US Midterm Elections 2022: अमेरिका में 8 नवंबर को वोटिंग, महंगाई ले डूबेगी जो बाइडन की पार्टी को
US Midterm Elections 2022: अमेरिका में राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच की अवधि में होने वाले चुनावों को मिडटर्म्स कहा जाता है। इस दौरान हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के सभी सदस्यों और सीनेट के एक तिहाई सदस्यों के अलावा कई राज्यों में गवर्नर और विधायिका का चुनाव होता है...
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अमेरिका में अगले आठ नवंबर को मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान होगा। उसके पहले मिल रहे तमाम संकेतों से सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी की चिंता बढ़ती जा रही है। लगभग सभी जनमत सर्वेक्षणों में आम राय है कि इन चुनावों के दौरान कांग्रेस के निचली सदन- हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी अपना बहुमत गंवा देगी। अब ज्यादातर सर्वेक्षणों का अनुमान है कि ऊपरी सदन सीनेट में भी रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत बन सकता है। राज्यों के चुनाव में भी डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।
अमेरिका में राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच की अवधि में होने वाले चुनावों को मिडटर्म्स कहा जाता है। इस दौरान हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के सभी सदस्यों और सीनेट के एक तिहाई सदस्यों के अलावा कई राज्यों में गवर्नर और विधायिका का चुनाव होता है। राष्ट्रपति बाइडन ने खुद को इन दिनों चुनाव प्रचार में झोंक रखा है। पिछले कुछ दिनों में उन्होंने कई चुनाव सभाएं कीं, जिनमें उन्होंने मतदाताओं से डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करने की अपील की।
बाइडन ने कहा है- ‘अभी भी बहुत से परिवारों की जिंदगी कठिन बनी हुई है। लेकिन ऐसे चमकते स्थल भी हैं, जहां अमेरिका के लोगों के लिए बेहतर संभावनाएं बन रही हैं।’ बाइडन ने प्रचार अभियान के दौरान दावा किया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था बेहतर हाल में है और देश में बेरोजगारी दर काफी कम है। इसके अलावा धनी वर्गों और कंपनियों पर लगाए गए अधिक टैक्स को भी उन्होंने अपने प्रचार का मुद्दा बनाया है।
लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि महंगाई की ऊंची दर राष्ट्रपति के दावों पर पानी फेर रही है। सितंबर में महंगाई दर 8.2 फीसदी थी। इससे लोगों में गहरी नाराजगी है। तमाम जनमत सर्वेक्षणों का औसत पेश करने वाली वेबसाइट रियरक्लीयरपॉलिटिक्स.कॉम के मुताबिक अमेरिका के 57.9 फीसदी लोग अर्थव्यवस्था संभालने के बाइडन के रिकॉर्ड से नाखुश हैं। सिर्फ 38.9 फीसदी लोगों ने राष्ट्रपति के रिकॉर्ड पर अपनी मुहर लगाई है।
मार्केट रेटिंग एजेंसी मूडीज के अर्थशास्त्री मार्क जेन्डी ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘मेरी राय में बाइडन की नीतियां मोटे तौर पर अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी हैं। इसका श्रेय उन्हें दिया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। लोगों को पेट्रोल पंप, किराना स्टोर आदि जैसी जगहों और किराये पर ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। महंगाई उन्हें तेजाब की तरह महसूस हो रही है। इसके बीच वे राष्ट्रपति के प्रयासों को देख नहीं पा रहे हैं।’
प्रगतिशील थिंक टैंक रूजवेल्ट फॉरवर्ड की अध्यक्ष फेलिसिया वॉन्ग ने कहा- ‘सप्लाई चेन की दिक्कतों और जटिल अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों के बीच खुशहाली लाना कठिन है। मतदाताओं को ये बात समझाना उससे भी कठिन चुनौती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनेता इन बातों को समझाने की कोशिश भी नहीं करते हैं।’
अमेरिकी पत्रिका अमेरिकन प्रोस्पेक्ट में डेमोक्रेटिक पार्टी की समर्थक माने जाने वाले आर्थिक विशेषज्ञों पैट्रिक गेसपार्ड, स्टैन ग्रीनबर्ग, सेलिन्डा लेक और माइक लक्स ने एक विश्लेषण में कहा है- ‘डेमोक्रेटिक पार्टी को यह समझना होगा कि हमारे पास अर्थव्यवस्था पर ऐसा संदेश तो है, जिससे चुनाव जीता जा सकता है, लेकिन महंगाई के कारण हम हार जाएंगे। इस समय महंगाई लोगों की नंबर एक चिंता है और इस पर ही वे हरदम बात करते सुने जा रहे हैं।’