महाशक्ति को चुनौती: चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल कितना बड़ा खतरा, इस मुद्दे पर अमेरिका में मतभेद
विशेषज्ञों के मुताबिक हाइपरसोनिक मिसाइलें हालांकि ध्वनि से पांच गुना अधिक गति से चलती हैं, लेकिन ब्लैस्टिक मिसाइलों की रफ्तार उनसे तेज होती है। लेकिन इन मिसाइलों के साथ खास बात यह है कि इन्हें कम ऊंचाई पर रखते हुए दागा जा सकता है। साथ ही बीच में ही उनकी रफ्तार और उनके लक्ष्य में परिवर्तन किया जा सकता है...
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अमेरिका के कई रक्षा विश्लेषक अब निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि पिछले दिनों चीन ने जिस हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया था, वह अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब यहां यह अनुमान भी लगाया गया है कि संभव है कि चीन ने ऐसी एक से ज्यादा मिसाइलों का परीक्षण किया हो। जबकि चीन का कहना है कि उसने एक साधारण परीक्षण किया, जिससे चौंकने की कोई बात नहीं है।
लेकिन अमेरिका के रक्षा विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि चीन ने अपनी मिसाइल और अंतरिक्ष क्षमता बढ़ाने के लिए हाल के वर्षों में बहुत बड़ा निवेश किया है। साथ ही वह अपनी परंपरागत सेना और साइबर युद्ध की क्षमता भी बढ़ा रहा है। पिछले हफ्ते अमेरिकी सेना के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मार्ग मिले ने चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल की चर्चा करते हुए ‘स्पुतनिक क्षण’ को याद किया था। स्पुतनिक अंतरिक्ष में भेजा गया पहला अंतरिक्ष यान था। इसे तत्कालीन सोवियत संघ ने भेजा था। उसकी खबर से अमेरिका सकते में रह गया था।
घबराने की जरूरत नहीं
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के खुफिया अधिकारियों ने सीनेट की एक समिति को बताया है कि हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण चीन में हुई एक ठोस उन्नति का संकेत देता है। इस क्षमता के साथ चीन अमेरिका पर अपनी तरफ से हमला करने की स्थिति में पहुंच गया है। यानी अब हालत ऐसी नहीं रही कि अगर पहले अमेरिका ने हमला किया, तभी चीन जवाब देगा।
सीएनएन के मुताबिक अमेरिका के कुछ दूसरे विशेषज्ञ खुफिया आधिकारियों के इस आकलन से सहमत नहीं हैँ। उनके मुताबिक चीन ने जिस टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया है, ऐसा नहीं है कि वह सिर्फ उसके पास हो। यह अमेरिका, रूस और कुछ दूसरे देशों के पास दशकों से मौजूद है। इन विशेषज्ञों के मुताबिक रूस भी कई प्रकार की हाइरपसोनिक मिसाइलों को बनाने में जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी इस टेक्नोलॉजी में कोई देश इतना आगे नहीं है कि वह दूसरे को अस्थिर कर सके।
मिसाइल रक्षा प्रणाली को दे सकती हैं मात
विशेषज्ञों के मुताबिक हाइपरसोनिक मिसाइलें हालांकि ध्वनि से पांच गुना अधिक गति से चलती हैं, लेकिन ब्लैस्टिक मिसाइलों की रफ्तार उनसे तेज होती है। लेकिन इन मिसाइलों के साथ खास बात यह है कि इन्हें कम ऊंचाई पर रखते हुए दागा जा सकता है। साथ ही बीच में ही उनकी रफ्तार और उनके लक्ष्य में परिवर्तन किया जा सकता है। इसकी वजह से मिसाइल रक्षा प्रणाली से उन्हें रोक पाना अधिक कठिन हो जाता है।
कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि हाइपरसोनिक मिसाइल का युग अभी सैद्धांतिक रूप में ही आया है। यह वास्तविक नहीं है। इन मिसाइलों को बनाने के लिए अभी इंजीनियरिंग का पूरा विकास नहीं हुआ है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के पूर्व उपाध्यक्ष इवान ओएलरिच ने सीएनएन से कहा- ‘हाइपरसोनिक मिसाइलों से देशों को नई सैन्य क्षमताएं हासिल होंगी, लेकिन उनसे युद्ध में कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं आएगा।’
इस बीच कुछ टीकाकारों ने कहा है कि अमेरिका में कुछ हलकों से जानबूझ कर हाइपरसोनिक मिसाइलों के खतरे को बढ़ा-चढ़ा कर बताया जा रहा है, ताकि सरकार को रक्षा बजट बढ़ाने के लिए मजबूर किया जा सके। टीकाकार फरीद जकरिया ने अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट में लिखा है- ‘एक विशाल और तकनीक-सक्षम दुश्मन को लेकर काल्पनिक या वास्तविक भय का माहौल बनाना नए बजट मंजूर कराने का एक आजमाया तरीका है।’