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सीरिया में सैन्य तनाव बढ़ने पर आम लोगों की सुरक्षा की चिंता, लाखों विस्थापित

Fri, 11 Oct 2019 03:44 AM IST
गौरव पाण्डेय यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 11 Oct 2019 03:44 AM IST
सार

  • उत्तरी सीरिया में बढ़े सैन्य तनाव के कारण लाखों लोग इलाका छोड़ने के लिए मजबूर
  • अमेरिका ने हटाई थी सेना, इसके तुरंत बाद तुर्की ने किए थे जमीनी और हवाई हमले
  • यूएनएचसीआर ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का सम्मान करने का आग्रह किया
  • करीब 60 लाख सीरियाई लोग देश के भीतर विस्थापित, और बिगड़ सकते हैं हालात

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UNHCR expressed concern for the safety of common people as Syria increases military tension
सीरिया में सैन्य तनाव बढ़ने से घर छोड़ने को मजबूर स्थानीय लोग - फोटो : ट्विटर

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने गुरुवार को कहा है कि सीरिया के पूर्वोत्तर इलाके में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव के कारण लाखों लोगों को सुरक्षा के चलते वो इलाका छोड़ना पड़ा है। इससे एक दिन पहले ही तुर्की ने सीरिया में हवाई और जमीनी हमले किए थे।

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शरणार्थी एजेंसी ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का सम्मान करने का आग्रह किया है। इनमें जरूरतमंद लोगों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने के लिए एजेंसियों को रास्ता देना भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त फिलिपो ग्रैंडी ने कहा है, 'उत्तरी सीरिया में लाखों लोग अब भारी मुसीबत में हैं। आम लोगों और सिविलियन बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।'

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और बदतर हो सकते हैं सीरिया के हालात

एजेंसी ने आगाह करते हुए कहा है कि मौजूदा हालात से सीरिया की स्थिति और ज्यादा बदतर होने की आशंका है, जबकि सीरिया में इस समय विश्व का सबसे बड़ा विस्थापन या शरणार्थी संकट बना हुआ है।

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50 लाख से ज्यादा सीरियाई लोगों को शरणार्थी के तौर पर जीवन जीना पड़ रहा है, और अन्य लगभग 60 लाख देश के भीतर ही विस्थापित हैं। उधर संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) ने भी पहले से ही भीषण युद्धग्रस्त देश सीरिया में मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति भड़कने पर गहरी चिंता जताई है।

ट्रंप ने सीरिया से अपने सैनिक हटाने की घोषणा की थी

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ही सीरिया से अमेरिकी सैनिक हटाने की घोषणा की थी। अमरीकी सेनाएं कुर्दिश मिलिशिया के साथ कई वर्षों से काम कर रही थीं जिन्हें वाईपीजी के नाम से जाना जाता है और तुर्की उन्हें आतंकवादी मानता है।

यूनीसेफ की डायरेक्टर हेनरिएटा फोर ने कहा, 'सैन्य तनाव बढ़ने से उन लोगों और एजेंसियों की क्षमता पर गहरा असर पड़ेगा जो नाजुक हालात में जीने को मजबूर हजारों बच्चों तक सहायता पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा।'

सैन्य गतिविधियां बढ़ने से बढ़ेंगे असुरक्षा के हालात

सीरिया में लगभग आठ साल से चले रहे युद्ध के दौरान मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की जांच करने  वाले स्वतंत्र जांच आयोग का कहना है कि इससे भी ज्यादा फिक्र की बात ये है कि सैन्य गतिविधियां बढ़ने से असुरक्षा और अफरातफरी के हालात बढ़ेंगे। 

इससे आईएसआईएस या आईसिल (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लैवेंट) और दाएश जैसे अतिवादी गुटों के फिर से सक्रिय हो जाने के हालात पैदा हो सकते हैं। जांच आयोग का कहना था, 'सीरिया को लोगों को अब अगर सबसे कम किसी चीज की जरूरत है तो वो है हिंसा का कोई नया दौर।' 

आयोग ने कहा कि पहले से विस्थापित लगभग एक लाख लोगों के कोई तार आईसिल लड़ाकों से जुड़े पाए गए थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। अब ये लोग अस्थाई शिविरों में रहने को मजबूर हैं. उन्हें बहुत कम सुविधाएं हासिल हैं और महिलाओं और बच्चों के लिए संवेदनशील पुनर्वास कार्यक्रमों के अभाव में उनका चरमपंथियों के चंगुल में फंस जाने का भी खतरा है।

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