है। शिनजियांग और हांगकांग को लेकर दुनियाभर में घिर चुके चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) इन दिनों तनाव में है। 

हालांकि, सीसीपी के कुछ समर्थकों का कहना है कि अमेरिका चीन के खिलाफ उस तरह के कठोर कदम नहीं उठाएगा, जैसे उसने ईरान और नॉर्थ कोरिया के खिलाफ उठाए, क्योंकि इससे अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ जाएगा। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि चीन का डर वास्तविक है, क्योंकि यदि संबंध इसी तरह बिगड़ते रहे तो अमेरिका बीजिंग पर हमले के लिए डॉलर आधिपत्य का इस्तेमाल कर सकता है। 

गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका ने चीन के उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार और हांगकांग की स्वतंत्रता पर प्रहार करने की वजह से चीनी अधिकारियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने हुआवेई सहित कुछ टेक्नॉलजी कंपनियों के कुछ अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। उन्होंने चीन को आड़े हाथों लेते हुए उससे मुकाबले के लिए समान विचारधारा वाले देशों और संयुक्त राष्ट्र, नाटो जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को एक साथ एक मंच पर आने का आह्वान भी किया है। 

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