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युद्ध पर दो खेमों में बंटी दुनिया: बड़गाम से बर्लिन तक, कहीं खामेनेई के पक्ष तो कहीं विरोध में सड़क पर लोग

Sun, 01 Mar 2026 05:49 AM IST
Shubham Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Shubham Kumar Updated Sun, 01 Mar 2026 05:49 AM IST
सार

पश्चिम एशिया में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और इस्राइली पीएम नेतन्याहू के हमलों ने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। ईरान पर मिसाइल और नौसेना हमलों के बाद कई देशों ने समर्थन या आलोचना की। यूएई और सऊदी अरब ने ईरान के हमलों की निंदा की, जबकि वैश्विक प्रदर्शन और कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं ने पूरी दुनिया को दो ध्रुवों में बांट दिया है।

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US Iran Israel tension world is divided over the horrific war from Budgam to Berlin News In Hindi
अमेरिका-इस्राइल बनाम ईरान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम एशिया में भड़की भीषण जंग ने पूरी दुनिया को दो स्पष्ट कूटनीतिक ध्रुवों में विभाजित कर दिया है। शनिवार सुबह जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के मिसाइल उद्योग व उसकी नौसेना को नेस्तनाबूद करने के लिए  बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की, तो वैश्विक राजनीति की लकीरें और गहरी हो गईं। ईरान में हुए मिसाइल हमलों के बाद वाशिंगटन ने इसे ईरानी शासन से खतरों को खत्म करने का मिशन बताया है। इस्त्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इसे अस्तित्व की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे ईरानी जनता को अपना भाग्य खुद चुनने का अवसर मिलेगा। संघर्ष शुरू होने के बाद भारत के कश्मीर से लेकर जर्मनी व ब्रिटेन तक कहीं इसके विरोध तो कहीं पक्ष में प्रदर्शन हुए हैं। 

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ईरान के हमले की कई इस्लामी देशों ने भी आलोचना की है और अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमले का समर्थन किया है। यूक्रेन, कतर, यूएई, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब आदि देशों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। यूएई ने ईरान के हमले को कायराना हरकत करार देते हुए जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही है, जबकि सऊदी अरब ने इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। यूक्रेन ने भी इस तनाव के लिए सीधे तौर पर ईरान के आंतरिक दमन और हालिया महीनों में प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा को जिम्मेदार ठहराया है।
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शांति की अपील वाले देश
यूरोपीय संघ, जर्मनी, फ्रांस व ब्रिटेन ने ईरान से अंधाधुंध सैन्य कार्रवाई रोकने व वार्ता दोबारा शुरू करने की अपील की। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर ने संयुक्त बयान में कहा, हम पश्चिम एशियाई देशों पर ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। बेल्जियम ने कहा, ईरानी जनता अपनी सरकार के फैसलों की कीमत न चुकाए।

रूस-चीन ईरान के पक्ष में
कई ताकतवर देश ईरान के समर्थन में भी उतरे हैं। इनमें रूस, चीन, ओमान, तुर्किये व नॉर्वे शामिल हैं। रूस ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वाशिंगटन ने ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता का इस्तेमाल केवल अपने सैन्य हमलों को छिपाने के लिए किया। रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा, शांतिदूत (ट्रंप) ने एक बार फिर अपना चेहरा दिखाया है। चीन ने भी सैन्य कार्रवाई तत्काल रोकने व ईरान की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की मांग की है।

ब्राजील की सरकार ने ईरान में हमलों की कड़ी निंदा की और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि ये हमले ऐसे समय में हुए, जब बातचीत की प्रक्रिया चल रही थी, जिसे शांति का एकमात्र व्यवहारिक रास्ता बताया गया। ब्राजील ने स्पष्ट किया कि विवादों के समाधान के लिए संवाद ही वैध और टिकाऊ माध्यम है।


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ईरान आतंक का प्रमुख स्रोत : कार्नी
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पश्चिम एशिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और आतंक का मुख्य स्रोत है। उसे किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने या विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। मुंबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्नी ने कहा, ईरान का मानवाधिकार रिकॉर्ड दुनिया में सबसे खराब रिकॉर्डों में से एक है।

कार्नी ने कहा, कनाडा और उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदार लगातार ईरानी शासन से उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की अपील करते रहे हैं। उन्होंने कन्नानास्किस में हुए जी7 शिखर सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंधों की पुनः बहाली का भी उल्लेख किया। कार्नी ने मुंबई में नवाचार प्रदर्शनी में हिस्सा लिया और विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं से मुलाकात की। कार्नी ने शनिवार को मुंबई में भारत-कनाडा टैलेंट एंड इनोवेशन स्ट्रैटेजी की शुरुआत की।

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