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भारत के पड़ोसी मुल्कों में दखलंदाजी कर अपना दबदबा बढ़ा रहा है चीन

Fri, 31 Jul 2020 06:08 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 31 Jul 2020 06:08 PM IST
सार

  • अमेरिकी सुरक्षा परिषद ने लगाए आरोप, नेपाल, श्रीलंका, भूटान पर चीन की नजर
  • आर्थिक ताकत का धौंस दिखाने के साथ ही इन देशों के अंदरूनी मामलों में भी दखलंदाजी

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united states security council said, China is increasing its dominance by interfering in India's neighboring countries
PLA china Army - फोटो : File Photo

विस्तार

चीन किस तरह भारत के पड़ोसी देशों को अपने इशारे पर नचाने की कोशिश कर रहा है और कैसे नेपाल, श्रीलंका, भूटान जैसे देशों में दखलंदाजी कर रहा है, इसका खुलासा अब कई मंचों से होने लगा है। खासकर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इसे एक गंभीर मामला बताया है।

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इस बारे में परिषद की दक्षिण और मध्य एशिया की वरिष्ठ निदेशक लीजा कर्टिस ने सवाल उठाए हैं और कहा है कि चीन इन देशों को न सिर्फ अपनी आर्थिक धौंस दिखा रहा है, बल्कि उनके अंदरूनी मामलों में भी दखल देने की कोशिश कर रहा है।
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ब्रूकिंग इंस्टीट्यूशंस के एक वेबिनार में लीजा समेत तमाम वक्ताओं ने इस पूरे क्षेत्र में चीन की बढ़ती दखलंदाजी और अपना प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिशों पर गंभीर चर्चा की और माना कि चीन की कोशिश खासकर भारत से लगे पड़ोसी देशों में अपनी दखल बढ़ाना और उन्हें अपने तरीके से नियंत्रित करना है। लेकिन चीन ये भूल जाता है कि हर देश की अपनी संप्रभुता है और कोई इससे समझौता नहीं कर सकता।
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लीजा कर्टिस ने चीनी मीडिया में चलाए गए उस अभियान का भी हवाला दिया कि कैसे चीन ने माउंट एवरेस्ट को अपना हिस्सा बताया। जबकि दुनिया जानती है कि हिमालय की चोटियां और खासकर माउंट एवरेस्ट नेपाल की संप्रभुता से जुड़ा है और उसकी शान है। इसी तरह इसी महीने चीन ने भूटान के भी एक हिस्से को अपना बताया था।

जाहिर है चीन की साम्राज्यवादी और विस्तारवादी नीतियों का ही नतीजा है कि उसकी नजर पड़ोसी मुल्कों पर है और भारत में भी जिस तरह वह पूर्वी लद्दाख और एलएसी पर अपनी हरकतें कर रहा है, उससे साफ है कि उसकी नीयत साफ नहीं है।

वेबिनार में वक्ताओं ने नेपाल और श्रीलंका में चीन के दबदबे का भी सवाल उठाया और कहा कि चीन इन दोनों देशों को अपनी आर्थिक ताकत दिखाकर और मदद के नाम पर उन्हें अपने पक्ष में खड़ा करने की कोशिश करने के साथ ही वहां की अंदरूनी सियासत में भी दखलंदाजी कर रहा है। इस संदर्भ में नेपाल में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के आंतरिक विवादों के बीच चीन के दखल के मामले को भी गंभीरता से देखा जा रहा है।


गौरतलब है कि पिछले दिनों सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर सत्ता को लेकर पार्टी के सह अध्यक्ष प्रचंड और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बीच के विवाद में भी चीन बीच में आया था और नेपाल में चीन के राजदूत ने गुपचुप नेपाल की राष्ट्रपति बिद्यादेवी भंडारी के साथ ही पार्टी के तमाम नेताओं से अलग अलग मुलाकातें की थीं।

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