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Ukraine: '100 मिलियन डॉलर के भ्रष्टाचार की जांच से नहीं पड़ा असर...', यूक्रेन की परमाणु उर्जा कंपनी का दावा
Tue, 11 Nov 2025 07:06 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 11 Nov 2025 07:06 PM IST
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एनरगोएटम
- फोटो : एक्स/एनरगोएटम
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यूक्रेन की परमाणु ऊर्जा कंपनी एनरगोएटम ने मंगलवार को कहा कि देश के बिजली क्षेत्र में चल रही 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के कथित भ्रष्टाचार की जांच से उसकी संचालन प्रक्रिया या उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है। एनरगोएटम एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है और यूक्रेन में आधे से अधिक बिजली आपूर्ति करती है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय भ्रष्टाचा रोधी ब्यूरो (एनएबीयू) की जांच के बावजूद उत्पादन और संचालन सुरक्षा सामान्य रूप से जारी है।
यह बयान उस समय आया है, जब एक दिन पहले एजेंसी ने ऊर्जा क्षेत्र में 15 महीने से चल रही भ्रष्टाचार जांच की कुछ जानकारी साझा की थी, जिनमें एनरगोएटम का नाम भी शामिल है। रूस के लगातार हवाई हमलों के कारण यूक्रेन को बार-बार ऊर्जा ढांचे की मरम्मत करनी पड़ी है, जिससे इस क्षेत्र में यूक्रेनी और विदेशी फंड की बड़ी मात्रा प्रवाहित हुआ है। यूक्रेन के ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि रूस ने सोमवार रात खारकीव, ओडेसा और दोनेत्स्क क्षेत्रों में ऊर्जा ढांचे पर हमले किए, जिसके बाद देश के अधिकांश हिस्सों में बिजली कटौती लागू की गई है।
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राष्ट्रीय भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो का काम उच्च स्तर पर फैले भ्रष्टाचार को खत्म करना है, जो कीव के यूरोपीय संघ (ईयू) में शामिल होने के प्रयासों में बाधा के रूप में देखा जाता है। यह एजेंसी मुख्य रूप से वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी कंपनियों से जुड़े मामलों की जांच करती है।
इससे पहले ब्यूरो ने खुलासा किया था कि रक्षा क्षेत्र में फर्जी सौदों के जरिये लाखों डॉलर की हेराफेरी की गई थी, जो यूक्रेन की सेना के लिए मोर्टार शेल खरीदने के लिए आवंटित की गई थी। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस नई जांच का स्वागत किया। उन्होंने सोमवार रात देश को संबोधित करते हुए कहा, भ्रष्टाचार के खिलाफ हर प्रभावी कदम बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकारी अधिकारियों से जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने की अपील की।
जेलेंस्की खुद भी भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को लेकर जनता के असंतोष का सामना कर चुके हैं। पिछले महीने उन्होंने एक कानून वापस लिया था जो भ्रष्टाचार विरोधी संस्थाओं की स्वतंत्रता को सीमित कर देता। यह फैसला उन्होंने तब बदला, जब देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने भी उन्हें चेताया।
ये भी पढ़ें: अफगानिस्तान के साथ सीमा बंदी से पाकिस्तान को रोज करोड़ों का नुकसान, बलूचिस्तान के कारोबारियों का दावा
जांचकर्ताओं का आरोप है कि एनरगोएटम के आपूर्तिकर्ताओं को कंपनी के साथ काम जारी रखने के लिए अनुबंध मूल्य का 10 से 15 फीसदी रिश्वत के रूप में देना पड़ता था। साथ ही यह भी संदेह है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने 'भर्ती, खरीद प्रक्रिया और वित्तीय संसाधनों के प्रवाह' पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया और रिश्वतखोरी का यह नेटवर्क चलाया।
इस बीच, रूस की खुफिया एजेंसी एफएसबी ने मंगलवार को दावा किया कि उसने यूक्रेनी जासूसों की एक साजिश नाकाम की है, जिसमें रूसी पायलटों को भर्ती कर एक मिग-31 लड़ाकू विमान को हाइजैक करने की योजना थी, जो किंझाल हाइपरसोनिक मिसाइल ले जा रहा था। एफएसबी हालांकि अक्सर ऐसे दावे करती है, लेकिन आमतौर पर कोई सबूत पेश नहीं करती। यूक्रेनी अधिकारियों ने इस दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यूक्रेन की जनरल स्टाफ ने दावा किया कि उसकी सेना ने रूस के सारातोव तेल रिफाइनरी पर हमला किया, जिससे 'भीषण आग' लगी। यह पिछले कुछ महीनों में पांचवां ऐसा हमला बताया गया है।
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यह बयान उस समय आया है, जब एक दिन पहले एजेंसी ने ऊर्जा क्षेत्र में 15 महीने से चल रही भ्रष्टाचार जांच की कुछ जानकारी साझा की थी, जिनमें एनरगोएटम का नाम भी शामिल है। रूस के लगातार हवाई हमलों के कारण यूक्रेन को बार-बार ऊर्जा ढांचे की मरम्मत करनी पड़ी है, जिससे इस क्षेत्र में यूक्रेनी और विदेशी फंड की बड़ी मात्रा प्रवाहित हुआ है। यूक्रेन के ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि रूस ने सोमवार रात खारकीव, ओडेसा और दोनेत्स्क क्षेत्रों में ऊर्जा ढांचे पर हमले किए, जिसके बाद देश के अधिकांश हिस्सों में बिजली कटौती लागू की गई है।
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राष्ट्रीय भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो का काम उच्च स्तर पर फैले भ्रष्टाचार को खत्म करना है, जो कीव के यूरोपीय संघ (ईयू) में शामिल होने के प्रयासों में बाधा के रूप में देखा जाता है। यह एजेंसी मुख्य रूप से वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी कंपनियों से जुड़े मामलों की जांच करती है।
इससे पहले ब्यूरो ने खुलासा किया था कि रक्षा क्षेत्र में फर्जी सौदों के जरिये लाखों डॉलर की हेराफेरी की गई थी, जो यूक्रेन की सेना के लिए मोर्टार शेल खरीदने के लिए आवंटित की गई थी। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस नई जांच का स्वागत किया। उन्होंने सोमवार रात देश को संबोधित करते हुए कहा, भ्रष्टाचार के खिलाफ हर प्रभावी कदम बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकारी अधिकारियों से जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने की अपील की।
जेलेंस्की खुद भी भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को लेकर जनता के असंतोष का सामना कर चुके हैं। पिछले महीने उन्होंने एक कानून वापस लिया था जो भ्रष्टाचार विरोधी संस्थाओं की स्वतंत्रता को सीमित कर देता। यह फैसला उन्होंने तब बदला, जब देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने भी उन्हें चेताया।
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जांचकर्ताओं का आरोप है कि एनरगोएटम के आपूर्तिकर्ताओं को कंपनी के साथ काम जारी रखने के लिए अनुबंध मूल्य का 10 से 15 फीसदी रिश्वत के रूप में देना पड़ता था। साथ ही यह भी संदेह है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने 'भर्ती, खरीद प्रक्रिया और वित्तीय संसाधनों के प्रवाह' पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया और रिश्वतखोरी का यह नेटवर्क चलाया।
इस बीच, रूस की खुफिया एजेंसी एफएसबी ने मंगलवार को दावा किया कि उसने यूक्रेनी जासूसों की एक साजिश नाकाम की है, जिसमें रूसी पायलटों को भर्ती कर एक मिग-31 लड़ाकू विमान को हाइजैक करने की योजना थी, जो किंझाल हाइपरसोनिक मिसाइल ले जा रहा था। एफएसबी हालांकि अक्सर ऐसे दावे करती है, लेकिन आमतौर पर कोई सबूत पेश नहीं करती। यूक्रेनी अधिकारियों ने इस दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यूक्रेन की जनरल स्टाफ ने दावा किया कि उसकी सेना ने रूस के सारातोव तेल रिफाइनरी पर हमला किया, जिससे 'भीषण आग' लगी। यह पिछले कुछ महीनों में पांचवां ऐसा हमला बताया गया है।
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