रूस के खेल में किसने डाला खलल: यूक्रेन के महज 30 युवाओं ने कैसे रोक दिया था रूसी सेना का 64 किमी लंबा काफिला?
यूक्रेन पर कब्जा करने के लिए टैंकों और बख्तरबंद वाहनों से लैस 64 किलोमीटर लंबा रूसी काफिला कीव की ओर बढ़ रहा था, लेकिन यूक्रेनी सेना के 30 सैनिकों की स्पेशल यूनिट ने इस काफिले को नेस्तनाबूद कर दिया। रूस के 200 पैराट्रूपर्स को भी ट्रैस करने में इसी यूनिट ने मदद की थी।
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रूस यूक्रेन जंग को एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। जंग शुरू होने से पहले रूस को इस बात का बिल्कुल भी आभास नहीं था कि युद्ध के मैदान में उसे यूक्रेन से कड़ी टक्कर मिलेगी और महीना भर बीत जाने के बाद भी कीव उसके लिए दूर की कौड़ी ही बना रहेगा।
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन पर कब्जा करने के लिए टैंकों और बख्तरबंद वाहनों से लैस 64 किलोमीटर लंबा रूसी काफिला कीव की ओर बढ़ रहा था, लेकिन यूक्रेनी सेना के 30 सैनिकों की स्पेशल यूनिट ने इस काफिले को नेस्तनाबूद कर दिया और उसे रास्ते में ही रोक दिया।
कैसे भेदा रूस का चक्रव्यूह?
यूक्रेनी एयरफोर्स की यूनिट एयरोरोज्विद्का के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल यारोस्लाव हॉन्कर ने बताया कि, यूनिट के 30 विशेषज्ञों की बाइकर फोर्स की इसमें बड़ी भूमिका रही। इस स्पेशल यूनिट ने न केवल रूसी काफिले को रुकने के लिए मजबूर कर दिया बल्कि उन्हें तितर-बितर भी कर दिया। इस यूनिट ने रात के अंधेरे में गोरिल्ला युद्ध की तर्ज पर रूसी काफिले पर हमले बोले और ड्रोन की मदद से काफिले को बहुत नुकसान पहुंचाया।
ऐसे किया रूसी सेना को परेशान
रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेशल यूनिट ने थर्मल इमेज कैमरों, छोटे बमों और स्नाइपर राइफलों से लैस ड्रोन की मदद से रूस की सेना को हथियारों और राशन के लिए मोहताज कर दिया। हॉन्कर ने बताया कि क्वाड बाइक पर रात में घात लगाकर हमला करते हैं। उन्होंने रूस के कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने बताया कि, रूसी सेना में इस स्पेशल यूनिट का डर इतना है कि, वे रात के समय में आगे नहीं बढ़ते हैं। बल्कि, गांवों और जंगलों में अपने वाहनों और टैंकों को छिपाने के लिए मजबूर होते हैं।
एयरोरोज्विद्का को मिल रही एलन मस्क से मदद
स्पेशल यूनिट एयरोरोज्विद्का ने एक ऐसी प्रणाली विकसित की, जिससे उन्हें दुश्मन की लाइव लोकेशन मिलती रहे। उन्होंने सेंसर का एक नेटवर्क स्थापित किया। इसके अलावा एक डिजिटल नक्शा भी, जिसकी मदद से उसे दुश्मन को ट्रैक करने में मदद मिलती रही। यह एयरोरोज्विद्का एलन मस्क की स्टारलिंक सैटेलाइट प्रणाली का उपयोग करके दुश्मन को कीव के बाहर रोकने में कामयाब हुआ।
200 पैराट्रूपर्स का भी लगाया था पता
युद्ध की शुरुआत में वोलोदिमिर जेलेंस्की व अन्य यूक्रेनी नेताओं के अपहरण के लिए पुतिन ने 200 पैराट्रूपर्स को कीव में उतारा था। अब दावा किया जा रहा है कि इन पैराट्रूपर्स का पता लगाने में भी इसी 30 सैनिकों की स्पेशल यूनिट ने मदद की थी। इसी की मदद से यूक्रेन ने पैराट्रूपर्स के उतरते ही उन्हें मौद की नींद सुला दिया था।
कैसे बना था एयरोरोज्विद्का
यूक्रेनी सेना की प्रमुख अंग बन चुकी एयरोरोज्विद्का विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने वाले युवाओं द्वारा शुरू की गई थी। 2014 में क्रीमिया युद्ध के समय इन युवाओं की टीम ने स्वेच्छा से रूस के खिलाफ लड़ने की इच्छा जताई थी। अपनी तकनीकि और कौशल का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने 2014 में भी रूस को काफी नुकसान पहुंचाया था। इसके संस्थापक वोलोदिमिर कोचत्कोव थे, जो 2015 में दोनाबास में मारे गए थे। तत्कालीन रक्षा मंत्री द्वारा 2019 में इस यूनिट को भंग कर दिया गया था, लेकिन रूसी आक्रमण के खतरे के रूप में पिछले साल अक्टूबर में इसे जल्दबाजी में पुनर्जीवित किया गया।