अमेरिकी सांसदों ने कहा, संप्रभु मुद्राओं व सरकारों को खतरे में डाल सकती है ‘लिब्रा’
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अमेरिकी सांसदों ने सीनेट की सुनवाई के दूसरे दिन फेसबुक से कहा कि कंपनी के ग्लोबल फाइनेंस की दुनिया में क्रिप्टोकरेंसी ‘लिब्रा’ उतारने से कई खतरे पैदा हो सकते हैं। यह योजना न सिर्फ संप्रभु मुद्राओं को खतरे में डाल सकती है बल्कि सरकारों को भी अस्थिर कर सकती है। सदन की वित्तीय सेवा समिति ने कहा कि नया कारोबार मॉडल लांच करने से पहले कंपनी को अपने घर की सफाई करनी चाहिए।
सीनेट की सुनवाई के दौरान फेसबुक कार्यकारी अधिकारी डेविड मार्कस ने लिब्रा करेंसी योजना को लेकर करीब चार घंटे तक सांसदों के सवालों का सामना किया। फेसबुक ने जब जून में लिब्रा की घोषणा करते वक्त कहा था कि वह एक नई वैश्विक वित्तीय प्रणाली बनाना चाहता है, ताकि मेसेंजर और व्हाट्सएप के दो अरब से अधिक यूजरों के हाथों में डिजिटल वॉलेट डाल सके। लेकिन इस कोशिश में अमेरिका के धुर विरोधी सियासी दल डेमोक्रेट और रिपब्लिकन जरूर एकजुट हो गए हैं। इस दौरान डेमोक्रेट सीनेटर शेरोड ब्राउन और रिपब्लिकन सीनेटर मार्था मेकसेली ने यह तक कह डाला कि उन्हें फेसबुक पर भरोसा ही नहीं है।
सीनेटर ब्राउन ने कहा, एक के बाद एक स्कैंडल में लिप्त फेसबुक के हाथ एक बच्चे की तरह माचिस लग गई है जिससे वह हर बार घर में आग लगाता है और हर बार कहता है कि हम सीख रहे हैं। रिपब्लिकन सीनेटर जोए नेगुसे से कहा कि छह में से चार बड़ी यूनिटों का स्वामित्व किसी एक कंपनी पर हो तो एकाधिकार पैदा होता है जो औद्योगिक माहौल के लिए सेहतमंद नहीं होता।
सीनेटरों की चिंता दूर करने की कोशिश
सीनेट में सुनवाई के दौरान फेसबुक कार्यकारी डेविड मार्कस ने सीनेटरों की चिंताएं दूर कर भरोसा जुटाने की भरसक कोशिश की, लेकिन सांसदों ने कंपनी के प्रति भरोसे की कमी दर्शाई। रिपब्लिकन पार्टी की सीनेटर मार्था मेकसेली ने कहा कि फेसबुक एक के बाद एक कई स्कैंडलों में लिप्त रही है इसलिए मैं इस पर भरोसा कर ही नहीं सकती हूं। उन्होंने कहा कि कंपनी को अपने अंदर कई सुधार करने होंगे।