Kremlin Drone Strike: अभी ऐसे हमले रूस पर और हो सकते हैं! विशेषज्ञों ने बताई यह बड़ी वजह
विदेशी मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरीके की घटना क्रेमलिन पर ड्रोन हमले के साथ की गई है उस तरीके की घटनाएं न सिर्फ रूस बल्कि यूक्रेन और आसपास के इलाके में अब और बढ़ेगी। दरअसल इसके पीछे सबसे बड़ी वजह 'कोल्ड वार मेंटालिटी' ही है।
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रूस के राष्ट्रपति आवास पर हुए ड्रोन हमले को आतंकी हमला करार देने के साथ ही अब रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की भयावहता बढ़ सकती है। यह भयावहता युद्ध के खत्म होने जैसे निष्कर्ष तक बिल्कुल नहीं पहुंचेगी। विदेशी मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरीके की घटना क्रेमलिन पर ड्रोन हमले के साथ की गई है उस तरीके की घटनाएं न सिर्फ रूस बल्कि यूक्रेन और आसपास के इलाके में अब और बढ़ेगी। दरअसल इसके पीछे सबसे बड़ी वजह 'कोल्ड वार मेंटालिटी' ही है। विदेशी मामलों से जुड़े विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि इस युद्ध का दुष्प्रभाव अभी पूरी दुनिया पर और जबरदस्त तरीके से पड़ने वाला है।
एक साल से ज्यादा वक्त से चल रहे रूस और यूक्रेन के युद्ध में बीती रात को क्रेमलिन पर हुए ड्रोन हमले को यूक्रेन की ओर से सबसे बड़ी आतंकी कार्रवाई मानी जा रही है। भारतीय विदेश सेवा से जुड़े रहे वरिष्ठ भारतीय राजनयिक और रूस में लंबे समय तक वाणिज्य प्रमुख रहे अमरेंद्र कठुआ बताते हैं कि क्रेमलिन पर हुआ हमला इस बात की तस्दीक बिल्कुल नहीं करता है कि रूस यूक्रेन को पूरी तरीके से तबाह कर युद्ध खत्म कर देगा। उनका कहना है कि जिस तरीके से रूस और यूक्रेन का युद्ध चल रहा है उससे तो यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि अभी युद्ध लंबा चलेगा। ड्रोन हमले को लेकर आतंकी घटना जरूर करार दिया जा रहा है रूस ने इस पर जबरदस्त प्रतिक्रिया भी दी है। लेकिन इन तमाम प्रतिक्रियाओं और अग्रेशन के बाद भी यह कहना बहुत जल्दबाजी होगा कि रूस यूक्रेन को पूरी तरह तबाह करके युद्ध खत्म कर देगा।
अमरेंद्र कठुआ कहते हैं कि जब रूस और यूक्रेन का युद्ध हुआ था तो शुरुआत में यही अनुमान लगाया जा रहा था कि युद्ध बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ता गया उसके पीछे की मंशा साफ होती चली गई। वो कहते हैं कि यह पूरा युद्ध सिर्फ यूक्रेन को तबाह करने के लिए नहीं है बल्कि नाटो जैसे संगठनों को सबक सिखाने के लिए भी रूस लगातार यूक्रेन पर धीरे-धीरे हमला करके उसको तबाह कर रहा है। उनका मानना है कि इस युद्ध की वजह से अफ्रीका एशिया और मिडिल ईस्ट जैसे दुनिया के तमाम देशों पर पढ़ने वाले व्यापारिक निर्भरता से जो महंगाई जैसे हालात पैदा हो रहे हैं उसको भी रूस अपनी ताकत के तौर पर देख रहा है। यही वजह है कि सिर्फ एक ड्रोन हमले की वजह से रूस इस युद्ध को बिल्कुल खत्म नहीं करने वाला।
रक्षा मामले से जुड़े विशेषज्ञ और दुनिया के अलग-अलग देशों में अपनी सेवाएं देने वाले पूर्व राजनयिक एनसी चंद्रा कहते हैं कि जब रूस और यूक्रेन में युद्ध चल ही रहा है तो किसी भी मुल्क को यह सोचना कि उसके ऊपर हमला नहीं होगा एक बचकानी सोच ही होगी। इसलिए रूस के राष्ट्रपति के निवास पर ड्रोन का आ जाना युद्ध के हालातों में कोई अविश्वसनीय घटना जैसा नहीं है। चंद्रा कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि रूस की सीक्रेट एजेंसी से लेकर अन्य सिक्योरिटी एजेंसी इसको इस बात का इल्म नहीं होगा कि रूस में भी हमले हो सकते हैं। यह जरूर मानते हैं कि तमाम सुरक्षा इंतजामातों के बाद भी आखिर ड्रोन कैसे इतने सुरक्षित ठिकाने की ओर बढ़ गया और उसको ब्लास्ट करके गिराना पड़ा। यह सुरक्षा एजेंसियों के ऊपर भी बड़ा सवाल है और इसको लेकर रूस के भीतर सीक्रेट एजेंसियों से लेकर सुरक्षा एजेंसियां अपनी जांच पड़ताल भी कर ही रही होगी।
पूर्व वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी अमरेंद्र कठुआ कहते हैं कि वह लंबे समय तक रूस में रहे हैं। वह उसकी रणनीति को बहुत करीब से जानते और समझते हैं। उनका मानना है कि ऐसा नहीं है कि रूस में पुतिन के चाहने वाले ही लोग हैं। रशिया में पुतिन के विरोधी भी बहुत हैं। जो लगातार रूस की इस युद्ध की रणनीति का विरोध करते आए हैं। इसके अलावा और भी कई विरोधी ताकते रूस में सक्रिय हैं जो लगातार पुतिन को निशाने पर लेते रहते हैं। उनका मानना है कि जब युद्ध होता है तो दुश्मन देश के साथ मिलकर दुनिया के दूसरे मुल्क भी उसमें अपना फायदा देखते हैं। रूस और यूक्रेन के युद्ध में यह बात पूरी तरीके से स्पष्ट हो चुकी है कि कैसे इस युद्ध को व्यापार के लिहाज से भी इस्तेमाल किया जा रहा है। बताते हैं कि अफ्रीका एशिया मिडल ईस्ट समेत दुनिया के कई पश्चिमी और अमेरिकी देश यूक्रेन पर निर्भर थे। युद्ध के बाद या निर्भरता किस हद तक इधर-उधर हुई और उसका पूरी दुनिया में क्या असर हुआ यह किसी से छिपा नहीं है।
उनका मानना है कि निश्चित तौर पर प्रेसिडेंट हाउस इलाके में ड्रोन से हमले की बात पर कड़ा संज्ञान लेना और रणनीतिक लिहाज से और एग्रेसिव तरीके से अपने युद्ध को आगे बढ़ाना रूस जारी रखेगा। अमरेंद्र कठुआ कहते हैं कि आज की स्थिति में यूक्रेन को दोबारा खड़े होने में कम से कम तीन दशक लग जाएंगे। 'कोल्ड वार मेंटलिटी' के लिहाज से जब युद्ध होता है तो युद्ध सिर्फ किसी देश को तुरंत नष्ट करने के लिहाज से नहीं होता है। कठुआ का मानना है कि इस बात को दुनिया के बहुत से देशों ने स्वीकार कर लिया है और बहुत से देशों को यह स्वीकार करना होगा कि रूस और यूक्रेन के बीच चलने वाला युद्ध "कोल्ड वॉर मेंटालिटी" ही है। जिसका अंत रूस के राष्ट्रपति भवन के ऊपर से गुजरने वाले ड्रोन से खत्म नहीं होने वाला है। वह कहते हैं कि आने वाले दिनों में इस तरीके के हमले रूस में होने की संभावनाएं और बढ़ गई हैं। इसके उलट रूस भी अब यूक्रेन पर अपने हमले तेज कर देगा।