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संयुक्त राष्ट्र संघ: कौन करेगा अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व, यूएन की समिति अगले महीने करेगी फैसला
Sat, 02 Oct 2021 01:26 PM IST
सुभाष कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: सुभाष कुमार
Updated Sat, 02 Oct 2021 01:26 PM IST
सार
अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा है और म्यांमार में भी सैन्य विद्रोह के बाद सेना का शासन लागू है।
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संयुक्त राष्ट्र संघ में अफगानिस्तान के प्रतिनिधित्व पर होगे फैसला।
- फोटो : social media
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के प्रतिनिधित्व के मामले को लेकर अगले माह संयुक्त राष्ट्र महासभा की साख समिति की महत्वपूर्ण बैठक होगी। महासभा के 76 वें सत्र के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने कहा की सभी 193 देश मिलकर यह फैसला करेंगे कि महासभा में काबुल का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। इसके साथ ही बैठक में म्यांमार को लेकर भी चर्चा होगी।
म्यांमार और अफगानिस्तान दोनों ने दिया प्रतिनिधि बदलने के लिए आवेदन
बता दें कि म्यांमार और अफगानिस्तान ही केवल एसे दो देश है जिन्होने इस बार संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के संबोधन में भाग नहीं लिया था। हाल ही में अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो गया है और म्यांमार में भी सैन्य विद्रोह के बाद सेना का शासन लागू है। म्यांमार ने भी अपने प्रतिनीधि को बदलने के लिए आवेदन किया है। अफगानिस्तान संयुक्त राष्ट्र का 1946 से जबकि म्यांमार 1948 से सदस्य है।
अब इस बैठक के सदस्यों में इस बात पर चर्चा होगी की इन दोनों देशों के असल प्रतिनिधि कौन होंगे। बैठक की अध्यक्षता स्वीडन कर रहा है और इस समिति के सदस्य देश अमेरिका, चीन, रूस, बहामास, नामीबिया, सीएरा लियोन, भूटान और चिली हैं।
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सभी 193 देश करेंगे फैसला
इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद से जब सवाल किया गया तो उन्होने प्रेस वार्ता में कहा कि उन्हें इस बात की खबर है। स्वीडन इस बैठक की अध्यक्षता कर रहा है। आम तौर पर यह बैठक नवंबर में होती है और दिसंबर में इसकी रिपोर्ट सौंपी जाती है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि स्वीडन समय के अनुसार यह कार्य पूरा करेगा। इस बात का फैसला सभी 193 देश करेंगे की इन देशों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।
तालिबान ने एंटोनियो गुटेरेस को लिखा था पत्र
बता दें की अफगानिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनीधि गुलाम इसकजाई हैं, इन्हे पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी ने नियुक्त किया था। इसकजाई ने ही 27 सितंबर को देश की तरफ से संबोधन किया था। इसके बाद सीट त्याग दी थी। इससे पहले तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक पत्र लिख कर सुहैल शाहीन को महासभा में अफगानिस्तान का राजदूत नियुक्त किया था। तालिबान ने शाहीन को सत्र को संबोधित करने के लिए अनुमति की भी मागं की थी, लेकिन यह खारिज़ हो गई थी।
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म्यांमार और अफगानिस्तान दोनों ने दिया प्रतिनिधि बदलने के लिए आवेदन
बता दें कि म्यांमार और अफगानिस्तान ही केवल एसे दो देश है जिन्होने इस बार संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के संबोधन में भाग नहीं लिया था। हाल ही में अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो गया है और म्यांमार में भी सैन्य विद्रोह के बाद सेना का शासन लागू है। म्यांमार ने भी अपने प्रतिनीधि को बदलने के लिए आवेदन किया है। अफगानिस्तान संयुक्त राष्ट्र का 1946 से जबकि म्यांमार 1948 से सदस्य है।
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अब इस बैठक के सदस्यों में इस बात पर चर्चा होगी की इन दोनों देशों के असल प्रतिनिधि कौन होंगे। बैठक की अध्यक्षता स्वीडन कर रहा है और इस समिति के सदस्य देश अमेरिका, चीन, रूस, बहामास, नामीबिया, सीएरा लियोन, भूटान और चिली हैं।
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सभी 193 देश करेंगे फैसला
इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद से जब सवाल किया गया तो उन्होने प्रेस वार्ता में कहा कि उन्हें इस बात की खबर है। स्वीडन इस बैठक की अध्यक्षता कर रहा है। आम तौर पर यह बैठक नवंबर में होती है और दिसंबर में इसकी रिपोर्ट सौंपी जाती है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि स्वीडन समय के अनुसार यह कार्य पूरा करेगा। इस बात का फैसला सभी 193 देश करेंगे की इन देशों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।
तालिबान ने एंटोनियो गुटेरेस को लिखा था पत्र
बता दें की अफगानिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनीधि गुलाम इसकजाई हैं, इन्हे पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी ने नियुक्त किया था। इसकजाई ने ही 27 सितंबर को देश की तरफ से संबोधन किया था। इसके बाद सीट त्याग दी थी। इससे पहले तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक पत्र लिख कर सुहैल शाहीन को महासभा में अफगानिस्तान का राजदूत नियुक्त किया था। तालिबान ने शाहीन को सत्र को संबोधित करने के लिए अनुमति की भी मागं की थी, लेकिन यह खारिज़ हो गई थी।