अमेरिका के नौसेना अड्डे पर गोलीबारी में चार की मौत, हमलावर संदिग्ध के सऊदी छात्र होने का दावा
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पेंसाकोला में नौसेना के वायु स्टेशन पर विभिन्न देशों के सैन्य प्रतिनिधि मौजूद थे। शुक्रवार सुबह को उस विद्यार्थी ने क्लासरूम बिल्डिंग में गोलीबारी कर दी। इस हमले में हमलावर समेत चार लोगों की मौत हो गई और कई घायल भी हो गए। इस हफ्ते अमेरिका के नौसैन्य अड्डे पर गोलीबारी की यह दूसरी घटना है।
समाचार एजेंसी एएनआई की खबर के अनुसार राज्य के गवर्नर ने भी दावा किया है कि यह शूटर सऊदी अरब की वायु सेना से जुड़ा था। एजेंसी ने यह खबर न्यूज एजेंसी एएफपी के हवाले से दी है। इससे पहले एसकैम्बिया काउंटी के अधिकारी डेविड मोर्गन ने बताया था कि हमले के दौरान दो अधिकारियों समेत 11 लोगों को गोली लगी थी। इनमें से एक अधिकारी ने हमलावर को मार गिराया था।
नौसैन्य अड्डे के कमांडिंग अधिकारी कैप्टन टिमोथी किनसेला जूनियर ने कहा था कि अगले आदेश तक अड्डे को बंद कर दिया गया है और उसके भीतर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम जारी है। नौसेना अड्डे में 16 हजार से अधिक सैन्यकर्मी और 7,400 आम नागरिक काम करते हैं।
गोलीबारी में बाल-बाल बचे भारतीय वायुसेना प्रमुख
अमेरिकी नौसेना और वायु सेना के संयुक्त बेस पर्ल हार्बर हिकम में गुरुवार सुबह हुई गोलीबारी के दौरान भारतीय वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया बाल-बाल बचे थे। इस घटना के समय भारतीय वायुसेना प्रमुख अपनी टीम के साथ इस बेस पर मौजूद थे।
घटना के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई। भारतीय वायु सेना ने कहा कि एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया सुरक्षित हैं। वायुसेना प्रमुख भदौरिया हिंद प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर बातचीत के लिए विभिन्न वायुसेना बलों के प्रमुखों के सम्मेलन में भाग लेने गए थे।
इस बारे में भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता ने कहा कि वायुसेना प्रमुख और उनका दल सुरक्षित है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि वायुसेना प्रमुख पर्ल हार्बर में अमेरिकी वायुसेना अड्डे पर ठहरे थे और गोलीबारी नौसैन्य अड्डे पर हुई। अधिकारी ने बताया कि ये दोनों जगह एक दूसरे के निकट नहीं हैं।
क्यों प्रसिद्ध है पर्ल हार्बर
जापानी नौसेना ने आठ दिसंबर 1949 को अमेरिका के नौसैनिक बेस पर्ल हार्बर पर अचानक हमला कर दिया था। इसके चलते अमेरिका भी दूसरे विश्व युद्ध में शामिल हो गया था। यह गोलीबारी पर्ल हार्बर में अमेरिका के नेवल बेस पर जापानी हमले की 78वीं वर्षगांठ से तीन दिन पहले हुआ था, जिसे राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने एक बदनामी की तारीख कहा था।