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United States: मुद्रास्फीति भले गिरी हो, लेकिन उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत नहीं

Tue, 16 May 2023 01:47 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 16 May 2023 01:47 PM IST
सार

अमेरिका में फिलहाल मुद्रास्फीति दर पांच फीसदी के नीचे चली आई है। जबकि साल भर पहले यह नौ फीसदी तक पहुंच गई थी। जानकारों के मुताबिक ऊर्जा की कीमत में गिरावट और सप्लाई चेन संबंधी दिक्कतों से राहत मिलने की वजह से मुद्रास्फीति दर में यह गिरावट देखी गई है...

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United States: Inflation may have fallen, but consumers are not relieved from inflation
Federal Reserve Bank - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिका में मुद्रास्फीति दर में गिरावट के बावजूद महंगाई का रुझान बना हुआ है। ऐसा दशकों में पहली बार हुआ है। बाजार पर्यवेक्षकों के मुताबिक कोरोना महामारी और यूक्रेन युद्ध के कारण उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में जो इजाफा हुआ, उसे घटने के कोई संकेत नहीं हैं। इससे आम अर्थव्यवस्था पर महंगाई के कारण जो नकरात्मक असर होता है, वह बना हुआ है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक अमेरिका में दिख रहे इस ट्रेंड का विश्व अर्थव्यवस्था पर भी असर महसूस किया जाएगा।

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अमेरिका में फिलहाल मुद्रास्फीति दर पांच फीसदी के नीचे चली आई है। जबकि साल भर पहले यह नौ फीसदी तक पहुंच गई थी। जानकारों के मुताबिक ऊर्जा की कीमत में गिरावट और सप्लाई चेन संबंधी दिक्कतों से राहत मिलने की वजह से मुद्रास्फीति दर में यह गिरावट देखी गई है। अमेरिकी प्रशासन की आर्थिक परामर्श परिषद के पूर्व सदस्य जेसॉन फरमैन ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- मुद्रास्फीति दर चार से पांच फीसदी के बीच आ गई है, लेकिन इसे 3 से 4 फीसदी तक के दायरे में सीमित किए जा सकने की संभावना अभी भी नहीं दिखती। दो फीसदी तक लाना तो दूर है, जिसे फेडरल रिजर्व (अमेरिका का सेंट्रल बैंक) ने अपना लक्ष्य घोषित कर रखा है।

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जो बाइडन प्रशासन के पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दलीप सिंह ने कहा है- ‘अब ऐसे ढांचागत पहलू अस्तित्व में आ गए हैं, जो मुद्रास्फीति को ऊंचे स्तर पर बनाए रखेंगे।’

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लॉबिस्ट ब्रुश मेहलमैन ने हाल में अपने एक प्रेजेंटेशन में ऐसे ढांचागत पहलुओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब चीन एक मध्यम आय वाला देश बन गया है, जिस कारण वहां मजदूरी महंगी हो गई है। इस कारण वहां आने वाली उपभोक्ता सामग्रियां महंगी मिल रही हैं। इसके अलावा दशकों तक टेक्नोलॉजी के विकास का असर कीमतें घटने के रूप में आता था। लेकिन नियमों में सख्ती और डाटा स्थानीयकरण की बढ़ी प्रवृत्ति के कारण वह लाभ खत्म हो गया है। फिर व्यापार में ग्लोबलाइजेशन और आउटसोर्सिंग से जो लाभ अमेरिकी उपभोक्ताओं को मिला था, वह स्थिति भी अब बदल रही है। अब अमेरिकी कंपनियों से अमेरिका में ही उत्पादन करने को कहा जा रहा है, जिससे उत्पादित चीजें महंगी होती जा रही हैं।

सैन फ्रांसिस्को राज्य में फेडरल रिजर्व की शाखा की प्रमुख मेरी डेली ने कुछ समय पहले एक भाषण में कहा था कि अमेरिका में चीजें सस्ती मिलने के पीछे प्रमुख कारण ग्लोबलाइजेशन था। अब ग्लोबलाइजेशन की प्रक्रिया धीमी हो गई है। उसका असर मुद्रास्फीति की ऊची दर के रूप में सामने आ रहा है। कुछ अन्य विशेषज्ञों ने कहा है कि ग्रीन ऊर्जा का चलन बढ़ाने के प्रयासों के कारण ऊर्जा के दाम बढ़ रहे हैं।

न्यूयॉर्क के फेडरल रिजप्व प्रमुख जॉन विलियम्स ने पिछले हफ्ते एक चर्चा में कहा- ‘हमारा कर्त्तव्य है कि मुद्रास्फीति दर निम्न स्तर पर और स्थिर रहे। ऐसा ग्लोबलाइजेशन की दिशा पलटने के दौर में भी किया जा सकता है। इसीलिए ब्याज दरें बढ़ाई गई हैं, ताकि मुद्रास्फीति दर घटाई जा सके।’ लेकिन विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि मुद्रास्फीति दर गिरने का मतलब असल में महंगाई घटना नहीं होता है और इसका अहसास फिलहाल अमेरिकी उपभोक्ताओं को हो रहा है।

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