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भारत की आपत्ति पर यूएन ने किया अपनी 75वीं सालगिरह के घोषणापत्र में बदलाव

Mon, 29 Jun 2020 07:13 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 29 Jun 2020 07:13 AM IST
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UN makes some changes into its 75th anniversary manifesto on India objection
यूएन - फोटो : twitter

भारत समेत 5 देशों की आपत्ति के बाद संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के गठन की 75वीं सालगिरह के घोषणापत्र के ड्राफ्ट से एक विवादित पदवाक्य (फ्रेज) को हटा दिया गया। यह पदवाक्य चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से इस्तेमाल किए गए एक वाक्यांश से मिलता-जुलता था, जिसे लेकर भारत के अलावा ब्रिटेन और अमेरिका भी आपत्ति जताने वाले 6 देशों में शामिल थे।

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यूएन आम सभा के अध्यक्ष तिज्जानी मोहम्मद-बांदे ने घोषणापत्र का ड्राफ्ट मौन प्रक्रिया के तहत सभी सदस्य देशों में वितरित किया था। इस प्रक्रिया के तहत यदि कोई सदस्य देश ड्राफ्ट पर एक निश्चित समय के दौरान आपत्ति नहीं जताता है तो उसे घोषणापत्र के तौर पर मंजूरी दे दी जाती है।
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एक चैरिटेबल संस्था यूनाइटेड नेशंसा एसोसिएशन-यूके (यूएनए-यूके) के मुताबिक, इस वैश्विक संस्था में कार्यवाहक ब्रिटिश राजदूत जोनाथन एलेन ने 24 जून को मौन प्रक्रिया को तोड़ दिया है। यूएनए-यूके के कंधों पर यूएन में ब्रिटिश गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी है। यूएनए-यूके के मुताबिक, जोनाथन ने ‘फाइव आइज’ इंटेलिजेंस कम्युनिटी की तरफ से मौन प्रक्रिया को तोड़ते हुए आपत्ति जताई थी।
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इन फाइव आइज में ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कनाडा और भारत शामिल हैं। यूएनए-यूके के मुताबिक, छह देशों ने घोषणापत्र के अंत में दिए गए एक वाक्यांश पर आपत्ति जताई थी। यह वाक्यांश कुछ ऐसा था, ‘एक साझा भविष्य के लिए हमारी साझा दृष्टि को महसूस करना।’


इन छह देशों ने इस वाक्यांश को हटाकर एक अन्य वाक्यांश को शामिल करने की मांग की थी, जिसमें कहा गया था, ‘यूएन चार्टर की प्रस्तावना में उल्लिखित बेहतर भविष्य के लिए हमारी साझा दृष्टि को साकार करना’। यूएनए-यूके के मुताबिक, इन छह देशों ने पुराने वाक्यांश को हटाने की मांग इसलिए की थी, क्योंकि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव हु जिंताओ ने 2012 में 18वीं पार्टी महासम्मेलन में अपनी विदेशी नीति आकांक्षाओं को जाहिर करने वाली रिपोर्ट में ठीक ऐसे ही वाक्यांश का इस्तेमाल किया था।

इसके बाद मोहम्मद-बांदे ने सभी सदस्य देशों को 25 जून को पत्र लिखकर इस वाक्यांश को बदले जाने की जानकारी दी।

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