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US: 'प्रशांत क्षेत्र में चीन को हरा सकता है यूएस, मगर तकनीकी बढ़त तेजी से हो रही कम', अमेरिकी कमांडर ने चेताया

Wed, 11 Dec 2024 08:03 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 11 Dec 2024 08:03 AM IST
सार

सैमुअल पापारो शनिवार को रीगन डिफेंस फोरम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका को चीन पर अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। 

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US Commander Said US can defeat China in Pacific, but technical advantage is shrinking
अमेरिकी कमांडर एडमिरल सैमुअल पापारो - फोटो : एएनआई

विस्तार

अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांडर एडमिरल सैमुअल पापारो ने प्रशांत क्षेत्र में चीन को हराने की अमेरिकी सेना की क्षमता पर भरोसा जताया। हालांकि, चेतावनी भी दी कि चीन पर अमेरिका की तकनीकी बढ़त तेजी से कम हो रही है।

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चीन पर अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने की आवश्यकता
बता दें, सैमुअल पापारो शनिवार को रीगन डिफेंस फोरम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका को चीन पर अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुधार के लिए दो प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। पहला मिसाइल प्रौद्योगिकी को बढ़ाना और दूसरा एक सुरक्षित संचार नेटवर्क विकसित करना जो साइबर हमलों का सामना कर सके।
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प्रक्षेपण की लागत 10 लाख डॉलर से अधिक
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका अपनी उन्नत क्रूज मिसाइल प्रणाली से लंबी दूरी और मुश्किल लक्ष्यों को निशाना बनाने में समझ है। मदर, प्रत्येक प्रक्षेपण की लागत 10 लाख डॉलर से अधिक है। इसके उलट ड्रोन, जो निर्माण और विकास के लिए अपेक्षाकृत सस्ते हैं, को कंप्यूटर के माध्यम से अग्रिम मोर्चे पर लड़ने के लिए दूर से नियंत्रित किया जा सकता है।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पापारो ने कहा कि रूस और उत्तर कोरिया इस बात पर सहमत हो गए हैं कि मॉस्को यूक्रेन के खिलाफ जंग में मदद के लिए व्योंगयांग द्वारा सेना भेजने के बदले में चौथी पीढ़ी के मिकोयान मिग -29 और सुखोई एसयू -27 लड़ाकू जेट उपलब्ध कराएगा। 

पापारो ने कहा कि प्योंगयांग ने मॉस्को के बजाय उत्तर कोरियाई सैनिकों को यूक्रेन भेजने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने आगे कहा कि शर्त इसलिए रखी गई थी ताकि प्योंगयांग मॉस्को से बैलिस्टिक मिसाइल पुन: प्रवेश तकनीक और पनडुब्बी से संबंधित तकनीक भी प्राप्त कर सके।

हाल ही में एक और बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण
कमांडर के अनुसार, उत्तर कोरिया ने 31 अक्तूबर को एक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया, जो 7,000 किमी की ऊंचाई तक पहुंच गई। उन्होंने कहा, 'भले ही प्योंगयांग अमेरिका तक पहुंचने के लिए पर्याप्त रेंज वाली लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण जारी रखे हुए है। अमेरिका को अभी तक इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियार रखने वाले पुनः प्रवेश वाहनों के निर्माण के कठिन कार्य में महारत हासिल कर ली है, और जो अंतरिक्ष से सात किमी प्रति सेकंड की गति से लौटते समय वायुमंडलीय प्रतिरोध और ताप का सामना कर सकते हैं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि परीक्षण क्यों जारी है।'


उन्होंने आगे कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने सैन्य नेताओं को 2027 तक ताइवान पर कब्जा करने के लिए तैयार रहने का काम दिया था, भले ही अमेरिकी सैन्य भागीदारी हो, लेकिन यह उस वर्ष या किसी विशेष वर्ष पर हमला करने के निर्णय को नहीं दर्शाता है।

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