UK Strikes: ब्रिटेन में आया ‘असंतोष का ग्रीष्म काल’, हड़तालों की झड़ी लगने का अंदेशा
बुधवार को जारी ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मई में ब्रिटेन में मुद्रास्फीति की दर 9.1 फीसदी रही। खाद्य पदार्थों और ईंधन की महंगाई इस औसत से भी ऊपर रही। विशेषज्ञों के मुताबिक महंगाई के कारण रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है...
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ब्रिटेन में रेल हड़ताल शुरू होने के बाद अब शिक्षक, चिकित्सा कर्मी, सफाई कर्मी और कई उद्योगों के कर्मचारियों ने भी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। देश में खाद्य पदार्थों और ईंधन की महंगाई से परेशान ये सभी कर्मचारी अधिक वेतन की मांग कर रहे हैं। तीन दशक के अंदर ये पहला मौका है, जब ब्रिटेन में रेल हड़ताल हुई है। वेतन बढ़ाने और बेहतर सेवा शर्तों की अपनी मांग के समर्थन में रेल कर्मचारियों ने मंगलवार को हड़ताल की। इसके पहले हड़ताल टालने के लिए चल रही कर्मचारी यूनियन और सरकार के बीच चल रही बातचीत सोमवार को नाकाम हो गई थी। कर्मचारी मंगलवार को हड़ताल पर रहे। इसके बाद वे गुरुवार और शनिवार को हड़ताल करेंगे।
30 साल पहले हुई थी आखिरी रेल हड़ताल
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के मुताबिक 30 साल पहले आखिर रेल हड़ताल हुई थी, तब यूनियन कर्मचारियों के वेतन में 8.8 फीसदी बढ़ोतरी करवाने में सफल रही थी। इस बार 40 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने हड़ताल की राह पकड़ी है। इनमें सिग्नल, रखरखाव और नेटवर्क रेल से जुड़े कर्मी शामिल हैं।
ब्रिटेन में 1990 के दशक में रेलवे का निजीकरण किया गया था। आज निजी 13 कंपनियां अलग-अलग लाइनों पर ट्रेनों का संचालन करती हैं। सरकार और निजी कंपनियों का दावा है कि रेलवे को पहले से ही 16 बिलियन पाउंड की सब्सिडी मिली हुई है। रेलवे संचालन का खर्च 20 बिलियन पाउंड सालाना है, जबकि किराये से सिर्फ चार बिलियन पाउंड की आमदनी होती है। संचालक कंपनियों के मुताबिक कोरोना महामारी के समय हुए लॉकडाउन के बाद ट्रेनें पूरी क्षमता से चल रही हैं, लेकिन यात्री अभी भी पहले जितनी संख्या में ट्रेन सेवाओं का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। इस कारण किराए से आमदनी और घट गई है।
ट्रेड यूनियनों का दावा है कि देश में बढ़ी महंगाई के कारण रेल कर्मचारियों के लिए पुराने वेतन पर जीना संभव नहीं रह गया है। साथ ही यूनियनों ने कहा है कि महामारी के दौरान कर्मचारियों ने जान पर खेल कर रेल सेवाओं को जारी रखा था। अब उनके उस योगदान को स्वीकार किया जाना चाहिए।
मई में मुद्रास्फीति की दर 9.1 फीसदी
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक ब्रिटेन में महंगाई 40 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। बुधवार को जारी ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मई में ब्रिटेन में मुद्रास्फीति की दर 9.1 फीसदी रही। खाद्य पदार्थों और ईंधन की महंगाई इस औसत से भी ऊपर रही। विशेषज्ञों के मुताबिक महंगाई के कारण रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो गई है। पोर्टफोलियो मैनेजर पॉल क्रेग ने टीवी चैनल सीएनबीसी से कहा- ‘निराश करने वाली बात यह है कि कॉस्ट ऑफ लिविंग का संकट जल्द खत्म होने वाला नहीं है।’
ब्रिटेन में कई जनसमूहों में पैदा हुए असंतोष की वजह इसी संकट को बताया जा रहा है। इसी का एक नतीजा रेल हड़ताल के रूप में सामने आया है। जल्द ही कई दूसरे क्षेत्रों के कर्मचारी भी हड़ताल पर जा सकते हैं। ब्रिटेन में असंतोष का ऐसा नजारा बीते तीन-चार दशक में देखने को नहीं मिला है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने मंगलवार को कहा कि हड़तालों से कारोबार को नुकसान पहुंचेगा। उससे स्थिति और बिगड़ जाएगी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इन गर्मियों में भड़क रहे असंतोष से जॉनसन और उनकी सरकार गहरे दबाव में है।