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Ukraine Russia War: यूक्रेन के लिए 33 अरब डॉलर मांगेंगे बाइडन, युद्ध अपराधों की जांच के पक्ष में यूएन महासचिव

Thu, 28 Apr 2022 09:28 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/कीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/कीव Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 28 Apr 2022 09:28 PM IST
सार

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को दो महीने से अधिक समय गुजर चुका है लेकिन अभी भी हालात गंभीर बने हुए हैं। यूक्रेन की मदद के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने देश की संसद से 33 अरब डॉलर की राशि उपलब्ध कराने के लिए कहने का फैसला किया है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने यूक्रेन में रूस के कथित युद्ध अपराधों की जांच का समर्थन किया है।

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Ukraine Russia War Joe Biden will seek 33 billion USD for Kviy UN chief Antonio Guterres favors investigation of war crimes by Russia all updates in Hindi
यूक्रेन में अभी भी गंभीर बने हुए हैं हालात - फोटो : फाइल

विस्तार

पिछले दो महीने से अधिक समय से रूस के हमलों का सामना कर रहे यूक्रेन की मदद के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन बड़ा कदम उठाने वाले हैं। अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि बाइडन संसद से यूक्रेन को मानवीय व सैन्य मदद उपलब्ध कराने के लिए 33 अरब डॉलर (लगभग 25 खरब 29 अरब 68 करोड़ 59 लाख 50 हजार रुपये) की राशि उपलब्ध कराने की मांग करेंगे। उधर, यूक्रेन दौरे पर गए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने देश में रूस की ओर से किए गए कथित युद्ध अपराधों की जांच किए जाने की मांग का समर्थन किया है।

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अमेरिका राष्ट्रपति बाइडन की ओर से इस विशाल राहत पैकेज की मांग संसद से एक प्रस्ताव के साथ की जाएगी। इस प्रस्ताव में पुराने आपराधिक कानूनों में संशोधन करने की मांग की जाएगी ताकि अमेरिका में मौजूद रूसी कुलीनों की संपत्ति को जब्त करना, उसे बेचना और इससे होने वाली आय को यूक्रेन पहुंचाना आसान हो सके। इसे लेकर बाइडन ने गुरुवार को कहा कि यह सस्ता नहीं है, लेकिन अगर हम आक्रामकता को सहते हैं और ऐसा होने देते हैं तो आने वाले समय में यह हम सबके लिए बहुत महंगा पड़ेगा। अमेरिका ने रूस के खिलाफ हाल में  कई बेहद सख्त प्रतिबंध लागू किए हैं।
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अगर ऐसा होता है तो यूक्रेन को युद्ध में मजबूत करने की अमेरिकी कोशिश को बढ़ावा मिलेगा, जिसका हाल-फिलहाल अंत होता नहीं दिख रहा है। अधिकारियों ने पहचान गुप्त रखते हुए बताया कि राष्ट्रपति बाइडन का नवीनतम प्रस्ताव पांच महीने के लिए होने की उम्मीद है जिसमें 20 अरब डॉलर से अधिक राशि यूक्रेन की सैन्य सहायता और पड़ोसी देशों के रक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए, जबकि 8.5 अरब डॉलर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की सरकार के कार्य करने के लिए और तीन अरब डॉलर की राशि को आम नागरिकों की खाद्य और मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए होगी।
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने युद्ध अपराध के आरोपों की जांच का किया समर्थन
उधर, यूक्रेन दौरे पर गए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को इस बात पर जोर दिया कि 21वीं शताब्दी में युद्ध को स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने युद्ध अपराधों के आरोपों की अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत (आईसीसी) से गंभीर जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग का समर्थन किया। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने रूस से विश्व निकाय के साथ ‘सहयोग को स्वीकार ’ करने की अपील की। यूक्रेन आने से पहले गुटेरेस ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। यूक्रेन में उन्होंने कीव के कई हिस्सों का दौरा किया जो तबाह हो गए हैं।

'हमें ये भूलना नहीं चाहिए कि युद्ध हमेशा अपने आपमें सबसे खराब होता है'
चर्च और सेंट एंड्रयू में, जिसे पहले ऑल सेंट इन बुचा कहा जाता था, गुटेरेस ने कहा कि जब हम इस खौफनाक स्थान को देखते हैं, तो यह मुझे महसूस कराता है कि इसकी गंभीर जांच और जिम्मेदारी तय करना कितना अहम है। मुझे खुशी है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत ने स्थिति को समझा है और अभियोजन कार्यालय पहले से यहां मौजूद है। मैं पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत का समर्थन करता हूं और रूस से अपील करता हूं कि वह आईसीसी से सहयोग को स्वीकार करे। जब हम युद्ध अपराध की बात करते हैं तो हमें नहीं भूलना चाहिए कि युद्ध अपने आप में सबसे खराब होता है।


बोरोदयंका शहर का दौरा करते वक्त संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि जब भी मैं क्षतिग्रस्त हो चुकी इमारतों को देखता हूं तो यह कल्पना करता हूं कि उनमें से उनके ही परिवार का घर नष्ट हो गया है। उन्होंने कहा, ‘मैं देखता हूं कि मेरी पोती भय से भाग रही है और परिवार अंतत: मारा गया है। इसलिए 21वीं सदी में युद्ध निरर्थक है। युद्ध बुराई है। और जब कोई यह स्थिति देखता है तो हमारा दिल निश्चित तौर पर पीड़ितों के साथ होता है। हमारी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ होती हैं और हमारी भावनाएं होती है कि 21वीं सदी में किसी भी स्थिति में युद्ध को स्वीकार नहीं किया जा सकता।’

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