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अमेरिका: अब बाइडन को नाकाम करने का दांव चलेगा उनकी पार्टी का प्रोग्रेसिव धड़ा?

Thu, 28 Oct 2021 03:36 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 28 Oct 2021 03:36 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों का कहना है कि बिल्ड बैक अमेरिका योजना से शुरुआत में जो उत्साह जगा था, वह अब चूक गया है। प्रोग्रेसिव खेमे के भीतर इसको लेकर बेचैनी का आलम है। उनके समर्थक तबकों से कहा जाने लगा है कि प्रोग्रेसिव सांसद पहले ही काफी झुक चुके हैं। अब अगर उन्होंने और नरमी दिखाई, तो उनकी कोई साख नहीं बचेगी...

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Under pressure from the Democratic camp, Biden has to compromise on all the big programs for which he had made his mark
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन - फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

अमेरिका में अब डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े की साख दांव पर है। मध्यमार्गी डेमोक्रेटिक खेमे के दबाव में उन्हें उन तमाम बड़े कार्यक्रमों पर समझौता करना पड़ रहा है, जिन्हें लेकर उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई थी। राष्ट्रपति जो बाइडन की 3.5 ट्रिलियन डॉलर की बिल्ड बैक अमेरिका योजना (सॉफ्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज) में इन कार्यक्रमों को शामिल किया गया था। लेकिन मध्यमार्गी सांसदों के दबाव में एक के बाद एक ऐसे कार्यक्रम इस योजना से हटा दिए गए हैं।

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पैकेज से हटाए कई कार्यक्रम

बुधवार को खबर आई कि परिवारों को वेतन के साथ अवकाश और मेडिकल छुट्टी देने की योजना भी सॉफ्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज से हटा दी गई है। इसके पहले जलवायु परिवर्तन रोकने के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम इससे हटा दिए गए थे। ऐसी खबर है कि बाइडन अब मध्यमार्गी सांसदों की राय को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। टीवी चैनल सीएनएन के मुताबिक मध्यमार्गी सीनेटर जो मेंचिन और क्रिस्टीन सिनेमा को मनाने में नाकाम होने के बाद बाइडन ने ये नजरिया अपना लिया है कि जितना संभव है, उतने पर सहमति बना ली जाए।

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इस बीच प्रोग्रेसिव सीनेटरों ने अरबपतियों पर नया टैक्स लगाने का एक प्रस्ताव सामने रखा है। उनका कहना है कि इससे सामाजिक कल्याण और जलवायु परिवर्तन रोकने के कार्यक्रमों के लिए धन जुटाया जा सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक नया टैक्स उन लोगों पर लगेगा कि जिनकी संपत्ति एक अरब डॉलर से ज्यादा है या जिनकी सालाना आमदनी दस करोड़ डॉलर से अधिक है। अमेरिका में एक अरब डॉलर से ज्यादा संपत्ति वाले लगभग 700 लोग हैं।
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लेकिन वेबसाइट एक्सियोस.कॉम की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रोग्रेसिव खेमे का ये प्रस्ताव मंजूर होने की संभावना भी कम है। पार्टी के मध्यमार्गी सांसद इसके लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में यही लगता है कि इस धड़े ने अपनी छवि बचाने की कोशिश में ऐसा  प्रस्ताव सामने रखा है, जिसके मंजूरी होने की गुंजाइश नहीं है।

टीवी चैनल एनबीसी की भी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रोग्रेसिव धड़े के इस प्रस्ताव से उनके समर्थक तबकों में भले उत्साह पैदा होगा, लेकिन यह इसे लागू करना बेहद मुश्किल है। अगर कांग्रेस (संसद) ने इसे मंजूरी दे दी, तब भी सुप्रीम कोर्ट में इसके खारिज हो जाने की पूरी संभावना है। इस चैनल की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट में टैक्स कानून के विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि ये प्रस्ताव संविधान सम्मत नहीं हैं।

खत्म हो रहा है बिल्ड बैक अमेरिका योजना को लेकर उत्साह

पर्यवेक्षकों का कहना है कि बिल्ड बैक अमेरिका योजना से शुरुआत में जो उत्साह जगा था, वह अब चूक गया है। प्रोग्रेसिव खेमे के भीतर इसको लेकर बेचैनी का आलम है। उनके समर्थक तबकों से कहा जाने लगा है कि प्रोग्रेसिव सांसद पहले ही काफी झुक चुके हैं। अब अगर उन्होंने और नरमी दिखाई, तो उनकी कोई साख नहीं बचेगी। प्रोग्रेसिव धड़े की समर्थक वेबसाइट जैकॉबिन.कॉम में छपी एक कड़ी टिप्पणी में प्रोग्रेसिव सांसदों को सलाह दी गई है कि वे समझौते का रुख छोड़ कर जो बाइडन की पूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर योजना को नाकाम कर दें।



बाइडन प्रशासन ने 550 बिलियन डॉलर की हार्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजना पर रिपब्लिकन पार्टी के साथ सहमति बनाई थी। लेकिन प्रोग्रेसिव धड़े ने उसका पारित होना रोक रखा है। उसकी दलील रही है कि दोनों बिल एक साथ ही पारित होने चाहिए। वेबसाइट जैकॉबिन की टिप्पणी में कहा गया है कि हार्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर बिल फेल होने से मध्यमार्गी सांसदों को झटका लगेगा। इससे बाइडन के राष्ट्रपति काल के पूरी तरह नाकाम रहने की छवि भी बनेगी। इसलिए मुमकिन है कि बाइडन और मध्यमार्गी सांसद उसे बचाने के लिए बिल्ड बैक अमेरिका योजना पर नरम रुख अपनाएं। इस टिप्पणी में चेतावनी दी गई है कि प्रोग्रेसिव खेमे की पूरी साख दांव पर लगी हुई है।

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