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Pakistan: संसद और न्यायपालिका में ऊपर कौन, अब पाकिस्तान में भी उठी ये बहस

Thu, 27 Apr 2023 02:27 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 27 Apr 2023 02:27 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने ईद के त्योहार तक सुनवाई टालते हुए सरकार को निर्देश दिया था, वह 27 अप्रैल तक चुनाव की तारीख के मामले में विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के साथ बातचीत कर सहमति बना ले...

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Upset over the interference of the judiciary, Pakistan ruling coalition said, parliament is superior
पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

न्यायपालिका के हस्तक्षेप से खफा पाकिस्तान के सत्ताधारी गठबंधन ने अब यह दलील पेश की है कि पाकिस्तान की संवैधानिक व्यवस्था में सर्वोच्चता संसद की है। इसलिए संसद के लिए फैसलों को दी गई चुनौती पर कोर्ट चर्चा नहीं कर सकता। सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ मोर्चा नेशनल असेंबली के स्पीकर रजा परवेज अशरफ ने संभाला है। उन्होंने कहा है कि वे इस बारे में चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल को एक पत्र लिखेंगे। चिट्ठी के जरिए उन्हें सांसदों की भावना से अवगत कराया जाएगा। इसके पहले नेशनल असेंबली में इस सवाल पर चर्चा हुई, जिसमें पीडीएम के सदस्यों ने संसद के सर्वोच्च होने की दलील दी।

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नेशनल असेंबली से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि संसद के अधिकार की अनदेखी कोई व्यक्ति या संस्था नहीं कर सकती। कानून बनाना संसद का काम है, जिसे उसको करने दिया जाना चाहिए। ये घटनाक्रम पंजाब और खैबर पख्तूनवा प्रांतों में प्रांतीय असेंबलियों के चुनाव की तारीख को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच चल रहे टकराव के बीच सामने आया है। विश्लेषकों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में इस मसले की अगली सुनवाई से एक दिन पहले बुधवार को नेशनल असेंबली में यह प्रस्ताव पारित करवा कर पीडीएम ने कोर्ट पर दबाव बनाने की कोशिश की है।

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सुप्रीम कोर्ट ने ईद के त्योहार तक सुनवाई टालते हुए सरकार को निर्देश दिया था, वह 27 अप्रैल तक चुनाव की तारीख के मामले में विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के साथ बातचीत कर सहमति बना ले। लेकिन बुधवार को नेशनल असेंबली में सत्ताधारी गठबंधन के सदस्यों ने न्यायपालिका के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए। उन्होंने विपक्ष के साथ बातचीत के चीफ जस्टिस के निर्देश को सिरे से ठुकरा देने की मांग की।

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सत्ताधारी गठबंधन में शामिल एक प्रमुख दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता और विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने सुप्रीम कोर्ट के स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एबीपी) को दिए निर्देश को ‘सदमा पहुंचाने वाला’ बताया। कोर्ट ने एसबीपी को निर्देश दिया था कि पंजाब और खैबर पख्तूनवा में चुनाव कराने के लिए जरूरी धन वह निर्वाचन आयोग को मुहैया कराए। भुट्टो ने कहा- ‘कुछ लोगों की जिद के कारण संसद का अपमान किया जा रहा है। अगर न्यायपालिका को संविधान के बारे में कोई गलतफहमी है, तो उसे समझाने के लिए पीपीपी और संसदीय समितियां मौजूद हैं।’

वित्त मंत्री इशहाक डार ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने दो प्रांतीय असेंबलियों को देश में ‘अराजकता फैलाने के लिए’ भंग कराया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने धन के लिए अनुरोध पत्र वित्त मंत्रालय के पास भेजा था। लेकिन मंत्रालय बिना प्रक्रियाओं का पालन किए धन जारी नहीं कर सकता।

विश्लेषकों के मुताबिक बुधवार को संसद में जिस लहजे में बातें कही गईं, उससे साफ है कि पीडीएम चुनाव की तारीफ के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना करने के लिए तैयार है। इससे देश में संवैधानिक संकट और गहराने का अंदेशा है। इससे देश में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

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