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Afghanistan: संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान में 40 लाख से अधिक लोगों की सहायता की, भुखमरी के कगार पर अफगानी
Mon, 31 Oct 2022 02:28 AM IST
Jeet Kumar
एएनआई, काबुल
एएनआई, काबुल
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 31 Oct 2022 02:28 AM IST
सार
एक नए सर्वेक्षण में पता चला है कि अफगानिस्तान में बढ़ते आर्थिक संकट ने छोटे उद्यमों को प्रभावित किया है, निजी कंपनियों की बिक्री में कमी आई है और उत्पादों की उपभोक्ता मांग में भारी गिरावट के कारण अपने आधे से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की है।
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यूएनएचसीआर
- फोटो : social media
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विस्तार
अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत आने के बाद देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इसके लिए तमाम देशों ने राहत भेजी हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र उच्चायोग (यूएनएचसीआर) ने एक बयान में कहा कि लगभग 90 प्रतिशत अफगान लोग भुखमरी के कगार पर हैं और 150,000 से अधिक परिवारों में 11 लाख अफगानों का मानवीय सहायता के लिए मूल्यांकन किया गया है। वहीं 40 लाख से अधिक लोगों की सहायता की जा चुकी है।
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यूएनएचसीआर ने अफगानिस्तान के जरूरतमंद नागरिकों की सहायता के लिए विश्व खाद्य कार्यक्रम और संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष के साथ अपने सहयोग के बारे में बात की। बता दें कि पिछले साल अगस्त में तालिबान के नियंत्रण के बाद सहायता में रुकावट आई थी। साथ ही कई प्रांतों में से, उत्तरी अफगानिस्तान के पंजशीर प्रांत में लगभग 1,300 परिवारों को शत्रुता के कारण अपने रहने वाले क्षेत्रों से बाहर कर दिया गया है।
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अफगानिस्तान में दो करोड़ से अधिक लोगों को सहायता की आवश्यकता
खामा प्रेस ने बताया कि इससे पहले वर्ष की शुरुआत में, संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया था कि अफगानिस्तान में दो करोड़ से अधिक लोगों को सहायता की आवश्यकता है। एक नए सर्वेक्षण में पता चला है कि अफगानिस्तान में बढ़ते आर्थिक संकट ने छोटे उद्यमों को प्रभावित किया है, निजी कंपनियों की बिक्री में कमी आई है और उत्पादों की उपभोक्ता मांग में भारी गिरावट के कारण अपने आधे से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की है।
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छोटे उद्यमों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ
सर्वेक्षण के अनुसार, छोटे उद्यमों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। देश में गरीबी की दर तालिबान शासन के आने से 95 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जबकि 56 प्रतिशत दैनिक आय में गिरावट के बीच देश छोड़ने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, लाखों अफगान भुखमरी के कगार पर हैं क्योंकि देश मानवीय संकट से जूझ रहा है।