नॉर्ड स्ट्रीम-2 गैस पाइपलाइन: बाइडन ने जर्मनी को संभाला, तो यूक्रेन हुआ नाराज
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेन्स्की ने अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस.कॉम को दिए एक ज़ूम इंटरव्यू में कहा कि उन्हें ये खबर प्रेस के जरिए मिली कि गैस पाइपलाइन परियोजना को रोकने की कोशिश बाइडन प्रशासन ने छोड़ दी है
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रूस से जर्मनी तक बन रही गैस पाइपलाइन को ना रोकने के अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के फैसले से अमेरिका का सहयोगी देश यूक्रेन नाराज हो गया है। यूक्रेन इस पाइपलाइन परियोजना को अपनी राष्ट्रीय और ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा समझता है। उक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेन्स्की ने अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस.कॉम को दिए एक ज़ूम इंटरव्यू में कहा कि उन्हें ये खबर प्रेस के जरिए मिली कि गैस पाइपलाइन परियोजना को रोकने की कोशिश बाइडन प्रशासन ने छोड़ दी है। अगले 16 जून को जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शिखर वार्ता भी होने वाली है। साफ तौर पर इस घटनाक्रम से यूक्रेन नाराज और मायूस है।
इसके बावजूद जेलेन्स्की ने इंटरव्यू के दौरान ये उम्मीद जताई कि अमेरिका यूक्रेन को बचाने के लिए रूस के प्रति नरमी बरतने की नीति छोड़ देगा। लेकिन उन्होंने कहा- गैस पाइपलाइन परियोजना रूस के हाथ में एक वास्तविक हथियार है। उन्होंने कहा- ‘ये बात समझना मुश्किल है कि अमेरिका जैसा महान देश ऐसे हथियार के लिए गोली कैसे उपलब्ध करा सकता है।’
गौरतलब है कि अब तक रूस से यूरोप तक गैस यूक्रेन के इलाके से होकर जाती है। लेकिन जर्मनी तक बन रही गैस पाइपलाइन नॉर्ड स्ट्रीम-2 परियोजना के जरिए रूस बिना यूक्रेन के इलाके का इस्तेमाल किए यूरोप गैस भेजने में सफल हो जाएगा। जेलेन्स्की को आशंका है कि इससे उनके देश को अलग-थलग करने की ताकत रूस को हासिल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ अमेरिका ही ऐसा देश है, जो अब भी ऐसा होने से रोक सकता है।
बीते शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि अगर यूक्रेन चाहता है कि रूसी गैस उसके इलाके से होकर गुजरती रहे, तो उसे सद्भावना दिखानी चाहिए। पुतिन ने उस रोज एलान किया था कि नॉर्ड स्ट्रीम-2 की दो लाइनें बन कर तैयार हो गई हैं और रूसी पेट्रोलियम कंपनी गैजप्रोम उनके जरिए गैस भेजने के लिए तैयार है। गौरतलब है कि पहले अमेरिका ने इस गैस पाइपलाइन को रूस की भू-राजनीतिक परियोजना बता कर उसकी आलोचना की थी। लेकिन बाद में जर्मनी से अपने संबंधों का ख्याल करते हुए राष्ट्रपति बाइडन ने इसमें अड़ंगा ना डालने का फैसला किया था।
इस बीच व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा है कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारी नॉर्ड स्ट्रीम-2 परियोजना के बारे में लगातार यूक्रेन के साथ संपर्क में रहे हैं। अभी हाल में इस परियोजना के बारे में जब अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस (संसद) को सौंपी, तो उसके पहले उसके बारे में वाशिंगटन स्थित यूक्रेन के राजदूत और यूक्रेन सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर दिया गया था। प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने जर्मनी पर इस बात का दबाव बनाए रखा है कि वह यूक्रेन और पूर्वी यूरोप के देशों की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी आशंकाओं को दूर करे। प्रवक्ता ने कहा कि अगर इस बारे में यूक्रेन अपनी चिंताएं सीधे जर्मनी को बताता है, तो अमेरिका उसका स्वागत करेगा।
इस बीच अमेरिकी मीडिया में ये खबर भी आई है कि पुतिन से मिलने के लिए जिनेवा रवाना होने से पहले हो सकता है कि राष्ट्रपति बाइडन यूक्रेन के राष्ट्रपति से मुलाकात करें। इसके लिए जेलेन्स्की को वाशिंगटन आमंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि जेलेन्स्की ने वेबसाइट एक्सियोस से कहा कि बाइडन ने उन्हें सीधा संकेत दिया था कि अमेरिका पाइपलाइन को रोकने के लिए तैयार है। लेकिन बाद में ये खबर आई कि बाइडन प्रशसन इस परियोजना से जुड़े प्रतिबंधों को हटा लेगा। इससे उन्हें मायूसी हुई। इससे अब अमेरिका के सामाने जर्मनी को खुश रखते हुए अपने इस अहम सहयोगी देश की चिंताएं दूर करने की चुनौती भी आ खड़ी हुई है।