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व्हाउट हाउस से मिला निर्देश, इसरो को सहयोग देने के लिए तैयार हुआ नासा
Sat, 06 Apr 2019 08:33 AM IST
अमर शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 06 Apr 2019 08:33 AM IST
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जिम ब्रिडेनस्टाइन (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
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व्हाउस हाउस के दबाव के बाद नासा ने निर्णय लिया है कि वह अपने भारतीय समकक्ष इसरो के साथ सहयोग को बरकरार रखेगा। हाल ही में उसने ऑर्बिटल डेबरिस (अतंरिक्ष में मौजूद मलबा) के कारण भारत के साथ सहयोग को निलंबित कर दिया था। यह मलबा 27 मार्च को भारत द्वारा एंटी-सैटेलाइट परीक्षण के बाद पैदा हुआ था।
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नासा अध्यक्ष जेम्स ब्रिडेनस्टाइन जिन्होंने पहले भारत के परीक्षण को भयानक करार दिया था उन्होंने गुरुवार को इसरो अध्यक्ष के सिवान को पत्र लिखते हुए कहा, 'हमारी आपके साथ साझेदारी के तहत हमारा सहयोग बरकरार रहेगा। हम नासा-इसरो ह्यूमन स्पेस फ्लाइट्स वर्किंग ग्रुप, प्लेनेटरी साइंस वर्किंग ग्रुप, यूएस-इंडिया अर्थ साइंस वर्किंग ग्रुप और हेलियोफिजिक्स वर्किंग ग्रुप जैसी चीजों पर काम करते रहेंगे।'
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ब्रिडेनस्टाइन ने बताया कि आखिर उन्होंने अपना निर्णय क्यों बदला है। उन्होंने कहा, 'व्हाइट हाउस से मिले मार्गदर्शन के आधार पर हम आपके साथ भविष्य में काम करना चाहते हैं।' इससे पहले इसरो अध्यक्ष को उन्होंने एक पत्र लिखा था। गुरुवार को इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, 'नासा-इसरो ह्यूमन स्पेस फ्लाइट वर्किंग ग्रुप कार्यक्रम के तहत गतिविधियों को निलंबित किया जाता है।'
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चार अप्रैल को लिखे पत्र से ऐसा प्रतीत होता है कि व्हाइट हाउस के हस्तक्षेप के बाद, दोनों संगठनों के बीच सहयोग बरकरार रहेगा। नासा प्रमुख ने एक टाऊन हॉल बैठक में भारत के उपग्रह भेदी मिसाइल परीक्षण की आलोचना की थी क्योंकि इसने अंतरिक्ष में मलबा पैदा किया और इससे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को खतरा हो सकता है।
हालांकि ब्रिडेनस्टाइन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरिक्ष में जमा मलबा अमेरिका के लिए एक गंभीर मसला है और यह अंतरिक्ष में सक्रिय सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, 'हम आपके मलबे की लगातार निगरानी करना जारी रखेंगे ताकि हमारे मानव अतंरिक्ष अभियानों खासतौर से अंतरराष्ट्रीय अतंरिक्ष स्टेशन की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।'
इससे पहले गुरुवार को पेंटागन ने नासा के उलट कहा था कि वह अपने पूर्ववर्ती आकलन पर खड़ा है कि भारत का एंटी-सैटेलाइट मलबा अतंरिक्ष में अपने आप जल जाएगा। अमेरिका के कार्यकारी रक्षा सचिव पैट्रिक शनाहन ने 28 मार्च को मलबे से होने वाले खतरों को खारिज कर दिया था।