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कोरोना महामारी के चलते ब्रिटेन में बच्चे भुखमरी के शिकार, बेघरों की संख्या भी बढ़ी

Fri, 18 Dec 2020 05:47 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 18 Dec 2020 05:47 PM IST
सार

बोरिस जॉनसन सरकार की तरफ से इस पर सिर्फ इतना कहा गया है कि सरकार महामारी के मारे गरीब परिवारों की मदद के लिए कृत संकल्प है। इसके लिए उसने कल्याण योजनाओं की घोषणा की है...

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unicef will feed the Children suffering from starvation in Britain due to Corona, number of homeless also increased
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

ब्रिटेन की माली हालत कितनी बिगड़ गई है, इसका अंदाजा हाल में आई दो खबरों से लगा है। पहली खबर यह है कि संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनिसेफ ने ब्रिटेन में कोरोना महामारी के कारण भुखमरी का शिकार हो रहे बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने का फैसला किया है।

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दूसरी खबर के मुताबिक ब्रिटेन में बेघर लोगों की संख्या 15 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। यहां की मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ये संख्या उस हद तक जा सकती है, जितनी हाल में कभी नहीं रही।
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यूनिसेफ दुनिया भर में बच्चों को मानवीय मदद पहुंचाने के लिए जानी जाती है। उसने एक सार्वजनिक बयान में कहा है कि कोरोना महामारी के कारण बच्चों का संकट उस हद तक पहुंच गया है, जैसा दूसरे विश्व युद्ध के बाद कभी नहीं देखा गया।
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ब्रिटेन में बीते मई में यू-गोव एजेंसी के एक सर्वेक्षण से सामने आया था कि देश में 24 लाख बच्चे खाद्य असुरक्षा के बीच जी रहे हैं। मई से अक्टूबर के बीच ये संख्या नौ लाख और बढ़ गई। यानी अब खाद्य असुरक्षा से पीड़ित बच्चों की तादाद 33 लाख हो गई है। यह देश के कुल बच्चों के छठे हिस्से के बराबर है।

यूनिसेफ ने कहा है कि वह स्कूली बच्चों को भोजन कराने की सामुदायिक योजना- स्कूल फूड मैटर्स- के लिए 25 हजार पाउंड की सहायता देगी। इस रकम से क्रिसमस और फिर फरवरी में हाफ टर्म के बाद होने वाली छुट्टियों के दौरान बच्चों को खाना खिलाया जाएगा।

स्कूल फूड मैटर्स की संस्थापक स्टीफेनी स्लेटर ने इस निर्णय के लिए यूनिसेफ का आभार जताया है। उन्होंने यहां के अखबार द गार्जियन से कहा कि पिछली गर्मियों में ब्रेकफास्ट के बॉक्स बांटने के चलाए गए कार्यक्रम के दौरान ये जाहिर हुआ था कि देश में बहुत से परिवार सचमुच बहुत मुसीबत में हैं। वे अपने बच्चों को खिलाने के लिए सामुदायिक सहायता पर निर्भर हैं।

विपक्षी लेबर पार्टी की नेता एंजेला रेयनर ने कहा- यूनिसेफ को हमारे देश के बच्चों को खाना खिलाने के लिए आगे आना पड़े, यह हमारे लिए अपमानजनक स्थिति है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और वित्त मंत्री ऋषि सुनक को इस पर शर्मिंदा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन दुनिया के सबसे धनी देशों में है, लेकिन अब उसके बच्चों को उस एजेंसी पर निर्भर होना पड़ रहा है, जो पहले युद्ध और प्राकृतिक आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में बच्चों की देखभाल करती थी।

बोरिस जॉनसन सरकार की तरफ से इस पर सिर्फ इतना कहा गया है कि सरकार महामारी के मारे गरीब परिवारों की मदद के लिए कृत संकल्प है। इसके लिए उसने कल्याण योजनाओं की घोषणा की है।

इस बीच सरकारी आंकड़ों के आधार पर द इंडिपेंडेन्ट अखबार ने ये खबर छापी है कि देश में बेघर लोगों की संख्या चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई है। इन आंकड़ों के मुताबिक 89,850 बच्चों के पास घर का कोई पता नहीं है। उन्हें क्रिसमस अस्थायी आवासों में बिताना होगा। लंदन शहर में 2,500 लोगों को जन प्रतिनिधियों के कोष से बने शेल्टर्स में जगह मिली हुई है। फिर भी सात सौ लोग सड़कों के किनारे रात गुजारने को मजबूर हैं।

कोरोना महामारी के कारण बेघर लोगों को छत मुहैया करा पाना और कठिन हो गया है। कई शेल्टर होम्स में इतनी जगह नहीं है कि वहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके। इस हालात को देखते हुए शहर के जन प्रतिनिधियों ने ब्रिटिश सरकार से बेघर लोगों की संख्या घटाने की अपनी योजना के लिए तय लक्ष्य पर फिर से गौर करने को कहा है।


ब्रिटिश सरकार ने 2024 तक सभी बेघर लोगों को घर मुहैया कराने की योजना घोषित की हुई है। लेकिन लंदन के जन प्रतिनिधियों का कहना है कि अभी जो खर्च हो रहा है, उससे ये लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। जबकि जरूरत यह है कि इस समयसीमा को और पहले किया जाए, ताकि महामारी के दौर में बढ़ी ये समस्या नियंत्रित हो सके।

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