फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   UN says that religious freedom in Pakistan continues to deteriorate in Imran Khan leadership

यूएन रिपोर्ट: इमरान सरकार में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार, हिंदू, ईसाइयों पर ज्यादा खतरा

Sun, 15 Dec 2019 12:29 PM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 15 Dec 2019 12:29 PM IST
विज्ञापन
UN says that religious freedom in Pakistan continues to deteriorate in Imran Khan leadership
पाकिस्तान में जबरन धार्मांतरण का विरोध करते लोग - फोटो : Social Media (File)

महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आयोग का कहना है कि प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता लगातार बिगड़ती जा रही है। आयोग का कहना है कि तहरीक-ए-इंसाफ सरकार द्वारा भेदभावपूर्ण कानून ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करने के लिए चरमपंथी मानसिकता वाले लोगों को सशक्त बनाया है।

विज्ञापन


दिसंबर में जारी हुई 47 पेज की रिपोर्ट में आयोग ने ईशानिंदा कानून के राजनीतिकरण व शस्त्रीकरण और अहमदिया विरोधी कानूनों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। जिसका उपयोग इस्लामी समूह न केवल धार्मिक अल्पसंख्यकों को सताने बल्कि राजनीतिक आधार हासिल करने के लिए भी किया जा रहा है।
विज्ञापन


आयोग का कहना है कि इस्लामी राष्ट्र में विशेष रूप से ईसाई और हिंदू समुदाय खासतौर से महिलाएं और लड़कियां कमजोर हैं। हर साल हजारों को अगवा करके धर्मांतरण के बाद मुस्लिम व्यक्ति से शादी कराई जाती है। अगवा करने वालों की धमकियों के कारण पीड़िताओं के पास अपने परिवार के पास लौटने की बहुत कम या कोई भी उम्मीद नहीं रहती है। पुलिस की कमी, कार्रवाई में कमी, न्यायिक प्रक्रिया में कमजोरियों और धार्मिक अल्पसंख्यक पीड़ितों के प्रति पुलिस और न्यायपालिका दोनों के साथ भेदभाव की वजह से यह समस्या जटिल हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


आयोग ने अफनी रिपोर्ट में कई तरह के उदाहरणों के जरिए बताया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है। मई 2019 में सिंध के मीरपुरखास के रहने वाले एक हिंदू पशुचिकित्सा अधिकारी रमेश कुमार मल्ही पर कुरान का आयतों वाले पन्नों में दवाई लपेटने के लिए ईशनिंदा का आरोप लगा था। प्रदर्शनकारियों ने चिकित्सक के क्लीनिक को और हिंदू समुदाय के अन्य लोगों की दुकानों को आग के हवाले कर दिया था।


आयोग ने पाकिस्तान में उस ईशनिंदा कानून का विरोध किया जो किसी पर भी इस्लाम का अपमान करने के आरोप में अपराधी बना देता है। इसका दुरुपयोग करके धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जाते हैं और यह विवाद और पीड़ा का स्रोत हैं। रिपोर्ट में लिखा है, 'चरमपंथ के उदय के साथ पिछले तीन दशकों में ईशनिंदा कानूनों का लंबे समय तक दुरुपयोग ने सामाजिक सद्भाव पर हानिकारक प्रभाव डाला है। ईशनिंदा के मामलों की संवेदनशील प्रकृति धार्मिक व्यग्रता को बढ़ाने का काम करती है और इसने हिंसा का माहौल बनाया है जिसमें लोग मामलों को अपने हाथों में लेते हैं। इसके अक्सर घातक परिणाम होते हैं।'

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed