फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   US Donald Trump Nobel Peace Prize Palestine Venezuela Norway Committee Opinion Article by S Prasannarajan Open

Opinion: जो युद्ध ट्रंप नहीं जीत सकते

Mon, 10 Nov 2025 08:14 AM IST
SPrasannarajan प्रसन्नराजन एस प्रसन्नराजन
Updated Mon, 10 Nov 2025 08:14 AM IST
सार

डोनाल्ड ट्रंप भले आपको जल्दी में दिखते हों, पर क्या उनका यह कहना अतार्किक है कि जब उनके पूर्ववर्ती को नोबेल मिल सकता है, तो उन्हें क्यों नहीं? ट्रंप के तौर-तरीके निर्विवाद नहीं हैं, लेकिन वह जो कर रहे हैं, आने वाली पीढ़ियां उनकी ऋणी होंगी। वह सबकुछ जीत सकते हैं, पर विरोधियों का दिल नहीं।

विज्ञापन
US Donald Trump Nobel Peace Prize Palestine Venezuela Norway Committee Opinion Article by S Prasannarajan Open
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

अब जबकि सड़कें शांत हो गई हैं, 'नदी से समुद्र तक फलस्तीन स्वतंत्र होगा' का नारा थम गया है, और लंदन से पेरिस तक प्रतिस्पर्धी राजनेता को फलस्तीनी राज्य के लिए खड़े होने के साथ अपने घरेलू नेतृत्व को मजबूत करने का मौका नहीं दिया गया है; युद्ध के मैदान से उभरने वाली तस्वीरें शून्य में ताकते भूख से तड़पते बच्चों की नहीं, बल्कि मुक्त हुए इस्त्राइली बंधक की है, जो घर लौट रहा है; और यह कि पश्चिम एशिया में शांति वास्तव में गाजा के खंडहरों से शुरू हो सकती है; मुझे इस तरह के लेख पढ़ना अच्छा लगता, भले ही कुछ संपादकीय पृष्ठों में इसे कम उत्साहवर्धक दिखाने के लिए चेतावनियां दी गई हों, या उदारवादियों के खेमे में इसी तरह की बातें सुनी जा रही हों।
विज्ञापन


डोनाल्ड ट्रंप चार वर्षों की सीमित अवधि में अधिक से अधिक सौदे करने की जल्दी में हैं, मानो उनकी प्रसिद्ध व्यावसायिक ताकत भू-राजनीति की पारंपरिक बाधाओं को पार कर सकती है और अपनी 'भयानक' कल्पना के आधार पर वह इतिहास को नया रूप दे सकते हैं।
विज्ञापन

और उन्हें उम्मीद थी कि नॉर्वे की नोबेल समिति दुश्मनों को शांति वार्ता की मेज पर लाने और गुप्त परमाणु हथियार रखने वालों को निरस्त्र करने में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं करेगी। कश्मीर के पहलगाम में हुए नरसंहार के बाद पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई बंद करने का श्रेय लेने पर भारत ने उन्हें वास्तव में झिड़क दिया था, लेकिन उसके बावजूद वह भारतीय प्रधानमंत्री को अपना अच्छा मित्र कहने से नहीं चूके। उन्हें इस बात से चिढ़ हुई होगी कि नई दिल्ली की सराहना से नोबेल के लिए उनके अभियान को बल मिलेगा।

और फिर नोबेल समिति ने इसे गाजा समझौते की पूर्व संध्या पर वेनेजुएला में ट्रंप-समर्थक योद्धा को दे दिया, जो छिपकर मादुरो तानाशाही के खिलाफ लड़ रही थी, और जिसने पुरस्कार जीतने पर ट्रंप से कथित तौर पर यह कहकर 'अच्छा काम' किया कि 'मैं इसे आपके सम्मान में इसे स्वीकार कर रही हूं, क्योंकि आप वास्तव में इसके हकदार थे।'

यह उनके रिसते हुए अहंकार पर मिर्ची छिड़कने जैसा थाः शुक्रिया, मुझे याद दिलाने के लिए कि मुझे लगातार वह नहीं मिल रहा, जिसका मैं हकदार हूं, और क्या मुझे एक ऐसी दुनिया चलाने के लिए अभिशप्त किया गया है, जिसने कुछ समय पहले ही मेरे एक पूर्ववर्ती को जॉर्ज डब्ल्यू बुश न होने के बावजूद पुरस्कार जीतते देखा था।

बहरहाल शिकायती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अगले बारह महीनों तक अपने जख्म सहलाने दीजिए, जब तक फिर से नॉर्वे की नोबेल समिति का फैसला न आ जाए। वैसे भी, अभी यूक्रेन बचा हुआ है। लेकिन हम उन्हें इसलिए खारिज नहीं कर सकते, क्योंकि वह उस दुनिया से संबंधित नहीं हैं, जिसे महानता के मोह से ग्रस्त लोगों ने हमसे छीन लिया है।

इस व्यक्ति की शैली को, उसकी उपलब्धि के सार को स्वीकार करने में हमें अपनी दृष्टि को धुंधला नहीं करना चाहिए, चाहे उस ताकतवर व्यक्ति को कितना भी दबाव क्यों न बनाना पड़ा हो। उनकी 20 सूत्री योजना, जिसकी देखरेख स्वयं शांतिदूत की अध्यक्षता वाले बोर्ड द्वारा की जाएगी, ने पहले ही काम करना शुरू कर दिया है, बंधक घर लौट रहे हैं और इस्त्राइली सैनिक वापस जा रहे हैं। योजना के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में हमास को गाजा के राजनीतिक और प्रशासनिक भविष्य से बाहर रखना और एक नवीनीकृत फलस्तीनी प्राधिकरण को सत्ता में वापस लाना शामिल है, जो उतना ही बदनाम है, जितना कि हमास बर्बर है।
विज्ञापन

फिलहाल, जनजातीय रक्तपिपासा के स्थान पर खंडहरों से पुनर्निर्माण के लिए तकनीकी तंत्र को अपनाना, विवादित इतिहास और मृत्यु के पंथ में डूबे इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी छलांग है। पुनर्स्थापना की सफलता शांति के अंतिम चरण का निर्धारण करेगी, जहां फलस्तीन के विचार को इस्लामवाद और राष्ट्रवाद के बीच चयन करना होगा, और जहां यहूदी राज्य को यह विश्वास दिलाना होगा कि उसके अस्तित्व का अधिकार उसके पड़ोसियों द्वारा प्रदत्त है। गाजा में युद्ध का अंत एक मजबूरी भरा विराम नहीं है, बल्कि एक नए पश्चिम की प्रस्तावना है, यह एक साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए, जिसमें याह्या सिनवार के भूत को पूरी तरह से शामिल न किया जाए।

हम सभी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऋणी हैं, और हममें से कुछ लोगों के लिए इसे स्वीकार करना बहुत कष्टदायक है। यह ऋण उस राष्ट्रपति के प्रति है, जिसने अपने उग्र व्यक्तित्व के बावजूद, शास्त्रीय अमेरिकीवाद को, नैतिक हस्तक्षेप की विल्सनवादी भावना को पुनस्र्थापित किया है, जिसे नवरूढ़िवादियों ने इराक में बिगाड़ दिया था।

अगर हम यह सोचते हैं कि पश्चिमी दुनिया के आंदोलनकारी इस्राइल को हरा सकते हैं, कि सात अक्तूबर 2023 का नरसंहार अवश्यंभावी है, कि सजा अपराध से कहीं अधिक है, तो क्या हम अपनी उदार अंतरात्मा को हमास के नेतृत्व वाले फलस्तीनी संघर्ष के पीड़ित को खोजने के नैतिक रूप से संतोषजनक खेल में बदलने की अनुमति नहीं दे रहे थे? क्या हम गाजा में युद्ध की समाप्ति के लिए मार्च कर रहे थे? या फिर इस्राइल को सजा देने के लिए एक प्रतीकात्मक सात अक्तूबर को कूटनीतिक वैधता दे रहे थे?

अंततः, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पश्चिम एशिया में संघर्ष विराम कराने में सफलता मिली, जिसके सहयोगी भिन्न-भिन्न नैतिकतावादी थे, जबकि यहूदी-विरोधी भावना ने अपनी सारी बाधाएं त्याग दी थीं। शांति शक्ति का प्रदर्शन है, और यहीं पर ट्रंप ने एक बार फिर बिना किसी सांस्कृतिक दिखावे के 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' की भावना के अनुरूप काम किया है। क्या हम अब भी चाहते हैं कि शांति बोर्ड का अध्यक्ष ओबामा हो, ताकि हम जश्न मना सकें? सभी को यह समझ लेना चाहिए कि डोनाल्ड ट्रंप केवल शांति को जीत सकते हैं, उदारवादियों का दिल नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed