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UN: बाल टीकाकरण कवरेज की रफ्तार में 2023 में आया ठहराव, WHO-UNICEF की चौंकाने वाली रिपोर्ट

Tue, 16 Jul 2024 12:15 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 16 Jul 2024 12:15 PM IST
सार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने 14 बीमारियों के विरुद्ध टीकाकरण के रुझानों पर अपने नए विश्लेषण में यह निष्कर्ष साझा किया है, जिसके मद्देनजर यूएन एजेंसियों ने हालात में बेहतरी के लिए तत्काल टीकाकरण प्रयासों में तेज़ी लाने पर बल दिया है।

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United Nations Child Vaccination Coverage speed stagnates WHO UNICEF Analysis news and updates
डब्ल्यूचओ और यूनिसेफ की रिपोर्ट। - फोटो : UN

विस्तार

विश्व भर में बच्चों की प्रतिरक्षण कवरेज वर्ष 2023 में अवरुद्ध हो गई है, जिसके कारण बड़ी संख्या में बच्चे जीवनरक्षा कवच के दायरे से बाहर हो गए हैं। यूएन एजेंसियों के एक नए विश्लेषण के अनुसार, कोविड-19 महामारी से पहले 2019 की तुलना में 27 लाख अतिरिक्त बच्चों का या तो टीकाकरण नहीं हो पाया या फिर उनकी वैक्सीन खुराकें पूरी नहीं हो पाई है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने 14 बीमारियों के विरुद्ध टीकाकरण के रुझानों पर अपने नए विश्लेषण में यह निष्कर्ष साझा किया है, जिसके मद्देनजर यूएन एजेंसियों ने हालात में बेहतरी के लिए तत्काल टीकाकरण प्रयासों में तेज़ी लाने पर बल दिया है।
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यूनीसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने कहा, “नवीनमत रुझान दर्शाते हैं कि अनेक देशों में अब भी बहुत से बच्चे छूटते जा रहे हैं।” उन्होंने बताया कि प्रतिरक्षण खाई को पाटने के लिए एक वैश्विक प्रयास की आवश्यकता होगी, जिसमें सरकारों, साझीदारों और स्थानीय नेताओं को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल व सामुदायिक कर्मचारियों में निवेश करना होगा। हर बच्चे को टीकाकरण के दायरे में लाने और स्वास्थ्य देखभाल को बेहतर बनाने के लिए यह जरूरी है।
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यूएन एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में डिप्थीरिया, टिटनेस और पर्टूसिस (DTP) से बचाव के लिए वैक्सीन की तीन खुराक पाने वाले बच्चों की संख्या 10 करोड़ 80 लाख (84 प्रतिशत) पर अवरुद्ध हो गई। वैश्विक प्रतिरक्षण कवरेज प्रयासों को दर्शाने के लिए ये वैक्सीन एक अहम संकेतक हैं।

जिन बच्चों को वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं मिल पाई, उनकी संख्या 2022 में एक करोड़ 39 लाख थी, मगर 2023 में यह बढ़कर एक करोड़ 45 लाख पर पहुंच गई। जिन बच्चों का टीकाकरण नहीं हो पाया है, उनमें से 50 फीसदी से अधिक उन 31 देशों में रहते हैं, जहां हालात नाजुक हैं, हिंसक टकराव से प्रभावित हैं या फिर संवेदनशील हालात से जूझ रहे हैं।

ऐसे देशों में बच्चों पर ऐसी बीमारियों की चपेट में आने का जोखिम है, जिनकी आसानी से रोकथाम की जा सकती है। मगर, सुरक्षा, पोषण व स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में व्यवधान आने से यह कठिन हो जाता है। इसके अलावा, 65 बच्चों को डीटीपी वैक्सीन की तीसरी खुराक नहीं मिल पाई, जो कि आरंभिक बचपन में बीमारियों से बचाने के लिए आवश्यक है।

ये रुझान दर्शाते हैं कि वैश्विक प्रतिरक्षण कवरेज वर्ष 2022 के बाद से अब तक अवरुद्ध है और 2019 के स्तर तक नहीं लौट पाई है, जिसकी वजह स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान, लॉजिस्टिक संबंधी चुनौतियां, वैक्सीन के प्रति हिचकिचाहट और टीकाकरण में पसरी विषमताएं हैं।

खसरे का प्रकोप
विश्लेषण के अनुसार, घातक खसरा बीमारी के विरुद्ध टीकाकरण की दर भी ठहर गई है, और साढ़े तीन करोड़ बच्चों के पास जरूरी सुरक्षा कवच उपलब्ध नहीं है। 2023 में केवल 83 प्रतिशत बच्चों को नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के ज़रिये ख़सरा की पहली खुराक मिल पाई। वहीं, दूसरी खुराक पाने वाले बच्चों की संख्या में 2022 की तुलना में मामूली वृद्धि हुई और यह 74 प्रतिशत तक पहुंची।

खसरा के प्रकोप को टालने, अनावश्यक बीमारियों व मौतों से बचने और खसरा उन्मूलन लक्ष्य को हासिल करने के लिए निर्धारित 95 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज के लक्ष्य से यह कम है। पिछले पांच वर्षों में, 103 देशों में खसरा की बीमारी फैली है। इन देशों में कुल नवजात शिशुओं की तीन-चौथाई आबादी बसती है। वैक्सीन कवरेज का कम होना (80 प्रतिशत या कम) इसकी एक बड़ी वजह थी। इसके विपरीत, जिन 91 देशों में ख़सरा टीकाकरण की व्यवस्था मज़बूत थी, वहाँ इसका प्रकोप देखने को नहीं मिला।

एचपीवी वैक्सीन कवरेज
नए विश्लेषण में प्रतिरक्षण कवरेज प्रयासों में कुछ मामलों में दर्ज की गई प्रगति को भी रेखांकित किया गया है. इसके अनुसार, अनेक नई वैक्सीन पेश की गई हैं, जिनमें एचपीवी, मेनिनजाइटिस, पोलियो, रोटावायरस समेत अन्य बीमारियो से बचाव के लिए टीके हैं।

इनके रक्षा कवच में निरंतर विस्तार हो रहा है, विशेष रूप से गैवी, द वैक्सीन एलायंस द्वारा समर्थित 57 देशों में। उदाहरणस्वरूप, एचपीवी वैक्सीन की कम से कम एक खुराक पाने वाली किशोर लड़कियों का अनुपात 2022 में 20 फीसदी था, जो कि 2023 में 27 प्रतिशत तक पहुंच गया। इस टीके के जरिए सर्वाइकल कैंसर से बचाव किया जाता है।


सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में सर्वाइकल कैंसर के उन्मूलन के लिए 90 फीसदी टीकाकरण कवरेज का लक्ष्य है, मगर फ़िलहाल एचपीवी वैक्सीन की कवरेज इससे कहीं कम है। उच्च आय वाले देशों में किशोर लड़कियों के लिए यह आंकड़ा 56 प्रतिशत और निम्न व मध्य आय वाले देशों में यह 23 प्रतिशत है।

(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)
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